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अफगान सेना की कड़ी कार्रवाई के चलते घुटने टेकने लगा है तालिबान 

कुछ सालों से चरमपंथी संगठन तालिबान अफगानिस्तान में एक बहुत  बड़ा खतरा बनकर उभरता जा रहा है। तालिबान  से न सिर्फ अफगानिस्तान बल्कि पकिस्तान को भी खतरा है जहां उत्तर -पूर्व के इलाकों में तालिबान का दबदबा है। तालिबान लगातार अफगानिस्तान पर कहर बरपा रहा है, लेकिन इसके बावजूद वहां अफगानिस्तान से अमेरिका के साथ-साथ नाटो देशों की सेनाओं की वापसी का सिलसिला जारी है। अफगान से ज्यादातर विदेशी सेनाएं वापस जा चुकी हैं और जो बचे हैं उनके इस महीने के आखिर तक वापस हो जाने की संभावना है। तालिबान  ज्यादा हावी होने लगा है। उसने देश के  100 से ज्यादा जिलों पर अपना कब्जा कर लिया है। तालिबान के आतंक का आलम यह है कि  करीब 1500 से सैनिक अपना देश छोड़कर पडोसी देश ताजिकिस्तान की शरण में चले गए हैं, लेकिन अब अफगान सेना के कड़े रुख को देखते हुए तालिबान अब घुटनों पर आता दिख रहा है।

 

 

तालिबान 

तालिबान के शीर्ष नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा

 

दरअसल , कल तालिबान के शीर्ष नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा कहा कि वह अफगानिस्तान में संघर्षविराम के लिए एक राजनीतिक समाधान का दृढ़ता से समर्थन करते हैं। उधर, अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान के लड़ाकों ने देश के अधिकतर हिस्सों पर कब्जा कर लिया है। ईरान, पाकिस्तान और तजाकिस्तान से लगते कुछ इलाकों की सीमा चौकियों पर भी तालिबान लड़ाके कब्जा जमा चुके हैं।

 

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हिबतुल्लाह अखुंदजादा का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब आज से ही अफगान सरकार के प्रतिनिधि और तालिबान का राजनीतिक नेतृत्व दोहा में नए दौर की बातचीत होनी है। इस बयान से उम्मीद जगी है कि लंबे समय से रुकी शांति वार्ता में कुछ सकारात्मक परिणाम आ सकता है। इससे पहले भी तालिबान और अफगानिस्तान सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि, देश में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर दोनों पक्षों में अभी तक कोई समझौता नहीं हो सका है।

 

तालिबान 

अफगानी लड़ाकू विमान तालिबाान के ठिकानों पर हवाई हमले

अफगान सेना की कार्रवाई से तालिबान घबराया!

 

तालिबान के कब्जे में आए इलाकों पर फिर से कब्जा के लिए अफगान सेना के कार्रवाई तेज कर दी है। अफगानी लड़ाकू विमान तालिबाान के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जमीनी स्तर पर अफगान सेना तालिबान के सामने कड़ी चुनौती पेश कर रही है। काबुल, कंधार सहित कई शहरों में अफगान सेना ने तालिबान को पीछे ढकेल दिया है।

‘इस्लामी व्यवस्था की स्थापना तालिबान का लक्ष्य’

 

तालिबान के शीर्ष नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने ईद-उल-अजहा के एक हफ्ते पहले जारी अपने संदेश में कहा कि सैन्य लाभ और कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जे के बावजूद, इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान देश में एक राजनीतिक समझौते के पक्ष में है। इस्लामी व्यवस्था की स्थापना के लिए हर अवसर शांति और सुरक्षा का उपयोग इस्लामिक अमीरात के द्वारा उपयोग की जाएगी।

 

तालिबान के हिंसा के कारण बंद थी बातचीत

 

कतर की राजधानी दोहा में तालिबान का राजनीतिक मुख्यालय है। अफगानिस्तान सरकार और अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तालिबान इसी जगह बैठकें करता है। पिछले एक साल में तालिबान और अफगान सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। तालिबान की हिंसक कार्रवाईयों के कारण पिछले कुछ महीने से दोनों पक्षों के बीच बातचीत बंद भी थी।

 

दूसरे देशों पर तालिबान सरगना का हमला

 

अखुंदजादा ने कहा कि तालिबान युद्ध को समाप्त करने के लिए समाधान निकालने को प्रतिबद्ध है, लेकिन दूसरा पक्ष केवल समय बर्बाद करना चाहता है। उन्होंने कहा कि हमारा संदेश यह है कि विदेशियों पर निर्भर रहने के बजाय, आइए हम अपने मुद्दों को आपस में सुलझाएं और अपनी मातृभूमि को मौजूदा संकट से बचाएं। तालिबान के इस शीर्ष नेता के बयान में ईद की छुट्टियों के लिए औपचारिक संघर्ष विराम का कोई मतलब नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि त्योहार के दौरान भी तालिबान के हमले जारी रहेंगे।

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