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सऊदी अरब में मृत्युदंड के मामलों में आई 85 प्रतिशत की गिरावट

सऊदी अरब अपने कड़े प्रतिबंधों और मौत की सजा के लिए दुनियाभर में बदनाम है, लेकिन साल 2020 में सऊदी अरब में मौत की सजा के आंकड़ों में हैरतअंगेज गिरावट आई है। अब रहमदिल हुए सऊदी में 2019 में मौत की सजा के 184 मामले थे, लेकिन 2020 में सऊदी में सिर्फ 27 मामलों में मौत की सजा दी गई।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार , 2020 में मौत की सजा के मामलों में 85 फीसदी की गिरावट हुई है। 18 जनवरी को सऊदी अरब के मानवाधिकार आयोग की ओर से कहा गया कि नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों के लिए मौत की सजा पर रोक के बाद इन मामलों में कमी देखी गई है। 2020 में इस तरह के अपराधों के लिए मौत की सजा पर रोक लगाने के लिए एक नया कानून लाया गया।

हालांकि अब तक सार्वजानिक रूप से कोई नए दिशा-निर्देश कहीं छपे नहीं हैं और यह अब तक साफ़ नहीं है कि कानून को हमेशा की तरह एक राजकीय आदेश के तहत बदला गया है या नहीं। सऊदी के 34 वर्षीय राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान को पिता राजा सलमान का समर्थन प्राप्त है।इन सभी बदलावों का श्रेय उन्हीं को है।

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इन सजाओं पर लग चुकी है रोक

माना जा रहा है कि देश के आधुनिकरण और विकास के लिए राजकुमार कई महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे हैं। वह चाह रहे हैं कि देश में विदेशी निवेश आये और अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाया जा सके। इसी प्रयास के तहत वह कई बदलाव कर सऊदी को बदनामी से शिखर की ओर ले जा रहे हैं। इसी कोशिश है कि अति-रूढ़िवादी वहाबियों की ताकत पर अंकुश लगा है।

गौरतलब है कि पिछले साल ही सऊदी अरब में नाबालिग अपराधियों को मौत की सजा देने के प्रावधान को हटा दिया गया था। साथ ही सार्वजानिक रूप से कोड़े मारने की सजा को भी हमेशा के लिए हटा दिया गया है। इन सबकी जगह आप जेल, कारावास या सामुदायिक सेवा की सजा देने का प्रावधान है।

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