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जैविक हथियार की मदद से महाविनाश की तैयारी में जुटा रूस

ब्रिटेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बेहद घातक वायरस इबोला और मारबर्ग के जरिए महाविनाश की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस महाविनाश के लिए वह किसी हथियार के नहीं बल्कि दो बेहद ही खतरनाक वायरस के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। जिस पर ब्रिटेन के सैन्य विशेषज्ञों द्वारा चेतावनी जारी की गई है। यह महाविनाश की तैयारी उनके जैविक हथियार प्रोजेक्ट का ही हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे कार्यक्रम को रूस की खुफिया एजेंसी एफएसबी ( FSB) की यूनिट 68240 संचालित कर रही है जिसका कोड नाम टोलेडो है। पुतिन के विरोधियों को जहर देने के आरोप भी इसी यूनिट पर लगे हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माना जा रहा है कि रूसी खुफिया एजेंसी की यूनिट 68240 द्वारा इबोला और इससे ज्यादा विनाशक मारबर्ग वायरस पर शोध किया जा रहा है। ये वायरस बेहद ही खतरनाक है क्योंकि ये आपके शरीर के अंदर ही बड़ी मात्रा में रक्तस्राव की स्थिति पैदा कर देते हैं। इन वायरस से संक्रमित होते ही मनुष्य के अंग कोई भी गतिविधि करने में असमर्थ हो जाते हैं यानी आपके अंग काम करना बिल्कुल बंद कर देंगे। यह वायरस इतने विनाशक है कि इनसे दुनिया भर में भीषण प्रकोप फैल सकता है।

पहले से ही दुनिया में कोरोना और कोरोना के नए स्ट्रेन से दुनिया त्रस्त है। ऐसे में पुतिन का ये विनाशकारी प्रोजेक्ट चिंता का विषय बन गया है। ब्रिटेन के एक पूर्व सैन्य खुफिया अधिकारी को डर है कि रूस इन वायरस के शोध से आगे बढ़ चुका है और टोलेडो प्रॉजेक्ट के तहत से हथियार बनाने के काम में जुट गया है।

क्या है टोलेडो ?

स्पेन के एक शहर का नाम टोलेडो है जहां प्लेग फैलने पर यह शहर श्मशान घाट में तब्दील हो गया था। टोलेडो केवल स्पेन में ही नहीं एक टोलेडो अमेरिका में भी है जहां साल 1918 में फ्लू की भयंकर विनाशलीला हुई। इस विनाशलीला का सामना करने वाले अमेरिका के ओहियो के एक शहर का नाम भी टोलेडो है। गैर-सरकारी संस्था ओपेन फैक्टो के जांचकर्ताओं के मुताबिक, रूसी रक्षा मंत्रालय में एक गुप्त यूनिट है जिसका नाम सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट है जिसके द्वारा ‘दुर्लभ और घातक’ वायरस पर शोध किया जाता है।

‘इबोला और मारबर्ग वायरस को हथियार बना रहा रूस’

मास्को में स्थित 48वीं सेंट्रल रिसर्च यूनिट के तार 33वीं सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े है। इसी ने जानलेवा नर्व एजेंट नोविचोक बनाया है। पुतिन के विरोधियों पर इस घातक जहर से हमला करने का आरोप लगा है। ओपेन फैक्टो की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के दोनों ही संस्थानों पर जैविक हथियारों पर शोध करने के लिए अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा है। 48वीं रिसर्च यूनिट कथित रूप से अपना डाटा एफएसबी की यूनिट 68240 को भेजती है जो टोलेडो कार्यक्रम चला रही है।

मिरर ने एक सूत्र के हवाले से कहा, “रूस और ब्रिटेन दोनों की प्रयोगशालाएं नोविचोक जैसे जहर से खुद को बचाने के लिए जैविक और रासायनिक युद्ध का अध्ययन कर रही हैं।” उन्होंने कहा कि रूस पहले ही दिखा चुका है कि वह खुलेआम ब्रिटेन की सड़कों पर नोविचोक जहर का इस्तेमाल कर रहा है। सूत्र ने कहा, “इसका मतलब है कि रूस इबोला और मारबर्ग वायरस की घातक क्षमता पर एक हथियार के रूप में शोध कर रहा है।” मारबर्ग एक वायरस है जो संक्रमित होने पर 88 प्रतिशत लोगों को मौत की घाट उतार देता है।

विपक्षी नेता को अंडरवियर के जरिये जहर देकर मारना चाहती थी रूसी खुफिया एजेंसी

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