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फेस रिक्गनीशन पर पाबंदी

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में फेस रिक्गनीशन तकनीक का इस्तेमाल पूरी तरह बैन हो गया है। अमेरिका की असेंबली में 8-1 के अंतर से पास हुए बिल से यह तय हो गया कि अब इस तकनीक को लोगों की पहचान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यानी स्थानीय एजेंसियां, पुलिस और ट्रैफिक में भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर अपराधियों और नियम तोड़ने वालों को नहीं पकड़ा जा सकेगा।

इसके अलावा आने वाले समय में नागरिकों को सर्विलांस तकनीक खरीदने के लिए भी शहर के अफसरों की अनुमति लेनी पड़ेगी। फेस रिकग्नीशन के इस्तेमाल के खिलाफ रहे अधिकारियों का तर्क है कि मौजूदा तकनीक में कई खामियां हैं, जिससे इनकी विश्वसनीयता घटती है। साथ ही इससे लोगों की निजता और आजादी पर भी असर पड़ता है।

दूसरी तरफ इस तकनीक का पक्ष रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि फेस रिकगनीशन बैन करने से आम नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा पैदा होगा, इससे अपराध से लड़ने में भी पुलिस को मुश्किल हो सकती है। अभी इस बिल को दूसरी वोटिंग के लिए भी पेश किया जाना है। इसके बाद ही यह बिल कानून का रूप ले पाएगा। हालांकि, नए नियम सैन फ्रांसिस्को के एयरपोर्ट और बंदरगाह पर प्रभावी नहीं होंगे, क्योंकि दोनों केंद्र की ट्रम्प सरकार के अंतर्गत आते हैं।

भारत सहित कई देशों के एयरपोर्ट में चेहरे की पहचान करने वाली टेक्नोलॉजी अपनाई जा रही है। यह टेक्नोलॉजी अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को से शुरू हुई थी, लेकिन इस पर पाबंदी लगा दी गई। पाबंदी इसलिए लगाई गई क्योंकि इसके जरिए चेहरों की गलत पहचान हो रही थी। साथ ही सामूहिक निगरानी के लिए इसका ज्यादा दुरुपयोग हो रहा था।

पुलिस और जांच एजेंसियां इस बात को लेकर परेशान थी कि इस तकनीक के कारण लोगों की निजी जानकारियां सार्वजनिक हो रही थीं। पुलिस और जांच एजेंसियों के खिलाफ रोजाना दो से तीन मुकदमे दर्ज हो रहे थे। पिछले महीने ही गलत पहचान के कारण ऑस्मेन बेह नाम के एक युवक ने चोरी के आरोप में फंसाने पर एपल कंपनी के खिलाफ 6,900 करोड़ रुपए का मुकदमा दर्ज करवाया था।

सैन फ्रांसिस्को के बोर्ड ऑफ सुपरवाइजर्स ने 8 के बदले 1 वोट से इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। लिहाजा, वीडियो क्लिप या फोटोग्राफ के आधार पर किसी की पहचान का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने से सार्वजनिक एजेंसियों को मना कर दिया गया है। यहां गोपनीयता और नागरिक अधिकारों का समर्थन करने वाले इस बात को लेकर चिंतित हैं कि सामूहिक निगरानी के लिए इस तकनीक का दुरुपयोग किया जा सकता है। इससे ज्यादा झूठी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

सैन फ्रांसिस्को में गूगल, एपल और फेसबुक जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनियां स्थापित हैं। इन कंपनियों के इंजीनियरों ने ऐसे सिस्टम तैयार किए हैं, जो व्यवसाय और ग्राहकों के उपयोग के लिए चेहरों की पहचान और उनका पता लगा सकते हैं। भारत में भी बेंगलुरु समेत 8 एयरपोर्ट्स पर यह सुविधा इसी साल से लागू होने जा रही है।

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