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दुनिया में चमकेगा ‘तेजस’ का तेज

भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ दुनियाभर में अपना तेज दिखाने को बेताब है। खास बात यह है कि सैन्य हथियारों और उपकरणों का निर्यात करने वाले अमेरिका सहित कई देश इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। यहां तक कि भारत ने मलेशिया को 18 तेजस बेचने की पेशकश की है

 

एक समय था जब वर्ष 1965 की जंग में अचानक किए गए पाकिस्तानी एयरफोर्स के हमले में भारत के 35 फाइटर जेट धराशायी हो गए थे। यही नहीं लड़ाकू विमानों में जीपीएस, रडार नहीं लगे होने की वजह से स्क्वाड्रन लीडर विलियम ग्रीन भारत के बजाय पाकिस्तान में लैंड कर गए थे। तब भारत दूसरे देशों से फाइटर जेट खरीद रहा था। लेकिन अब भारत के स्वदेशी मॉडर्न फाइटर जेट ‘तेजस’ को अमेरिका जैसा ताकतवर देश खरीदना चाहता है। भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस दुनिया की नजरों में छा गया है।


स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ दुनिया भर के आसमान में अपना तेज दिखाने को बेताब है। खास बात यह है कि सैन्य हथियारों और उपकरणों का निर्यात करने वाले अमेरिका सहित कई देश इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। यहां तक कि भारत ने मलेशिया को 18 तेजस बेचने की पहले ही पेशकश की है। हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) एक इंजन वाले इस फाइटर जेट का निर्माण करती है। अमेरिका के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, इंडोनेशिया और फिलिपींस ने भी इसे खरीदने की बात कही है।


गौरतलब है कि भारत सरकार विदेशी रक्षा उपकरणों पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए प्रयासरत है। वहीं, अब लड़ाकू विमान से लेकर कई सैन्य हथियार भी बेचने की स्थिति में है। भारत ने मलेशिया को 18 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए ) ‘तेजस’ बेचने की पेशकश की है। रक्षा मंत्रालय ने हाल में बताया था कि अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, अमेरिका, इंडोनेशिया और फिलीपींस की भी इस सिंगल इंजन वाले जेट में रूचि है। सरकार ने पिछले साल हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड को स्थानीय रूप से उत्पादित 83 तेजस जेट्स के लिए 2023 के आसपास डिलीवरी के लिए अनुबंध दिया था।


तेजस की खासियत
भारत के हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ के करीब 50 फीसदी कलपुर्जे भारत में ही तैयार हुए हैं। इस फाइटर जेट में आधुनिक तकनीक से लैस इजरायल की इएल/एम-2052 रडार को लगाया गया है। यह लड़ाकू विमान एक साथ 10 टारगेट को ट्रैक करने और उस पर हमला करने में सक्षम है। यह विमान बेहद ही कम क्षेत्र वाले रनवे पर टेक ऑफ कर सकता है। इस फाइटर जेट का वजन 6500 किलोग्राम है। इसमें 6 प्रकार की मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। इसमें लेजर गाइडेड बम और कलस्टर हथियार भी लगाए जा सकते हैं।


तीन हजार किमी तक एक बार में उड़ान
तेजस में एक सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर भी दिया गया है, जो हमले से जेट को बचाने में मदद करता है। यह फाइटर जेट 3 हजार किलोमीटर तक एक बार में उड़ान भर सकता है। इस विमान का एडवांस्ड वर्जन ‘तेजस मार्क-2’ 56 हजार से अधिक फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है। भारतीय एयरफोर्स के बेड़े में हल्के लड़ाकू विमान (एलएसी) को शामिल करने की तैयारी वर्ष 1983 में ही शुरुआत हो गई थी। इसे रूसी फाइटर मिग-21 के बेहतर विकल्प के तौर पर माना गया। साल 2001 में पहली बार तेजस ने आसमान में उड़ान भरकर भारत का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया था। यह उपलब्धि अब और बड़ी हो गई, जब भारत इस विमान को दूसरे देशों को बेचने की स्थिति में है।


आखिर एयरफोर्स को क्यों पड़ी तेजस की जरूरत
पिछले पांच दशकों में 400 से ज्यादा मिग-21 विमानों के क्रैश होने की वजह से भारत सरकार इसे रिप्लेस करना चाह रही थी। इसी मिग-21 की जगह लेने में तेजस कामयाब हुआ है। इस विमान का वेट कम होने की वजह से यह समुद्री पोतों पर भी
आसानी से लैंड और टेक ऑफ कर सकता है। यही नहीं इसकी हथियार ले जाने की क्षमता मिग-21 से दोगुना है। स्पीड की बात करें तो राफेल से 300 किलोमीटर प्रति घंटा ज्यादा रफ्तार तेजस की है।

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