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सऊदी यात्रा के संदेश

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रियाद से उन्होंने संदेश दिया कि भारत दुनिया के तमाम मुल्कों के लिए बेहतरीन विकल्।है। यहां निवेश करना हर देश के लिए फायदेमंद होगा। दुनिया के लिए भारत एक अच्छा बाजार है। विभिन्न देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग उन देशों की तरक्की में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। अर्थात भारत हर दृष्टि से दुनिया के लिए अहम है। मोदी ने सऊदी को भारत का मूल्यवान दोस्त रहा तो इसके भी खास मायने हैं। विकास, निवेश और व्यापारिक रिश्तों के साथ ही वे यह भी चाहते हैं कि कूटनीतिक एवं सामरिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के दोस्ताना संबंध रहेंगे। रियाद पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री ने थर्ड फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव मंच के पूर्ण सत्र में भाग लिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि एक अहम दोस्त के साथ संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से यह अहम यात्रा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने कई तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

पिछले तीन साल में मोदी दूसरी बार सऊदी अरब गए हैं। साल 2016 में मोदी की पहली सऊदी यात्रा के दौरान सऊदी अरब के बादशाह सलमान ने उन्हें सऊदी अरब का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया था। सऊदी की दूसरी यात्रा में मोदी को ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनीशिएटिव समिट’ में शामिल होने का मौका मिला। इसे ‘दावोस इन द डेजर्ट’ यानी रेगिस्तान में डावोस कहा जा रहा है । भारत और सऊदी अरब ने अपने संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए तेल एवं गैस, रक्षा एवं नागर विमानन समेत विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साम्राज्य के शीर्ष नेतृत्व से गहन चर्चा की जिसके दौरान महत्वपूर्ण मुद्दों पर समन्वय के लिए रणनीतिक साझेदारी परिषद स्थापित की गई। पाकिस्तान का प्रमुख सहयोगी माने जाने वाले सऊदी अरब क्षेत्र को आतंकवाद मुक्त बनाने के अभियान में भारत उसका पक्ष ले रहा है और इस चुनौती से निपटने के लिए पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत प्रधानमंत्री मोदी ने युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान के साथ कई विषयों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मुद्दों संबंधी निर्णयों पर समन्वय के लिए भारत-सऊदी अरब रणनीति साझेदारी परिषद गठित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने इस समझौते को अपने हस्ताक्षरों के साथ अमलीजामा पहना दिया। सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अगुआई में ये समिट कराया। मोहम्मद बिन सलमान इसी साल फरवरी में भारत आए थे। भारत ने हाल ही में कश्मीर को संविधान के धारा 370 के तहत मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को खत्म कर दिया है। पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है, ऐसे में मोदी की सऊदी अरब की यात्रा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी प्रोजेक्ट और इंडियन स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व (एसपीआर) कार्यक्रम सहित प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान प्रमुख ऊर्जा सौदे करने की योजना हैं।

वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी प्रोजेक्ट 44 अरब डालर की परियोजना है। महाराष्ट्र में बनने जा रहे इस प्रोजेक्ट में सऊदी कंपनी अरामको की अहम हिस्सेदारी होगी। भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापारिक संबंध बहुत घनिष्ठ हैं । भारत का 17 प्रतिशत तेल और 32 प्रतिशत एलपीजी वहां आयात होता है। दोनों देशों के बीच तकरीबन 27.5 अरब डालर का व्यापार है। इसमें अकेले 22 अरब डालर के पेट्रोलियम पदार्थ भारत खरीदता है, जबकि भारत महज 5.5 अरब डालर का निर्यात करता है । तो भारत के लिए ये व्यापारिक असंतुललन चिंताजनक है। दूसरी ओर सऊदी अरब भी भारत में 100 अरब डालर का निवेश करना चाहता है। भारत रणनीतिक तौर पर तेल का रिजर्व भी बना रहा है। दक्षिण भारत में इस तरह के तेल रिजर्व बन चुके हैं। भारत तीसरा रिजर्व भी बनाना चाहता है कि आपात स्थिति में या अचानक कीमतों में उछाल के समय वो इसका इस्तेमाल कर सके। इस परियोजना में भी सऊदी अरब और यूएई काफी मददगार हो सकते हैं। हालांकि भारत की नीति है कि लगभग तीन महीने तक का तेल रिजर्व बनाया जाए। यानी इतने समय के लिए अगर तेल आयात न भी तो भी काम चल सके। लेकिन जो तत्काल मुद्दे हैं उसमें भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का मामला अहम है। जापान और दक्षिण कोरिया से उम्मीद है क्योंकि उनके साथ भारत के अच्छे संबंध हैं और यहां भारी निवेश की उनकी योजनाएं भी हैं। इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा तो भारत आ भी चुका है। दक्षिण कोरिया और जापान की जितनी भी बड़ी कंपनियां हैं, उनकी सबसिडियरी कंपनियों का परिचालन भारत में हो रहा है। भारत में दक्षिण और उत्तर भारत के बीच एक व्यापारिक कारिडोर बनने वाला है और जब ये तैयार हो जाएगा अन्य विदेशी कंपनियां भी यहां आएंगी, जहां स्मार्ट सिटी बनेगी, औद्योगिक टाउन बनेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने अगले कुछ वर्षों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए 1.5 खरब डालर खर्च करने की योजना बनाई है। मोदी ने सऊदी की तेल कंपनी आरामको का उदाहरण देते हुए कहा कि आरामको महाराष्ट्र के रिफायनरी प्रोजेक्ट में निवेश कर रही है जो कि एशिया की सबसे बड़ी रिफायनरी कंपनी है और छह करोड़ टन तेल का उत्पादन करती है। भारत और सऊदी अरब का व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ये संबंध केवल खरीदार और विक्रेता वाला नहीं है। हालांकि ये भी सच है कि भारत और सऊदी अरब के व्यापारिक रिश्तों में ऊर्जा क्षेत्र ही सबसे महत्वपूर्ण है। इराका के बाद सऊदी अरब भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है। सऊदी अरब अब भारत का चैथा सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर बन गया है। दोनों देशों के बीच साल 2017-18 में 27.48 अरब डालर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। सऊदी अरब भारत में 100 अरब डालर का निवेश करने जा रहा है। ये निवेश ऊर्जा, रिफायनरी, पेट्रोकेमिकल्स, कृषि, और खनन के क्षेत्र में होगा। भारत और सऊदी अरब का रिश्ता धीरे-धीरे सामरिक होता जा रहा है जैसा कि मोदी ने रियाद में अपने भाषण में खुद इसका जिक्र किया था। मोदी की सऊदी यात्रा के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। पहला समझौता इंडियन स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड और सऊदी आरामको के बीच हुआ जिसके कारण सऊदी अरब कर्नाटक में तेल रिजर्व रखने का दूसरा प्लांट बनाने में अहम रोल अदा करेगा। दूसरा समझौता भारत के इंडियन आयल कार्पोरेशन के पश्चिमी एशिया यूनिट और सऊदी अरब की अल-जेरी कंपनी के बीच हुआ। मोदी ने इस दौरान इंडिया-सऊदी स्ट्रैटिजिक पार्टनरशि। काउंसिल के गठन की भी घोषणा की। इस काउंसिल में दोनों देशों का नेतृत्व शामिल होगा जो भारत को अपनी उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करेगा। सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की संख्या सबसे ज्यादा है। वहां 26 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। पहले से उलट, भारत अब द्विपक्षीय बातचीत में दूसरे देशों में रह रहे अपने लोगों के मुद्दों और उनके फायदों का पूरा इस्तेमाल करने में नहीं हिचकता है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब में भारतीय समुदाय की ‘कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता’ का खास तौर से जिक्र किया और कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होंगे। भारत और सऊदी अरब दोनों ही वैश्विक और क्षेत्रीय संकट के दौर में अपनी विदेश नीति और प्राथमिकताओं को नई परिभाषा दे रहे हैं। भारत के लिए सऊदी अरब और खाड़ी देश मध्य-पूर्व के प्रमुख आकर्षण बन रहे हैं। वहीं, सऊदी अरब के लिए भारत विश्व की आठ बड़ी शक्तियों में से एक है, जिसके साथ वो अपने श्विजन 2030श् के तहत रणनीतिक साझेदारी करना चाहता है। इसलिए अगर भारत और सऊदी अरब के रिश्तों में नई ऊर्जा आती दिख रही है तो इसे लेकर हैरान नहीं होना चाहिए।

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