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अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में बढ़ रही खटास!

सऊदी अरब और अमेरिका का रिश्ता बेहद ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। दोनों के रिश्तों की मधुरता अब खत्म होने की कगार पर है। इसका कारण है अमेरिकी खुफिया एजेंसी द्वारा पत्रकार जमाल खशोगी हत्याकांड में किया गया खुलासा।

दरअसल, बिडेन प्रशासन की ओर से खुफिया एजेंसी ने एक रिपोर्ट सार्वजनिक की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पत्रकार की हत्या को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आदेश पर अंजाम दिया गया था। लेकिन दूसरी तरह इस रिपोर्ट के खुलासे से नाराज सऊदी ने अमेरिका के इन सभी दावों से इंकार कर दिया है।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि सऊदी अरब सरकार देश के नेतृत्व से संबंधित रिपोर्ट में उल्लिखित नकारात्मक, गलत और अस्वीकार्य आकलन को खारिज करती है और इस रिपोर्ट में गलत जानकारी और निष्कर्ष शामिल हैं।

अमेरिकी संसद में प्रिंस सलमान के खिलाफ रिपोर्ट पेश होने के बाद सऊदी मीडिया की ओर से कहा गया है कि अमेरिका इस तरह रणनीतिक सहयोगियों को धमकी ना दे। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्तांबुल में पत्रकार जमाल खशोगी को ‘पकड़ने या मारने’ के अभियान को मंजूरी MBS ने दी थी। इस मामले पर सऊदी अरब के कालम्निस्ट ने कहा है कि उनके देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।

सउदी बन रहा है दुश्मन!

स्थानीय अल जज़ीरा अख़बार में खालेद अल-मलिक ने लिखा है- रणनीतिक सहयोगी को धमकी देने का अमेरिका के पास कोई अधिकार नहीं है। घरेलू मतभेदों के चलते क्षेत्रीय हितों और अपने साझेदारों को क्षति पहुंचाना अमेरिका के हित में नहीं है।

वर्ष 1945 अमेरिका और सऊदी अरब के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई। उस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट थे। उन दिनों दोनों बेहद अजीज दोस्त हुआ करते थे दोनों देशों में उसी दौरान तेल को लेकर डील हुई थी।

दरअसल उन दिनों दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका खुद को आर्थिक मोर्चे पर मजबूत करने के लिए प्रयासरत था। लेकिन अब हालात और स्थितियां कुछ और ही हैं। सऊदी से तेल आपूर्ति के लिए अमेरिका निर्भर नहीं रहा है। लेकिन सऊदी को अब भी सैन्य मदद के लिए अमेरिका की जरूरत है। जबकि बाइडेन ने पहले ही इस बात का ऐलान कर दिया है कि यमन में वो साऊदी अरब की कार्रवाई का समर्थन नहीं करते हैं।

वर्ष 2019 में ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमले और खाड़ी युद्ध के बाद भी मलिक ने कहा कि सऊदी खाड़ी युद्ध और साल 2019 में ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमले के बाद भी अपने रक्षा मामलों में अमेरिका पर निर्भर है। लेकिन तनाव गहराने पर वह चीन और रूस की ओर भी रुख कर सकता है।

वॉशिंगटन में ईस्ट पॉलिसी के एक एक्सपर्ट सामन हेंडरसन का मानना है कि क्राउन प्रिंस से डील करना अब अमेरिका के लिए आसान नहीं होने वाला। क्योंकि वो बेहद ताकतवर हैं। सऊदी अरब पर पिछले साल भी मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर आवाज उठी थी। कुछ एक्सपर्ट को आशंका है कि क्राउन प्रिंस अपने देश को एक ‘रफ स्टेट’ बना सकते हैं। मतलब अंतराष्ट्रीय कानूनों को तोड़कर वो दूसरे देशों के लिए खतरा बन सकते हैं।

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