[gtranslate]
world

यह किताब जहरीली है!

अगर हम कहें कि एक किताब को छूने मात्र से आपकी जान जा सकती है तो यकीनन आप विश्वास नहीं करेंगे। लेकिन ये सच है और ये भी सच है कि वो किताब इसी दुनिया में पाई जाती है। दरअसल ऐसी ही किताब ‘शैडोज़ ऑफ़ द वॉल्स ऑफ़ डेथ’ नामक पुस्तक 1874 में प्रकाशित हुई थी। लगभग बाईस इंच चौड़ी और तीस इंच लंबी इस पुस्तक की दो विशेषताएं हैं। एक यह है कि पुस्तक में वॉलपेपर के सौ से अधिक नमूने हैं, और दूसरा यह है कि पुस्तक इतनी जहरीली है कि इसे छूने पर किसी व्यक्ति की जान जा सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस पुस्तक में प्रत्येक वॉलपेपर, जिसमें सौ से अधिक वॉलपेपर का संग्रह है, आर्सेनिक नामक एक बहुत ही खतरनाक जहर से भरा है।

वॉलपेपर का यह संग्रह मिशिगन स्टेट कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर के प्रोफेसर डॉ रॉबर्ट केडज़ी द्वारा संकलित किया गया था। जब 1870 के दशक में वॉलपेपर घर की सजावट के लिए लोकप्रिय हो रहे थे।  डॉ. केडज़ी ने इन जहरीले वॉलपेपर को आम जनता को बड़ी मात्रा में आर्सेनिक जहरों के उपयोग के खतरों के बारे में चेतावनी देने के लिए एकत्र किया। हालांकि आर्सेनिक एक जहर है, लेकिन इसका इस्तेमाल कई खूबसूरत रंग बनाने में किया गया है। आकर्षक वॉलपेपर बनाने के लिए उन्हीं रंगों का इस्तेमाल किया गया था। उन्नीसवीं शताब्दी में अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि उत्पादित सभी वॉलपेपर में से 65 प्रतिशत में आर्सेनिक होता है।

विक्टोरियन समय में यह सामान्य ज्ञान था कि आर्सेनिक एक जहर था। जबकि यह सामान्य ज्ञान है कि इसे खाने से मृत्यु हो सकती है। आम जनता को यह पता नहीं होता था कि अगर यह पेंट या वॉलपेपर बनाने में उपयोग किया जाता है तो आर्सेनिक उतना ही खतरनाक हो सकता है। इसलिए घर की सजावट के लिए आर्सेनिक युक्त पेंट या वॉलपेपर का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था। लोगों को कम ही पता था कि पेंट या वॉलपेपर में मौजूद आर्सेनिक घर के अंदर की हवा को दूषित कर रहा है। तब मरीज उसके रिश्तेदार और यहां तक कि खुद डॉक्टर को भी नहीं पता था कि घर में कोई अचानक बीमार क्यों पड़ गया। डॉ. केडज़ी ने शोध के माध्यम से यह भी साबित किया कि आर्सेनिक-दूषित हवा के लगातार संपर्क में आने से मरीजों की बीमारियाँ बढ़ जाती हैं।

इस तरह के जहरीले वॉलपेपर के इस्तेमाल के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए अपने शोध के हिस्से के रूप में केडीजी ने ऐसे जहरीले वॉलपेपर का एक संग्रह बनाया और उन्हें मिशिगन राज्य के विभिन्न सार्वजनिक पुस्तकालयों में भेज दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजने के उद्देश्य की भी जानकारी दी। संग्रह को संभालते समय दस्ताने पहनने और बच्चों को संग्रह को संभालने की अनुमति नहीं देने के निर्देश भी भेजे गए। ऐसे सैकड़ों संग्रह डॉ. केडज़ी द्वारा बनाए गए थे, जिनमें से अब केवल चार संग्रह मौजूद हैं। इस तरह के संग्रह के जोखिम के कारण कई पुस्तकालयों ने संग्रह को नष्ट कर दिया।  मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी और मिशिगन विश्वविद्यालय में अब केवल चार मूल संग्रह बचे हैं।

You may also like

MERA DDDD DDD DD