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अमीर वर्ग करता है दुनिया में सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन : ऑक्सफैम रिपोर्ट

मनुष्य द्वारा पर्यावरण के साथ लगातार अपनी सुविधाओं के लिए किये जा रहे नए- नए प्रयोगों के कारण जलवायु में अप्राकृतिक परिवर्तन आ रहा है जो धीरे – धीरे विश्व के लिए एक बड़े खतरे का रूप लेता रहा है। अत्यधिक मात्रा में होने वाला कार्बन उत्सर्जन भी वैश्विक तापमान में वृद्धि का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। कहा जा सकता है की इससे धरती का तापमान गर्म हो रहा है।

 

हाल ही में ऑक्सफैम द्वारा जारी की गयी रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया में सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन पूंजीपति वर्ग के लोग करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक आबादी का सबसे अमीर एक प्रतिशत हिस्सा उतनी ही मात्रा में कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है, जितना दुनिया के सबसे गरीब दो-तिहाई या पांच अरब लोग। रिपोर्ट के अनुसार 99 प्रतिशत गरीब आबादी में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को उतना कार्बन पैदा करने में लगभग 1 हजार 500 साल लगेंगे जितना आमिर वर्ग के लोग एक वर्ष में ही उत्सर्जित कर लेते हैं।

अमीर वर्ग कैसे करता है अधीक कार्बन उत्सर्जन

 

इससे पहले आई रिपोर्ट के अनुसार पूंजीपति लोगों द्वारा किया गया निवेश भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करता है। लेकिन अगर हम व्यक्तिगत स्तर पर इसके बारे में सोचें, तो अरबपतियों की यात्रा, यात्रा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन भी बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का कारण बनते हैं।

2018 में निजी जहाजों, निजी विमानों, हेलीकॉप्टरों, 20 अरबपतियों के बंगलों से औसतन 8 हजार 194 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित हुई थी। 2021 में ऑक्सफैम और स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट द्वारा संयुक्त रूप से एक अध्ययन किया गया था। अध्ययन के अनुसार, दुनिया का सबसे अमीर 1 प्रतिशत सामान्य से 35 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में योगदान देता है।

 

कार्बन उत्सर्जन को कम कैसे करें ?

 

कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने के लिए विश्व स्तर पर कई प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन अलग-अलग कंपनियां और उद्योग इसे कम करने में नाकाम हो रहे हैं। यदि 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य तक कम करना है, तो निम्न आय वाले देशों को पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। लेकिन यह योजना उतनी कारगर नहीं है। अगर हम सिर्फ पेड़ लगाकर दुनिया के कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को 2050 तक शून्य पर लाना चाहते हैं, तो हमें लगभग 1.6 बिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में नए जंगल बनाने होंगे। इसका मतलब है कि वनों को भारत के पांच गुना क्षेत्र में उगाया जाना है।

इस कारण से विशेषज्ञ यह नहीं सोचते हैं कि सिर्फ पेड़ लगाने से कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने की योजना संभव है। CO₂ को कम करने के लिए हर देश में सरकारों को सक्रिय रूप से कार्य करना चाहिए। उन्हें पर्यावरण के अनुकूल नीतियों की योजना बनानी चाहिए। साथ ही सरकार को ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की अनुमति न देने पर भी ध्यान देना चाहिए। इस नीति में पारदर्शिता बनाए रखना भी आवश्यक है।

 

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