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नेपाल में संपूर्ण लाॅकडाउन

कोरोना संक्रमण से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। मौजूदा समय में कोरोना से भारत ज्यादा प्रभावित है, लेकिन कोरोना की इस दूसरी लहर से नेपाल भी अछूता नहीं रहा है। देश में हर दिन तेजी से बढ़ रहे संक्रमितों के चलते सरकार ने 15 दिनों का लाॅकडाउन की घोषणा की है। काठमांडू और आस-पास के जिलों में, पुलिस चैकियां स्थापित की गई हैं। इस दौरान लोगों की जरूरत को देखते हुए किराना दुकानों को कुछ घंटों के लिए खोलने की छूट दी गई है।

सरकार ने विदेश से आने वालों के लिए सड़क मार्ग को भी बंद कर दिया है। भारत के नागरिकों के लिए निगेटिव कोरोना रिपोर्ट अनिवार्य है। इतना ही नहीं, उन्हें अपने खर्चे पर 10 दिनों के लिए क्वारंटीन रहना होगा। इससे पहले कोविड की दूसरी लहर के देश के रूपनदेही जिला समेत कुल 14 जिलों में लाॅकडाउन की घोषणा की गई थी। गृह मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक रुपनदेही में 29 अप्रैल से 12 मई, काठमांडू में 29 अप्रैल से पांच मई, ललितपुर में 29 अप्रैल से पांच मई, बांके में 26 अप्रैल से दो मई, भक्तपुर में 29 अप्रैल से पांच मई, दांग में 30 अप्रैल से आठ मई, कैलाली में 29 अप्रैल से पांच मई, सुर्खेत में 29 अप्रैल से पांच मई, चितवन में 29 अप्रैल से 12 मई व पर्सा जिले में 29 अप्रैल से पांच मई तक लाॅकडाउन की घोषणा की गई थी।

मास्क-सैनिटाइजर की हो रही तस्करी कोविडकाल में भी कुछ लोग गलत तरीके से धन कमाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। कोरोना तस्करों और जमाखोरों के लिए कमाई का जरिया बन गया है।

सरकारी निगरानी के बाद भी दिन-रात खुलने वाली दवा की दुकानों से मास्क और सैनिटाइजर गायब हो गया है। जिसका मुख्य कारण इसकी अंधाधुंध तस्करी है। स्थानीय मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध न होने के कारण लोग महंगे दामों पर बाहर से मंगवाने को मजबूर हैं। एक तरफ शासन-प्रशासन लोगों को इसका इस्तेमाल करने के लिए नित नए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रहा है। वहीं मास्क न होने पर जुर्माने का भी प्रावधान लगाया गया है। स्थानीय लोगों की मानें तो ब्रांडेड मास्क, सैनिटाइजर की कीमतें आसमान छू रही हैं। वहीं तस्कर विभिन्न तरीकों से इसकी तस्करी करके मालामाल हो रहे हैं, जबकि भारतीय क्षेत्र में इनका अकाल-सा पड़ गया है। यह सारा सामान दवा की दुकानों पर ही मिलता है। तमाम लोग इसे अपने घर पर बनाकर आपूर्ति भी कर रहे हैं। फिर भी तस्कर इनको थोक के भाव खरीदकर नेपाल भेज रहे हैं। उपजिलाधिकारी फरेंदा राजेश जायसवाल के मुताबिक इस मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो छापेमारी कर कार्रवाई होगी।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते एहतियातन भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। दोनों देश के बीच बेटी-रोटी संबंध होने के बावजूद सीमा के आर-पार आने-जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। एसएसबी जवान हर चेक पोस्ट पर पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी भी कर रहे हैं। लेकिन, खुली सीमा होने कारण दोनों देश के लोगों का आवागमन पगडंडियों के रास्ते अब भी जारी है। इस बीच सीमावर्ती प्रखंड के योगिया, पिपराही समेत सीमा से सटे बाॅर्डर शराब तस्करी का सेफ जोन बन चुका है।

कोरोना संक्रमण को लेकर लागू पाबंदियों के दौरान भी हर दिन नेपाल से भारत में हजारों लीटर शराब लाई जा रही है। इधर, झलौन, कटहा लगडी चोर बाजार के रास्ते खेत और पगडंडियों से होकर लोग आवाजाही कर रहे हैं। नेपाल के लोग सब्जी, दूध, राशन, दवा समेत कई प्रकार के सामान लेने के लिए भारत आ रहे हैं। ऐसे में संदिग्ध लोग भी भारत में प्रवेश कर सकते हैं। नेपाल में लाॅकडाउन के कारण नेपाली पुलिस द्वारा सख्ती के बाद भी आवागमन जारी है। इस संबंध में लोगों ने बताया कि खुली सीमा के कारण पूर्णतः प्रतिबंध नहीं दिख रहा है। शराब के साथ अन्य सामग्री के तस्करी का धंधा काफी जोरों पर है। हर रोज हजारों लीटर शराब भारत में खपाई जा रही है। इस संबंध में 18वीं बटालियन पिपराही ने कहा कि खुली सीमा के कारण थोड़ी-बहुत समस्या है। वैसे एसएसबी जवान पूरी मुस्तैदी के साथ 24 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं।

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