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श्रीलंका में आर्थिक संकट के बाद बिजली संकट

श्रीलंका अपने इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। श्रीलंका के ऊपर इतना विदेशी कर्ज हो गया है कि वो ‘दिवालिया’ होने की कगार पर आ गया है। इस आर्थिक संकट की वजह से ईंधन समेत खाने पीने के सामान के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं।अब श्रीलंका ने बिजली बचाने के लिए सड़कों की बत्तियां बंद करने का फैसला लिया गया है। यही नहीं 31 मार्च को देश के मुख्य शेयर बाजार में ट्रेडिंग भी रोक दी गई।

 

दरअसल, 2.2 करोड़ की जनसख्यां वाले श्रीलंका में महगाई बड़ी मुसीबत बन चुकी है और बिजली कटौती से जनता का जीना दूभर हो गया है। श्रीलंका के पास ईंधन के आयात के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा नहीं है। इस मामले पर बिजली मंत्री पवित्रा वन्नियाराची का कहना है कि, ‘हमने पहले ही अधिकारियों को देश भर में सड़कों की बत्तियां बंद कर देश के लिए बिजली बचाने में मदद करने का निर्देश दे दिया है।’

श्रीलंका में बढ़ती कीमतों से परेशान जनता का दर्द बिजली कटौती ने और बढ़ा दिया है। श्रीलंका के सांख्यिकी विभाग ने 31 मार्च को कहा है कि, खुदरा मुद्रास्फीति मार्च में एक वर्ष पहले की समान अवधि की तुलना में 18.7 फीसदी पर पहुंच गई है। इस साल के मार्च में खाद्य मुद्रास्फीति 30.2 फीसदी तक पहुंच गई है जो श्रीलंका के लिए आंशिक रूप से मुद्रा अवमूल्यन और पिछले साल रासायनिक उर्वरकों पर प्रतिबंध से ऐसा हुआ है जिसे बाद में बदल दिया गया था।

गौरतलब है कि, इस आर्थिक संकट पर फर्स्ट कैपिटल रिसर्च के शोध प्रमुख दिमंथा मैथ्यू का कहना है कि,श्रीलंका एक दशक से अधिक समय में मुद्रास्फीति इतना खराब स्तर अनुभव कर रहा है। वन्नियाराची ने कहा है कि,भारत से 50 करोड़ डॉलर क्रेडिट लाइनकी मदद के तहत डीजल शिपमेंट 2 अप्रैल तक आने की उम्मीद है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, इससे हालात सुधरने की उम्मीद नहीं है। इसके आने के बाद हम लोड शेडिंग के घंटों को कम करने में सक्षम होंगे, लेकिन जब तक बारिश नहीं होती है, शायद मई तक बिजली कटौती जारी रखनी होगी। हम और कुछ नहीं कर सकते हैं। पनबिजली परियोजनाओं को चलाने वाले जलाश्यों में जल स्तर रिकॉर्ड स्तर पर गिर गया है, जबकि गर्म शुष्क मौसम के दौरान मांग रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाती है।

शेयर बाजार में भी गिरावट

 

एक रिपोर्ट के मुताबिक,एक्सचेंज ने अपने एक बयान में कहा कि, कोलंबो स्टॉक एक्सचेंज ने ब्रोकरों के अनुरोध पर इस सप्ताह के बाकी दिनों में बिजली कटौती के कारण दैनिक कारोबार को सामान्य साढ़े चार घंटे से घटाकर दो घंटे कर दिया है लेकिन 31 मार्च को बाजार खुलने के बाद शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सीएसई ने 30 मिनट के लिए ट्रेडिंग भी रोक दी। यह दो दिन में ऐसा तीसरी बार हुआ है।

आर्थिक नुकसान की वजह

 

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर काफी हद तक निर्भर है। कोरोना महामारी की वजह से पर्यटन बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। श्रीलंका की जीडीपी में टूरिज्म और उससे जुड़े सेक्टरों की हिस्सेदारी 10 फीसदी के आस-पास है। कोरोना के चलते पर्यटकों के न आने से श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार कम हुआ है। वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिज्म काउंसिल की रिपोर्ट बताती है कि महामारी के चलते श्रीलंका में लगभग 2 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं।

श्रीलंका की आर्थिक समस्या पर विशेषज्ञों का मानना है कि इस आर्थिक हालात के लिए विदेशी कर्ज खासकर चीन से लिया गया कर्ज भी जिम्मेदार है। एक रिपोर्ट के मुताबिक,चीन का श्रीलंका पर लगभग 5 अरब डॉलर से अधिक कर्ज है। पिछले वर्ष श्रीलंका ने वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए चीन से और 1 अरब डॉलर का कर्ज लिया था। अगले 12 महीनों में देश को घरेलू और विदेशी लोन के भुगतान के लिए करीब 7 .3 अरब डॉलर की जरूरत है। नवंबर तक देश में विदेशी मुद्रा का भंडार महज 1 .6 अरब डॉलर था।

सरकार को घरेलू लोन और विदेशी बॉन्ड्स का भुगतान करने के लिए पैसा छापना पड़ रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विशेषज्ञ श्रीलंका की इस बदहाली के लिए केवल चीन से लिए गए कर्ज की बात से इंकार करते हैं। इन विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी इस दशा के लिए श्रीलंका की गलत आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं। श्रीलंका के कुल कर्जे में से चीन का हिस्सा मात्र 10 प्रतिशत है। इससे कहीं ज्यादा कर्ज श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से उठा रखा है। ऑस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ‘लोवी इंस्टीट्यूट’ के अनुसार इस समय श्रीलंका के कुल कर्ज का 47 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय बाजार से उठाया गया ऋण है। 22 प्रतिशत कर्ज विश्व बैंक समेत कई अंतरराष्ट्रीय बैंकों का है। 10 प्रतिशत कर्ज जापान का है।

गौरतलब है कि,श्रीलंका ने इस कटौती के लिए गलत समय का चुनाव और ऐतिहासिक रूप से कमजोर सरकारी वित्त प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।देश में विदेशी मुद्रा की भारी कमी हो गई जिसकी वजह से सरकार आम जरूरत के सामान के आयात की कीमत नहीं चुका पा रही है। फरवरी तक श्रीलंका के पास 2.31 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा था, जिसके बाद सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, भारत और चीन समेत अन्य देशों से मदद लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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