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ट्रम्प का उत्पाती व्यवहार उनको दोबारा राष्ट्रपति बना पाएगा!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने अटपटे, कई बार तथ्यहीन बयानों और अजीबो-गरीब व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। अमेरिका में पिछले 3 सालों के दौरान उथल-पुथल और अराजक राजनीति का माहौल अमेरिकी नागरिकों को कितना नाराज कर चुका है, या फिर कितना भाया है, यह तय करेगा कि राष्ट्रपति ट्रम्प दोबारा चुनाव मैदान में उतरते हैं या नहीं। ट्रम्प ने अपनी 2016 की चुनावी सभाओं में अमेरिका को बड़े सपने दिखाए थे। उन्होंने अपने राष्ट्रपति चुने जाने पर आर्थिक स्थिरता, रोजगार से लेकर नस्ली हिंसा की चपेट में आ चुके देश को एक बार फिर से शांति और समृद्धि का भरोसा दिलाया था। हुआ लेकिन ठीक उल्टा है। नस्ली हिंसा अपने चरम पर है। राष्ट्रपति ट्रम्प का प्रशासन पहले ही दिन से अस्थिरता और अनिश्चिता के चलते लड़खड़ाता दिखा। उम्मीद थी कि रियल स्टेट के बादशाह टंªप राष्ट्रपति बनकर देश में आर्थिक संपदा बरसाने का काम करेंगे। टंªप की एग्रेसिव नीतियों ने उल्टे बिजनेस को चैपट कर डाला है। 45वीं जी-7 समिट 24 से 26 अगस्त तक फ्रांस में आयोजित की गई। इस समिट में टंªप हालांकि छाए रहे लेकिन उनका व्यवहार एक मंझे हुए राजनेता जैसा नहीं था। ट्रम्प  की चीन नीति, इरान के साथ लगातार खराब हो रहे संबंध, पर्यावरण को लेकर असंवैदनशीलता और रूस को जी-7 में दोबारा शामिल करने जैसे मुद्दों पर अमेरिका के समर्थक देशों में बैचेनी इस समिट के दौरान स्पष्ट देखने को मिली। चीन के साथ आर्थिक मुद्दों को लेकर चल रहे टेªड वार के बारे में टंªप ने फ्रांस में कहा कि चीन अमेरिका की शर्तों पर बात करने को तैयार हो गया है। उनके इस बयान को ज्यादातर झूठ मान रहे हैं। ट्रम्प के एडवाइजर फ्रांस में इस समिट को कवर करने आई अंतरराष्ट्रीय प्रेस को यह समझाने में विफल नजर आए कि वाकई में इस समिट के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प को चीन सरकार का ऐसा कोई संदेश मिला। स्वयं राष्ट्रपति ने प्रेसवार्ता के दौरान मीडिया को अमेरिका के प्रति निगेटिव एटीटियूड रखने का दोषी ठहरा दिया। इतना ही नहीं ग्लोबल वार्मिंग जैसे संवेदशनील मुद्दे पर ट्रम्प का रवैया बेहद निराशजनक रहा। उन्होंने जी-7 देश के नेताओं की इस मुद्दे पर हुई बैठक में भाग ही नहीं लिया। प्रेस द्वारा पूछे गए कई प्रश्नों को या तो टाल गए या गलत उत्तर देते नजर आए। इसके ठीक उलट फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक मंझे हुए राजनेता का परिचय दिया। दरअसल राष्ट्रपति ट्रम्प का फोकस अपने कोर वोटरों को रिझाने का होता है। एक कुशल मारकेर्टिंग एजेंट की तरह वे अपने झूठ को भी सही कह बेचने में माहिर हैं। फ्रांस से वापस अमेरिका पहुंचे टंªप ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें वे जी-7 देशों के अन्य नेताओं संग विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते ऐसे प्रदर्शित किए गए हैं जैसे मानो पूरी समिट में वे ही असल लीडर हों। ट्रम्प का पूरा प्रयास अमेरिकी राष्ट्रवाद को उभार अपने वोट सुरक्षित करने पर रहता है। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अग्रेन’ (अमेरिका को दोबारा पावरफुल बनाओ) जैसे नारों को सहारे वे एक बार फिर से राष्ट्रपति बनने का सपना देख रहे हैं। कुल मिलाकर जी-7 समिट में जहां अंतरराष्ट्रीय मीडिया से लेकर अन्य देशों के नेताओं तक, राष्ट्रपति टंªप कोई खास प्रभाव छोड़ पाने में विफल रहे हैं। हालांकि उनका दावा कि चीन ने उनके दबाव के आगे घुटने टेक दिए है और रूस भी उनकी ताकत को पहचानने लगा है, उनके समर्थकों के बीच भारी उत्साह का कारण बनते नजर आ रहा है। अब यदि अगले वर्ष होने जा रहे चुनावों से पहले वाकई चीन झुकता है, उत्तरी कोरिया दबाव में आता है और अफगानिस्तान में अठारह बरस से जमी अमेरिकी फौज की वापसी हो पाती है, अमेरिका में चल रही आर्थिक मंदी कुछ पटरी पर आती है और नस्ली हिंसा से घबराया समाज कुछ शांति पाने में सफल होता है तो टंªप शायद दोबारा राष्ट्रपति बन पाये। अभी लेकिन स्थितियां उनके अनुकुल नहीं है

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