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बेल्ट एंड रोड परियोजना की काट है टीडीसी

चीन सरकार का बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट आधिकारिक तौर पर 2017 में शुरू किया गया था। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत रेल, सड़क एवं समुद्री मार्ग से लगभग सत्तर देशों को चीन जोड़ने का प्रयास कर रहा है। भारत इस परियोजना को अपने खिलाफ चीन की रणनीति का हिस्सा मान शामिल नहीं हुआ है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन की इस कूटनीति के जवाब में ट्राईलेटरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन फंड की शुरुआत कर डाली है। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रहा है

चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव की काट के लिए भारत ने भी बड़ी तैयारी कर ली है। विदेश मंत्रालय ने ट्राई लेटरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीडीसी) फंड लॉन्च किया है। इसके जरिए हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने की तैयारी भारत कर रहा है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में निजी सेक्टर की कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा। इन कंपनियों के साथ मिलकर सरकार बड़ा निवेश करेगी जिससे भारत की जीडीपी दर को काफी मुनाफा मिलेगा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी इस फंड के जरिए निवेश किया जाएगा। बता दें कि चीन ने बीआरआई प्रोजेक्ट के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान के रास्ते यूरोप तक जाने का प्लान बनाया है। इसी के तहत वह चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को तैयार कर रहा है, जिस पर भारत ने ऐतराज जताया था। चीन की नीति को न अपनाते हुए भारत ने खुद की नीति लागू की है। जिसका लाभ भविष्य में उठाया जाएगा।

चीन का ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिवश्’ मॉडल
चीन 14 मई 2017 से होने शुरू होने वाले ‘बेल्ट ओर रोड फोरम’ को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा लाया गया था। इस मॉडल ‘वन बेल्ट वन रोड’ का उद्देश्य चीन के व्यापार को बढ़ावा देने तथा नए बाजारों में इसके प्रवेश के मार्ग खोलने के लिए किया गया। इस मॉडल के माध्यम से चीन के व्यापार में बढ़ोतरी और नए बाजारों में इसके प्रवेश को बढ़ाने के लिए किया गया।

भारत का ट्राई लेटरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन
22 अप्रैल, 2022 को पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन की मुलाकात के बाद ब्रिटेन ने भारत के साथ ग्लोबल इनोवेशन पार्टनरशिप (जीआईपी) लॉन्च किया गया है जो कि टीडीसी फंड के लिए नींव का काम करेगा। टीडीसी फंड त्रिपक्षीय विकास के लिए जापान, जर्मनी, फ्रांस और यूरोपीय संघ जैसे अन्य देश जो भारत के साथ विकास और इनोवेशन के क्षेत्र में साझेदारी करना चाहते हैं उसके लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह कॉरिडोर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से गुजरता है, जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है। ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक यूके के साथ मिलकर 22 अप्रैल को भारत ने इंडिया ग्लोबल इनोवेशन पार्टनरशिप लॉन्च किया है। यह भी सरकार के टीडीसी फंड का ही हिस्सा माना जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी और बोरिस जॉनसन की मौजूदगी में इस प्रोजेक्ट को लॉन्च किया गया है। कहा जा रहा है कि टीडीसी फंड के जरिए भारत की ओर से जापान, जर्मनी, फ्रांस और यूरोपियन यूनियन के साथ मिलकर काम किया जाएगा। भारत की ओर से ग्लोबल इनोवेशन पार्टनरशिप में जो निवेश किया जाएगा, वह टीडीसी फंड के जरिए होगा।

इतना ही नहीं जीआईपी के जरिए अफ्रीका, एशिया और इंडो-पैसिफिक में निवेश किया जाएगा। खासतौर पर उन स्थानों पर निवेश को बढ़ाया जाएगा, जहां भारतीय कंपनियों पहले से निवेश करती रही हैं। गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी अकसर यह बात दोहराते रहे हैं कि भारतीय स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश करना चाहिए। माना जा रहा है कि जीआईपी के जरिए इस लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकेगा। विदेश मंत्रालय लंबे समय से ऐसे प्रोजेक्ट पर विचार कर रहा था, जिसके तहत भारतीय कंपनियों को विदेशों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। ग्लोबल इनोवेशन पार्टनरशिप के जरिए भारत के 60 स्थानों पर निवेश को मदद मिलेगी, जो तीसरी दुनिया के देशों में किए गए हैं।

सूत्रों के हवाले से कहा है कि जीआईपी अफ्रीका, एशिया और इंडो-पैसिफिक में स्थित विकासशील देशों में भारतीय इंटरप्राइज की ओर से विकसित किए गए इनोवेशन को बढ़ाने की कोशिश करेगा। इस मॉडल के अंतर्गत सही बाजार की जानकारी, सही भागीदारों की जानकारी और लचीली फंडिंग की पहुंच होना महत्वपूर्ण है। जीआईपी भारतीय इंटरप्राइज को फंड, तकनीकी सहायता, हैंड-होल्डिंग और विकास पूंजी निवेश के रूप में ये सहायता देकर ये सारी बाधाएं दूर करेगा। भारत जीआईपी बाजार संचालित मॉडल को अपनाएगा। जिसमें ब्रिटेन के साथ समान भागीदारी होगी। दोनों पक्षों ने जीआईपी के विभिन्न घटकों को लागू करने के लिए 14 सालों में 75 मिलियन पाउंड को-फाइनैंस करने पर सहमति व्यक्त की है। जीआईपी के तहत लॉन्ग -टर्म पूंजी निवेश के लिए एक नया जीआईपी फंड स्थापित किया जाएगा। जिसमें भारतीय इनोवेशन का समर्थन करने वाले बाजारों को लगभग 100 मिलियन पाउंड का लाभ दिया जाएगा।

चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव में शामिल होने को लेकर अब कई देशों में हिचक देखी जा रही है। पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों के चीन के कर्ज तले दबने की वजह से अन्य देश ड्रैगन के निवेश से बच रहे हैं। इसके अलावा आर्थिक गतिविधियों के जरिए चीन के साम्राज्यवादी विस्तार को लेकर भी तमाम देश चिंतित हैं। पीएम मोदी बार-बार भारतीय स्टार्टअप के अंतरराष्ट्रीयकरण का समर्थन करने और भारतीय इनोवेशन को वैश्विक बनाने की बात करते रहे हैं। जिसे जीआईपी मॉडल द्वारा पूरा किया जाएगा और भारत के इनोवेशन फुट प्रिंट का विस्तार भी किया जाएगा।

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