[gtranslate]
world

युगांडा में राष्ट्रपति चुनाव में भारी उथल-पुथल, पूर्व राष्ट्रपति और सिंगर बॉबी वाइन के बीच कांटे की टक्कर

युगांड़ा में लोगों को पिछले 35 सालों से एक ही राष्ट्रपति का नाम याद है। वो है यूवेरी मुसेवेंनी। मुसेवेंनी 1986 में सशस्त्र विद्रोह के दम पर सत्ता में आए थे। सत्ता में ऐसे आए कि अब सत्ता से जानें का नाम नहीं ले रहे है। ऐसा नहीं है कि मुसेवेंनी ने अपने शासनकाल के दौरान युगाड़ा में सुधार नहीं किए, सुधार जरूर हुए। लेकिन सत्ता में बने रहने के लिए उन्होंने करिश्माई व्यक्तित्व के विचार को बढ़ावा दिया, स्वतंत्र संस्थानों से समझौता किया और विरोधियों को दरकिनार करके सफलता हासिल की। पिछले चुनावों में जब उनसे पूछा गया कि आप सत्ता से क्यों नहीं हट रहे तो उन्होंने जवाब दिया कि “मैं केले के उस बगान से कैसे जा सकता हूं जिसे मैंने लगाया था और जिसमें फल आने लगे हैं?”

26 जनवरी 1986 को मुसेवेंनी की नेशनल रेसिस्टेंस सेना ने देश को आज़ाद कराया और बेवजह के युद्ध और मौतों का दौर ख़त्म कर दिया। यूवेरी मुसेविनी के करीबी दोस्त और सलाहकर जॉन नगेंडा कहते हैं कि मुसेविनी की निस्वार्थता एक ऐसी वजह है जो लोगों को उनके प्रति वफादार रखती है। लेकिन इस बार चुनावों में यूवेरी मुसेवनी के सामने युगाड़ा के पॉप सिंगर बॉबी वाइन है। पॉप सिंगर बॉबी वाइन युगाड़ा के नौजवानों की पहली पंसद बना हुआ है। एक तरफ नौजवान सिंगर, दूसरी तरफ सत्ता पर पिछले 35 साल से राज करने वाला और दो तानाशाहों को शिकस्त करने वाला मंझा हुआ राजनेता। मुसेविनी से अपने देशवासियों से वादा किया था, कि वह देश में लोकतंत्र लाएंगे, लोकतंत्र तो युगाड़ा में नहीं आया, लेकिन एक और तानाशाह मिल गया। मुसेवनी पर आरोप है कि उसने संविधान में हेर-फेर करके अजेय रहने का रास्ता साफ कर लिया है। युगांडावासियों ने भारी सुरक्षा के तहत मतदान किया है और चुनाव में दिग्गज नेता योवेरी मुसेवेनी को एक पूर्व पॉपस्टार बॉबी वाइन के खिलाफ वर्षों में सबसे रक्तपात अभियानों के बाद एक इंटरनेट ब्लैकआउट किया है। कंपाला में गुरुवार को भारी सैन्य और पुलिस की उपस्थिति में मतदान हुआ, जिसमें संचार बंद के माध्यम से हिंसक घटनाओं की कोई रिपोर्ट नहीं थी। 17.7 मिलियन पंजीकृत मतदाता हैं और परिणाम 48 घंटों के भीतर आने की उम्मीद थी। निजी टीवी चैनलों द्वारा प्रसारित मतदान केंद्रों के फुटेज के आधार पर मतदान मजबूत हुआ। युगाडा में 14 जनवरी को चुनाव हुआ था। सिंगर बॉबी वाइन ने आरोप लगाया है कि इन चुनावों में धाधली हुई है। मतगणना के दिन बॉबी वाइन ने ट्विटर पर ट्वीट कर कहा था कि मेरे घर और आसपास का नेटवर्क बंद कर दिया गया है ना ही कही फोन कर पा रहा हूं और न ही कोई फोन, मैसेज रिसीव कर पा रहा हूं।

कौन है युगाड़ा का बिग डैडी

जब युगाड़ा 1962 में आजाद हुआ, देश को आज़ादी मिली, लेकिन भूतपूर्व कुक और अब आर्मी अफ़सर को सलाखों के पीछे डालने की तैयारी चल रही थी। वजह, वॉर क्राइम्स का आरोप। फिर उसको सहारा मिला। मदद का हाथ आया। प्रधानमंत्री मिल्टन ओबोटे का। ओबोटे ने आर्मी अफ़सर का गुनाह माफ़ कर दिया। और, उसे आर्मी में कैप्टन बना दिया। वो था ईदी अमीन डाडा। जिसे युगांडा के लोग ‘बिग डैडी’ कहकर बुलाते थे। ओबोटे ने ईदी अमीन के दम पर तख़्तापलट कर दिया। ओबोटे नए राष्ट्रपति बन गए। ईदी अमीन की तरक्की उसी अनुपात में होने लगी। ये समीकरण जल्दी ही बिगड़ गया। और, फिर ऐसा हुआ कि राष्ट्रपति ओबोटे एक सम्मेलन में हिस्सा लेने सिंगापुर गए। वापसी के रास्ते में पता चला, उनकी कुर्सी पर कोई और बैठ चुका है। ये ‘कोई और’ नहीं था। बल्कि उनका पुराना दोस्त ईदी अमीन था। ओबोटे अब शरणार्थी हो चुके थे। उन्हें पड़ोसी देश तंज़ानिया भागना पड़ा। ईदी अमीन ने एक सपना देखा और 90 हज़ार एशियाई लोगों को घर-बार छोड़कर निकल जाने का हुक्म सुना दिया। उसने अपना एयरपोर्ट और अपने सैनिक प्लेन हाईजैकर्स के कदमों में बिछा दिया। तब इजरायल ने चलाया था हैरतअंगेज़ ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’. और, ईदी अमीन की नाक के नीचे से लोगों को छुड़ाकर ले गए थे। युगाड़ा में एक कहावत बड़ी प्रचलित हुई है ‘युगांडा में जब आर्मी बोलती है, तब जनता सुनती है। और, जब आर्मी कुछ करती है, तब ख़ून की नदियां बहती हैं।’ ईदी अमीन हमेशा आर्मी की ड्रेस में रहता था। साल 1979 में, जब ईदी अमीन की सेना कमज़ोर हुई और मिल्टन ओबोटे ने तंज़ानिया के साथ मिलकर धावा बोला। अप्रैल के महीने में ईदी अमीन को देश छोड़कर भागना पड़ा।

ईदी अमीन और मिल्टन ओबोटे को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, यूवेरी मुसेविनी ने। 1986 में मुसेवेनी युगांडा के नौवें राष्ट्रपति बने। 1996 में उन्होंने पहली बार चुनाव जीता था। 001 में दोबारा जीते। बतौर संविधान, ये उनका अंतिम कार्यकाल होता। एक राष्ट्रपति के लिए दो टर्म की लिमिट थी। मुसेवेनी ने इसे तोड़ा। संवैधानिक तरीके से। संविधान संशोधन के जरिए। सितंबर, 2019 में उनकी उम्र 75 साल हो जाती। इसके बाद वो राष्ट्रपति पद पर नहीं रह सकते थे। 2017 में उन्होंने इसे भी खत्म कर दिया। अब अधिकतम उम्र की सीमा खत्म हो चुकी है। साथ ही मुसेवेनी पर संबंधित पाबंदियां भी। कानूनी चुनौती खत्म। लेकिन फिर युगाड़ा के लोगों में एक नया चेहरा ऊभरकर आया। झुग्गियों में पला-बढ़ा और जिसने संगीत को अपना हथियार बनाया। संघर्ष के गीत लिखे। दुनियाभर में नाम कमाया। अब अपने लोगों के लिए अच्छी ज़िंदगी कमाने की चाहत। नाम रॉबर्ट चागुलानी सेंतामो, उर्फ़ बॉबी वाइन।

साल 2018 में बॉबी वाइन पर हमला हुआ। ये हमला हुआ राष्ट्रपति मुसेवेनी के इशारों पर। बॉबी वाइन की गाड़ी पर गोलियां चलीं। उनके ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई। घायल बॉबी वाइन को मिलिटरी की जेल में रखा गया। वहां उन्हें बेतरह टॉर्चर किया गया। मेडिकल सुविधा तक नहीं दी गई.। इस घटना ने जनता के मूड में उबाल ला दिया। युगांडा ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में बॉबी वाइन की रिहाई को लेकर प्रोटेस्ट हुए। इसका असर हुआ। बॉबी वाइन रिहा हो गए। जुलाई, 2019 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की बात कही। ये योवेरी मुसेवेनी को सीधी टक्कर का ऐलान था।

युगांडा के विपक्षी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बोबी वाइन ने अल जज़ीरा को बताया कि सेना ने गुरुवार के चुनाव में धांधली का आरोप लगाने के कुछ ही घंटों बाद उनका यौगिक पदभार संभाल लिया है। बोबी वाइन ने कहा कि सेना ने पिछले दो दिनों से उसके घर को घेर रखा था और शुक्रवार को उसने अपने परिसर को अपने कब्जे में कर लिया। शुक्रवार को युगांडा के निर्वाचन आयोग ने कहा कि लंबे समय से राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने प्रोविजनल परिणामों में बोबी वाइन और अन्य उम्मीदवारों का नेतृत्व किया, जिन्हें बोबी वाइन ने “मजाक” बताया। 6.8 मिलियन मतपत्रों की गिनती के साथ, या 37 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं के साथ, मुसेवेनी ने 4.05 मिलियन, या 62.2 प्रतिशत जीते थे, जबकि मुख्य विपक्षी उम्मीदवार वाइन में 1.99 मिलियन वोट (30.6 प्रतिशत) थे, चुनाव आयोग ने रात 9 बजे के बाद ही कहा। यह कहता है कि अंतिम परिणाम शनिवार दोपहर को घोषित किए जाएंगे।

You may also like

MERA DDDD DDD DD