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ईरान में सत्ता परिवर्तन की मांग से पीछे हटे ट्रम्प

फ्रांस में संपन्न हुई जी-7 बैठक के बाद यह बड़ी खबर निकल कर आ रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेड वॉर को लेकर चीन के प्रति अपने सुर नरम तो किए हैं साथ ही ईरान के साथ भी अपना रुख बदला है। अमेरिका के राष्ट्रपति टोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रद्द की गई चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता के बहुत जल्द शुरू होने की बात कही है और साथ ही यह भी कहा कि वे तेहरान में शासन परिवर्तन की मांग नहीं कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ट्रंप के रवैये में इस बदलाव से ईरान और चीन के साथ अलग-अलग मोर्चों पर पैदा तनाव कुछ कम हो सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका ने पिछले साल मई में एकतरफा कार्रवाई करते हुए खुद को 2015 के बहुपक्षीय परमाणु समझौते से अलग कर लिया था और उसके बाद ईरान पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे। इन प्रतिबंधों के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है।
“रूहानी द्वारा एक भाषण में कहा गया कि, “पहला कदम प्रतिबंधों से हटना है।”आपको ईरान के खिलाफ लगाये  गए सभी अवैध, अन्यायपूर्ण और गलत प्रतिबंधों से पीछे हटना चाहिए।”
रूहानी का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गत सोमवार को बातचीत के लिए तैयार होने के कथन के बाद आया है। इससे पहले बिअरित्ज पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री जावद जरीफ की जी-7 में मौजूदगी पर ट्रंप खामोश ही रहे और जब पत्रकारों द्वारा जब उनके इस पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा ‘नो कमेंट’। गौरतलब है कि जावद जरीफ को फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सभी देशों को हैरान करते हुए बिअरित्ज में बुलाया था। मैक्रों की मांग है कि ईरान और अमेरिका में समझौता हो जाए। जरीफ ने उनके अलावा अन्य यूरोपीय डिप्लोमेट  से भी मुलाकात की। हालांकि ट्रंप ने जरीफ से मुलाकात को बहुत जल्दबाजी कहा लेकिन  यह भी कहा कि मैक्रों जो कुछ कर रहे हैं वह सब मुझे मंजूर था। लेकिन ईरान में सत्ता परिवर्तन की मांग से ट्रंप का पीछे हटना एक बड़ी राहत है।
तो वही दूसरी तरफ, चीन के साथ चल रहे ट्रेड वॉर के बीच हाल ही में ट्रंप ने 300 करोड़ के चीनी उत्पादों पर 25 के बजाय 30 फीसदी टैरिफ लगाकर दोनों देशों के बीच सितंबर में होने जा रही व्यापारिक वार्ता को रद्द कर दिया था। ट्रंप ने दोनों महाशक्तियों के बीच इस वार्ता को जल्द दोबारा शुरू करने की बात कहते हुए इसे अर्थपूर्ण बताया। ट्रंप ने कहा,”चीन ने उन्हें फोन पर कहा था कि वह अमेरिका से वार्ता के लिए इच्छुक है।” ट्रंप ने इसका स्वागत करते हुए कहा था कि वे (चीन) सौदा करना चाहते हैं जो स्वागत योग्य है। हालांकि जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका के सहयोगी देशों ने भी ट्रंप पर ट्रेड वॉर के खतरे को लेकर दबाव डाला था। रूहानी और ट्रंप दोनों सितंबर के अंत में न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल होंगे। यह उनके मुलाकात का मंच बन सकता है और दोनों के बीच तनाव कम हो सकता है।

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