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तालिबान पर प्रतिबंध के बावजूद अमेरिका ने शुरू की मानवीय सहायता 

तालिबान

अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुए एक महीने से भी ज्यादा समय हो गया है। अमेरिकी फौज की वापसी के बाद सत्ता पर काबिज तालिबान ने एक बार फिर से कठोर इस्लामी कानूनों को लागू कर दिया है। अफगानिस्तान में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर तालिबानी फरमानों से पूरी दुनिया चिंतित हैै। संयुक्त राष्ट्र से लेकर दुनिया भर की सरकारें अफगानिस्तान में शांति कायम किए जाने की बात कर रही हैं।

इस चिंता के बीच कि तालिबान पर प्रतिबंध से अफगानिस्तान में जारी मानवीय संकट और बिगड़ने लगा है। जिसकों देखते हुए अमेरिका ने आर्थिक रूप से कमजोर राष्ट्र में सहायता के लिए मार्ग प्रशस्त करने के लिए कुछ जरुरी कदम उठाए हैं।

तालिबान पर प्रतिबंधों को बरकरार रखते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार, 24 सितंबर को अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता की सुविधा के लिए दो सामान्य लाइसेंस जारी किए हैं। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रेजरी विभाग ने कहा कि एक लाइसेंस अमेरिकी सरकार, गैर सरकारी संगठनों और संयुक्त राष्ट्र सहित कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अफगानिस्तान को मानवीय सहायता के प्रावधान में शामिल होने की अनुमति देगा। दूसरी ओर दूसरा लाइसेंस, खाद्य, दवा और अन्य वस्तुओं के निर्यात और पुनः निर्यात से संबंधित कुछ लेनदेन को अधिकृत करेगा।

अगस्त में एक बार फिर तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया, क्योंकि अमेरिका की सेना 20 साल के लंबे युद्ध के बाद अफगानिस्तान से लौट रही है। लेकिन बिडेन प्रशासन ने कहा है कि तालिबान को वैश्विक आतंकवादी समूह के रूप में ब्लैकलिस्ट करने के बावजूद अमेरिका अफगानिस्तान में मानवीय कार्यों की अनुमति देना जारी रखेगा।

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10 मिलियन अफगानी बच्चों को मानवीय सहायता की जरूरत

अफगानिस्तान में यूनिसेफ के संचार प्रमुख सैम मोर्ट ने कहा, “आज अफगानिस्तान में लगभग 10 मिलियन बच्चे हैं जिन्हें मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है। इस संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार लोग सबसे अधिक कीमत चुका रहे हैं।”

ये कदम संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के सुझाव के बाद सामने आया है संयुक्त राष्ट्र बाल कोष का कहना है कि लगभग 10 मिलियन अफगान बच्चों को भोजन, दवा और साफ पानी की कमी के कारण आपातकालीन सहायता की आवश्यकता होती है। यूनिसेफ के अनुसार, बुनियादी जरूरतों तक पहुंच की कमी के कारण कई बच्चे कुपोषित हैं। अलग से यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक, हेनरिटा फोर ने भी चेतावनी दी थी कि इस वर्ष लगभग दस लाख अफगान बच्चों को भुखमरी का खतरा है। फोर ने धनी देशों से राजनीतिक विचारों को अलग रखने और अफगानिस्तान को मानवीय सहायता देने का आह्वान किया।

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