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स्वेज नहर में फंसा समुद्री जहाज, तेल की कीमतों में उछाल

इजिप्‍ट के रास्‍ते भूमध्‍य सागर और लाल सागर को जोड़ने वाली स्‍वेज नहर समुद्री जहाज के लिए एक महत्‍वपूर्ण रास्‍ता है। यह दुनिया के सबसे व्‍यस्‍त जलमार्गों में से एक है। मात्रा के मामले में दुनिया के कुल कारोबार में 12 प्रतिशत हिस्‍सा इसी नहर का है। यह नहर यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा रास्‍ता प्रदान करती है। 1869 में निर्मित इस नहर पर इजिप्‍ट का कब्‍जा है और मानव-निर्मित इस नहर पर ही इजिप्‍ट की अर्थव्‍यवस्‍था टिकी हुई है। 2020 में इजिप्‍ट ने स्‍वेज नहर पर टोल से 5.61 अरब डॉलर का शुल्‍क प्राप्‍त किया था।

स्वेज नहर दुनिया का सबसे बिजी शिपिंग रूट है। इस रूट पर एक विशाल शिप के फंसने की वजह से दूसरी जहाजों का आना जाना बंद हो गया है। रास्ता ब्लॉक होने की वजह से पिछले 4 दिनों से जहाजों का आना जाना बंद है। शिप ब्रनहार्ड सेक्लूट शिपमैंजमेंट के टेक्निकल मैनेजमेंट टीम ने कहा कि शिप पर मौजूद सभी लोग भारतीय हैं। कंपनी ने कहा, “शिप पर मौजूद सभी 25 लोग सुरक्षित हैं। ये सभी भारतीय हैं। क्रू मेंबर शिप को पानी में तैराने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।” जिस शिप की वजह से स्वेज नहर में ट्रैफिक जाम हुआ है वह 1300 फुट लंबा है। शिप चौड़ाई में स्वेज नहर के एक छोर से दूसरे छोर तक फंस गया है। जिसकी वजह से आने जाने का रास्ता ब्लॉक हो गया है।

स्वेज नहर में एमवी एवर गिवन (MV EVER GIVEN)है। दुनिया के सबसे बड़े जहाजों में शामिल है। इस जहाज की लंबाई करीब 400 मीटर है। तेज हवाओं के कारण जहाज तिरछा होकर फंसा है। पनामा का एक कंटेनर शिप चीन से माल लेकर नीदरलैंड के रोटरडम जा रहा था। 2018 में निर्मित यह जहाज, जिसकी लंबाई 400 मीटर और चौड़ाई 59 मीटर है, खराब मौसम की वजह से नहर में फंस गया। इस जहाज पर 2 लाख टन माल लदा है और इसके फंसने से दोनों तरह का यातायात पूरी तरह से रुक गया है। इस जहाज का परिचालन करने वाली ताईवान की ट्रांसपोर्ट कंपनी एवरग्रीन मरीन ने कहा है कि अचानक तेज हवा की वजह से जहाज टेड़ा होकर नहर में फंस गया।

स्वेज नहर में यातायात ठप होने से क्रूड ऑयल में उछाल आया है। इसमें करीब तीन फीसदी की तेजी आई है। कच्‍चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। बेस मेटल्स में भी शानदार खरीदारी देखने को मिल रही है। निकेल, एल्युमिनियम और लेड एक-एक फीसदी चढ़े है। जिंक और कॉपर में भी बढ़त पर कारोबार हो रहा है।

सोने-चांदी में निचले स्तरों से खरीदारी लौटी है। सोयाबीन नई ऊंचाई पर दिख रहा है। लेकिन दूसरे सभी खाने के तेलों में मुनाफावसूली है। सोया ऑयल करीब एक परसेंट फिसला है। एमसीएक्स सीपीओ में डेढ़ परसेंट की गिरावट है। चना और मसालों में भी आज कमजोरी है। धनिया और हल्दी करीब दो-दो परसेंट टूटे हैं। जीरा में भी आधे परसेंट की गिरावट है। नई आवक बढ़ने से चना में भी दबाव है।

पहले एशिया से जहाज चक्कर काटकर यूरोप पहुंचते थे। नहर का निर्माण 1859 में शुरू हुआ और शुरुआत में मजदूर बेलचों और कुदालियों से काम करते थे। इसके बाद यूरोप से भाप से चलने वाली मशीनें लाई गईं। मजदूरों में हैजा फैलने की वजह से काम रुकता रहा और नहर को पूरा करने में 10 साल लग गए। 1966 में नहर फिर बंद हो गई जब इजरायल ने सिनाई प्रायद्वीप पर कब्जा किया। 1975 में मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादत ने स्वेज कनाल को दोबारा खोला और इजरायल से शांति बहाल की।

2019 के आकंड़ों पर नजर डाले तो प्रति दिन इस नहर से करीब 50 जहाज गुजरते हैं। 1869 में इस रास्ते से एक दिन में सिर्फ 3 जहाज गुजरते थे। कुछ अनुमानों के मुताबिक दुनिया का 12 फीसदी ट्रेड इस रास्ते से होता है जबकि 30 फीसदी कंटेनर शिप इसी रास्ते से गुजरते है। स्वेज नहर मानव निर्मित वाटर-वे है।

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