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महाभियोग चला तो ट्रंप कभी नहीं बन सकेंगे राष्ट्रपति !

अमेरिका में संसद पर हुए बवाल के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दवाब बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जाने में अब 12 दिन ही दिन शेष हैं। जो बिडेन के 20 जनवरी को शपथ लेते ही ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति कहलाएंगे। लेकिन इससे पहले वे धड़ाधड़ कई ऐसे लोगों को माफी दे चुके हैं जो किसी न किसी गंभीर अपराध की सजा काट रहे थे। सबको माफ करने के साथ ही अब ट्रंप को लगने लगा है कि राष्ट्रपति पद से हटते ही उनपर संकट के बादल घिर सकते हैं।

अमेरिकी संसद में जो हिंसा हुई उससे उनकी मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उन पर महाभियोग चलाने की तैयारी की जा रही है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स ने कहा है कि वे सोमवार को जल्द से जल्द ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग का एक अनुच्छेद पेश करेंगे, जिसमें “संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने” द्वारा उच्च अपराध और दुष्कर्म में संलग्न होने का आरोप लगाया जाएगा।

चल रही महाभियोग की बात

इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने कहा कि अगर ट्रम्प स्वेच्छा से पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो संसद उन पर कार्रवाई करेगी। उन्होंने राष्ट्रपति निक्सन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कैसे 50 साल पहले राष्ट्रपति निक्सन को संसद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था। डेमोक्रेट नेता ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उसी तरह से खतरनाक राजद्रोह किया है। उन्होंने संसद में रिपब्लिकन सीनेट के सदस्यों से ट्रम्प का अनुसरण करने के लिए ट्रम्प से अपने कार्यालय को तुरंत छोड़ने के लिए कहने का आग्रह किया। अगर ट्रम्प स्वेच्छा से राष्ट्रपति के पद को नहीं छोड़ते हैं, तो अमेरिकी संसद आगे की कार्रवाई करेगी और उनपर महाभियोग चलाया जाएगा।

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साल 2019 में क्या हुआ था

ट्रंप पर यदि महाभियोग चला तो ट्रंप ऐसे पहले राष्ट्रपति होंगे जिन्हें अपने एक ही कार्यकाल में 2 बार महाभियोग का सामना करना पड़ा। 2019 में भी ट्रंप पर महाभियोग चल चुका है। उनपर 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में जीत के लिए यूक्रेन से मदद लेने का आरोप था। उस समय चर्चा थी कि जो बाइडन और उनके बेटे हंटर बाइडन के यूक्रेन में काफी आर्थिक देनलेन हैं, और ट्रंप चाहते थे कि ये आर्थिक लेनदेन जनता की नजर में आए ताकि बाइडन की छवि खराब हो सके।

एक फोन कॉल पर ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति के बीच के लंबी वार्ता हुई। कुछ खुफिया अधिकारियों को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने ये बात लीक भी कर दी। इसके बाद विपक्षी नेताओं द्वारा ट्रंप पर आरोप लगाया गया कि चुनाव में जीत हासिल करने के लिए यूक्रेनी नेताओं पर जबर्दस्ती बाइडन के लेनदेन की जांच का दबाब बना रहे हैं। नेताओं का ये भी आरोप था कि ऐसा न करने पर ट्रंप ने यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद रोकने की धमकी दी थी। हालांकि महाभियोग साबित नहीं हो सका।

अब फिर से ट्रंप पर महाभियोग लाने की बात चल रही है। हालांकि, यह संभावना नहीं है कि यह प्रक्रिया केवल 12 दिनों में पूरी हो जाएगी। लेकिन अगर ऐसा होता है, तो ट्रम्प अगले कार्यकाल यानी 2024 में फिर से राष्ट्रपति चुनाव में खड़े नहीं हो पाएंगे।

क्या है महाभियोग?

अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को राजद्रोह, रिश्वत और अन्य गंभीर अपराधों में महाभियोग का सामना करना पड़ता है। महाभियोग की प्रक्रिया एक विशेष तरीके से चलती है। जांच के बाद, अपराध के सबूत संसद की न्याय समिति को भेजे जाते हैं। यह समिति जांच करती है, सुनवाई करती है, ड्राफ्ट तैयार करती है और उसके बाद सभी चीजें सीनेट के सभी सदस्यों तक पहुँचती हैं।

महाभियोग के लिए घर को भी फाड़ दिया गया है। जो बिडेन 20 जनवरी को शपथ लेने वाले हैं। इसे देखते हुए, कई सदस्यों का मानना है कि अगर इस समय ट्रम्प के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाती है, तो बिडेन को अपने कार्यकाल की शुरुआत में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अधिकांश सदस्य इसे ” “more harm than good” के रूप में देखते हैं। हालांकि, कई सदस्यों का कहना है कि यह कितना भी मुश्किल क्यों न हो, हमें ट्रंप पर महाभियोग चलाना चाहिए ताकि आने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति को भी इसकी जानकारी हो।

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