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रूस के रिश्तों की नई करवट

ऐसा लगता है कि अब दुनिया के सियासी रिश्ते नई करवट ले रही है। पुराने समीकरण टूट रहे हैं, न बन रहे हैं। टूटने और बनने की यह प्रक्रिया कई बार हमें चौंकती भी हैं। रूस का चीन के करीब आ जाना और उसके यूक्रेन पर हमला यही बताता है कि चीजें बहुत तेजी के साथ बदल रही हैं। रूस का पश्चिमी देशों के साथ टकराहट एक नया शीतयुद्ध की वर्णमाला रच रहा है।

अभी हाल ही में यूक्रेन के तीन नौसैनिक जहाजों पर रूस ने हमला किया। हमले के बाद तीनों जहाजों को कब्जे में भी ले लिया। यह हमला इसलिए हुआ क्योंकि कुछ दिन पहले उक्रेन ने अपने बंदरगाहों की रूस द्वारा की जा रही निगरानी का विरोध किया था। रूस ने यह निगरानी तब की थी जब मार्च में यूक्रेन ने क्रीमिया से एक मछली पकड़ने वाली नाव जब्त कर ली थी। रूस की दलील थी कि जहाजों की जांच करना सुरक्षा कारणों से जरूरी थी, कारण कि यूक्रेन के कट्टरपंथियों से पुतिन को खतरा है।

असल में रूस कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे यूक्रेन के साथ रूस के झगड़े की वजह उक्रेन को दो बंदरगाह हैं- बर्डयंस्क और मेरीपोल। यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको के मुताबिक ये बंदरगाह यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। अगर रूस मेरीपोल से लोहे और स्टील के जहाज रोक लेता है तो उसे हजारों डॉलर का नुकसान होता है। इतिहास की ओर लौटे तो यूक्रेन ने साल 2014 में हुई क्रांति के बाद देश के रूस के समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यजुकोवियर को पद छोड़ना पड़ा था। तब रूस ने यूक्रेन में दखल देकर क्रीमिया को अपने कब्जे में कर लिया था। दरअसल, सोवियत संघ से अलग होने के बाद से ही क्रीमिया रूस-यूक्रेन टकराव का सबब बन गया है जो आज भी जारी है।

सबसे हैरानी की बात है कि रूस के सैन्य अभ्यास में चीन के सैनिक शामिल हुआ। आमतौर पर चीन को रूस का शत्रु माना जाता है। पूरी साइबेरिया में किए गए सैन्य अभ्यास में चीन के 32 हजार सैनिक शामिल हुए। यह शीतयुद्ध के बाद सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास था जिसमें लगभग तीन लाख सैनिक शामिल हुए थे। सैन्य अभ्यास के बाद रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से मुलाकात कर कहा-‘राजनीति, सुरक्ष और सैन्य क्षेत्र में हमारा रिश्ता भरोसेमंद है।

कहा जा रहा है कि रूस और चीन का करीब आना अमेरिका के कारण है। दोनों ही देश अमेरिका को अपना शत्रु नंबर एक मानते हैं। दोनों ही देशों को अमेरिका को निपटाना है। अकेले कोई भी देश अमेरिका को मात देने की स्थिति में नहीं है। इसलिए एक से दो हो गए हैं।

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