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दोनों देशों के लिए अहम है शेख हसीना का भारत दौरा

बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 3 दिनों के लिए भारत दौरे पर हैं। इस दौरान वो राष्ट्रपति दौपति मुर्मू से मुलाकात करेंगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगी। लेकिन भारत आने से पहले शेख हसीना ने भारत को अपना भरोसेमंद साथी तो बताया ही है साथ ही यह भी कहा है,कि दोनों देशों के बीच तीस्ता जल बंटवारे पर जो विवाद जारी है उसे बातचीत से ख़त्म करना चाहिए।

 

दरअसल, तीस्ता जल बंटवारे पर बांग्‍लादेश का कहना है कि ‘हम नीचे की तरफ हैं और पानी भारत की तरफ से आता है। ऐसे में भारत को थोड़ी ज्यादा दया दिखानी चाहिए। दोनों देशों को इसका फायदा मिले, कुछ ऐसा हो। कभी-कभी हमारे लोगों को इसकी वजह से बहुत ज्यादा तकलीफ सहनी पड़ती है, सबसे ज्यादा समस्या तो तीस्ता नदी की वजह से होता है। इसके साथ उन्होंने कहा कि, भारतीय प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी इस मसले को सुलझाना चाहते हैं लेकिन समस्या भारत के साथ है। उनका कहना था कि न सिर्फ गंगा बल्कि 54 ऐसी नदियां हैं जिनकी वजह से दोनों देशों के बीच विवाद है और उन्हें जल्‍द से जल्‍द सुलझाया जाना चाहिए। यह नदी 414 किलोमीटर लंबी है और यह पूर्वी हिमालय के पाउहुनरी पर्वत से निकलती है। इतना ही नहीं यह नदी भारत में सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। भारत में यह 4,840 स्‍क्‍वायर मीटर का इलाका कवर करती है। यह नदी कलिमपोंग और दार्जिलिंग से होती हुई मनगन, गंगटोक और पाक्योंग जिले,जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, रंग्‍पो, मेखलीगंज से होती हुई बांग्‍लादेश के फुलचहारी उप जिला में ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। भारत में यह नदी 305 किलोमीटर का रास्ता तय कर के बांग्लादेश में जाती है। तीस्ता नदी सिक्किम की सबसे लंबी नदी है और गंगा के बाद पश्चिम बंगाल की दूसरी सबसे बड़ी नदी है।

भारत और बांग्‍लादेश के बीच पिछले 35 वर्षो से इस नदी को लेकर विवाद बना हुआ है। कई द्विपक्षीय समझौतों और कई दौर की वार्ता के बाद भी इनका कोई नतीजा नहीं निकल सका है। वर्ष1983 से ही कई बार वार्ता हो चुकी हैं। वर्ष 1983 में एक अस्‍थायी हल निकाला गया था। इसके तहत बांग्‍लादेश को नदी का 36 प्रतिशत नदी का पानी मिलेगा, तो भारत को 39 प्रतिशत जबकि बाकी बचा हुआ पानी किसी के हिस्से में नहीं गया।वर्ष 1996 में बांग्‍लादेश और भारत ने गंगा जल संधि की थी। इस संधि का मकसद पानी की वजह से दोनों देशो में होने वाले विवाद को रोकना था। उस समय भारत के प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और शेख हसीना के बीच इस संधि पर साइन हुए थे। दोनों देशों के बीच इस समझौते की अवधि 30 वर्ष की है। फरक्का बैराज जो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में यह समझौता उससे खासतौर पर जुड़ा था। इस बांध में जनवरी से मई तक पानी का बहाव बहुत कम रहता है।

गौरतलब है कि,इस समझौते का मकसद इस बांध में पानी का बहाव सुनिश्चित करना था। जो संधि दोनों देशों के बीच हुई उसके तहत अगर पानी 75,000 क्यूसेक बढ़ता है तो भारत को 40,000 क्यूसेक पानी लेने का अधिकार है। लेकिन अगर बांध में 70,000 क्यूसेक से कम पानी है तो फिर बहाव को दोनों देशों के बीच बांटा जाएगा। वहीं, अगर बहाव 70,000 से 75,000 क्यूसेक तक रहता है तो फिर बांग्‍लादेश को 35,000 क्यूसेक पानी दिया जाएगा। लेकिन बांग्‍लादेश में कई लोग शुरुआत से ही इस समझौते के खिलाफ हैं।

विशेषज्ञों का तो यह कहना है कि,यह समझौता पूरी तरह से भारत के पक्ष में है। वर्ष 2017 में शेख हसीना जब भारत दौरे पर आईं थी तब उन्‍होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस समझौते का जिक्र करते हुए कहा था कि,जो भी समझौते भारत के साथ हुए हैं, वो सभी उनके देश के पक्ष में हैं।गंगा और ब्रह्मपुत्र ये 2 बड़ी नदियां बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती हैं। इन दोनों नदियों को भारत की ही तरह बांग्‍लादेश में लाइफ लाइन कहा जाता है। इन नदियों से जो छोटी-छोटी नदियां निकलती हैं, वो सभी इंडस्‍ट्रीज के लिए जरूरी मानी जाती हैं। बांग्‍लादेश में करीब 400 नदियां हैं। जिस पर बांग्लादेश की ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था निर्भर है। क्योंकि भारत की तरह ही बांग्‍लादेश भी कृषि उत्पादन पर बहुत हद तक निर्भर है। वहीं बांग्लादेश की 54 नदियां ऐसी हैं जो आपने पड़ोसी देश भारत के साथ हैं। इसमें से सिर्फ 1 नदी ही ऐसी है जिसकी धारा ऊपर की तरफ बढ़ती है जबकि 53 नदियां दक्षिण दिशा में भारत से बहती हुई आती हैं। गंगा को बांग्‍लादेश के लिए पानी का एक अहम स्‍त्रोत माना जाता है।

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