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फिर से परमाणु युद्ध का संकट 

ईरान और अमेरिका के मध्य बढ़ रही रार ने अब एक बार फिर विश्व को परमाणु युद्ध की कगार पर लाने का काम कर दिया है। अपने ऊपर  यूरोपीय संघ और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से तिलमिला कर ईरान ने 2015 के परमाणु समझौते के तहत यूरेनिम उत्पादन की तय सीमा को तोड़ने का ऐलान कर दिया था। ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अरागची के द्वारा कहा गया कि अब भी चाहते है कि परमाणु समझौता बना रहे, लेकिन यूरोप के देश अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हट रहे हैं। 2018 में अमेरिका द्वारा एकतरफा फैसले लेते हुए यह परमाणु समझौता तोड़ दिया गया था। इसके बाद से अमेरिका ईरान पर कई कड़े प्रतिबंध लगा चुका है। ईरान द्वारा मई में ही यूरेनियम के उत्पादन की शुरूआत कर दी गई थी।

ईरान द्वारा यह घोषणा जब की गई, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनएल मेक्रो ने ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी से बात कर परमाणु समझौते के उल्लंघन पर चिंता जताई थी। राष्ट्रपति रूहानी ने तब कहा था कि यूरोप के देशों पर कुछ ऐसा किया जाना चाहिए कि परमाणु समझौता बचाया जा सकें।

समझौते के तहत निर्धारित की गई 3 ़67 प्रतिशत संवर्धन की सीमा 90 प्रतिशत के उस स्तर से बहुत नीचे है जो परमाणु हथियार बनाने के आवश्यक है। ईरान द्वारा गत् रविवार को कहा गया कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन स्तर को 3.67 प्रतिशत के स्तर से ऊपर ले जाएगा जो परमाणु समझौते का यह दूसरा उल्लंघन है। परमाणु हथियारों से लैस ईरानी साम्राज्य दुनिया के लिए और बड़ा खतरा साबित हो सकता है। ईरान के विदेश मंत्री जावेद सरीपफ द्वारा कहा गया है कि अगर यूरोपीय देश अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहे तो इस कदम को रोक जा सकता है।

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