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ईरान हिजाब विवाद : सिपाही को घायल करने पर मिली फांसी

ईरान में पिछले दो महीनों से जारी हिजाब विरोधी प्रदर्शन को रोकने के लिए सरकार कई तरह के हथकंडे अपना रही है। फिर चाहे वो दूषित भोजन खिलाना हो या मौत का फरमान देना।हालत यह है कि अब प्रदर्शन करने वाले लोगों को मौत सजा दी जा रही है। इसी श्रृंखला में 9 दिसंबर मोहसिन शेखरी को फांसी दी गई है। ईरानी सरकार के मुताबिक सरकार के खिलाफ काम करने का दोषी पाए जाने पर मोहसिन शेकारी नाम के एक युवक को फांसी की सजा दी गई है। इस व्यक्ति पर तेहरान में दंगे और एक सिपाही को घायल करने का आरोप लगाया गया था। गौरतलब है कि 20 नवंबर को ईरानी कोर्ट ने मोहसिन शेकारी पर लगे उन सभी आरोपों को सही माना था जो सरकार द्वारा लगाए गए थे । उस दौरान कोर्ट ने शेकारी को आतंक फैलाने, मारने की इच्छा रखने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का आरोपी ठहराया था। इन आरोपों के खिलाफ शेकारी द्वारा कोर्ट में याचिका भी डाली गई थी। लेकिन उसे 20 नवंबर को ईरानी न्यायलय ने खारिज कर दिया था।

कोर्ट द्वारा दी गई मोहिसन को मौत की सजा पर मानवाधिकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के एक बयान मुताबिक यह कदम केवल प्रदर्शनों को दबाने के लिए उठाया गया है। जिससे लोगों में भय पैदा हो सके। एमनेस्टी द्वारा रिवोल्यूशनरी कोर्ट पर सिक्यारिटी फोर्सेस के दबाव में आकर काम करने का आरोप लगाया है। वहीं बीबीसी की एक रिपोर्ट मुताबिक भी केवल प्रदर्शन करने की वजह से इस साल करीब 10 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है। ईरानी न्यायालय ने इन्हे अल्लाह के खिलाफ जाने और भ्रष्टाचार का दोषी पाया था । गौरतलब है कि इस साल दुनिया भर के देशों से ज्यादा ईरान में मौत की सजा दी गई है। इस सूची में तीन नबालिक युवकों को भी शामिल किया गया है। जिन पर आरोप लगाया गया था कि इन नबालिक युवकों ने चाकू, पत्थरों और बॉक्सिंग ग्लव्स से ईरान की बासिज पैरामिलिट्री फोर्स के सदस्य को मारा है। इसके अलावा नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स के निदेशक महमूद आमिरी मोग़ाद्दम ने ट्वीट कर कहा है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान को अपने उठाए गए कदमों का तुरंत खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा तब तक वो प्रदर्शनकारियों को ऐसे ही फांसी पर चढ़ाता रहेगा।

ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों में भाग में लेने वाले छात्रों को दूषित भोजन खिलाया गया था। जिसे खाने से 1200 छात्रों की तबीयत खराब हो गई थी। खराजमी और अर्क यूनिवर्सिटी के अलावा चार अन्य संस्थानों के छात्रों ने भी यूनिवर्सिटी में खाना खाने के बाद इसी तरह की शिकायतें की थी। जिसके बाद कई छात्रों ने कैफेटेरिया के खाने का बहिष्कार किया है।

 

ईरान हिजाब विवाद : सिपाही को घायल करने पर मिली फांसी

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