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अमेरिका ने 15 साल बाद फिर से खोला बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति की हत्या का मामला

बांग्लादेश के संस्थापक या वहां के  ‘राष्ट्रपिता’ समझे जाने वाले बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के एक दोषी को राजनीतिक शरण देने के 15 साल पुराने एक मामले को अमेरिका  ने फिर से खोला है। बांग्लादेश की वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना  की अगुवाई वाली सरकार, अमेरिका में छिपे बांग्लादेशी सेना के पूर्व अधिकारी एम ए राशिद चौधरी के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका से आग्रह करती रही है। प्रधानमंत्री हसीना ने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र लिखकर चौधरी के प्रत्यर्पण का आग्रह किया था।

भगोड़ा करार दिए गए चौधरी ने सेना के अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर शेख मुजीबुर रहमान की सरकार का  तख्तापलट किया था जिसके बाद वर्ष 1975 में  शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी। पिछले हफ्ते  ढाका ट्रिब्यून में अमेरिकी समाचार पोर्टल पॉलिटिको के हवाले से दी गई खबर के अनुसार अमेरिका के महान्यायवादी विलियम बार्र ने चौधरी को राजनीतिक शरण देने के मामले को फिर से खोला।

बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति और बाद में प्रधानमंत्री रहे शेख मुजीबुर रहमान की 15 अगस्त 1975 को हत्या कर दी गई थी। रहमान के परिवार के सभी सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, लेकिन उनकी बेटियां- शेख हसीना और शेख रेहाना विदेश में होने के कारण बच गई थीं । इस हत्याकांड के 23 साल बाद, बांग्लादेश सेना के पूर्व अधिकारी चौधरी और अन्य भगोड़े दोषियों को उच्च न्यायालय ने 1998 में मौत की सजा सुनाई थी।उच्चतम न्यायालय ने 2009 में निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था।

रहमान की हत्या के बाद बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) की सरकारों ने चौधरी का पुनर्वास ही नहीं,बल्कि  राजनयिक के तौर पर विदेश में चौधरी की नियुक्ति भी की गई।  डेली स्टार की खबर के मुताबिक चौधरी, परिवार सहित 1996 में ब्राजील से अमेरिका भाग गया और बाद में उसे  राजनीतिक शरण मिल गई। पॉलिटिको में प्रकाशित खबर के अनुसार, बार्र ने ‘चुपके से’ उस मामले को खोल दिया जो ‘चार दशक से दो महाद्वीपों में चल रहा है। ‘ खबर के अनुसार, ‘लगभग 15 साल से मामला बंद था। लेकिन बार्र ने अब इसे दोबारा खोला है.’ बार्र द्वारा उठाए गए कदम से राशिद को मिली शरण ख़त्म  हो सकती है और उसे बांग्लादेश प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

इस साल रहमान की जन्म शताब्दी है। माजिद ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उसने बंगबंधु रहमान की हत्या की है। माना जाता है कि वह कई सालों तक भारत में छिपा रहा।।माजिद, रहमान की हत्या में शामिल रहे दर्जनों लोगों में से एक है जिनकी फांसी की सजा को 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। 1998 में निचली अदालत ने कुछ सैन्य अधिकारियों को फांसी की सजा सुनाई थी जो कि रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या में शामिल रहे थे।

बांग्लादेश की वर्तमान पीएम शेख हसीना  वाजिद, रहमान की बेटी हैं। हसीना इस घटना में बच गई थीं क्योंकि उस वक्त वह अपनी बहन के साथ जर्मनी के दौरे पर थीं। उस घटना में रहमान के परिवार में सिर्फ यही दो बहनें जिंदा बच पाई थीं। बताया जाता है कि उनकी बाद की सरकारों ने रहमान के हत्यारों को कूटनीतिक मिशन पर विदेश भेजा दिया था।

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