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बहरीन संग मजबूत हुआ रिश्ता ,आतंकवाद पर मिलकर करेंगे काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहरीन यात्रा के दौरान पाकिस्तान पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रहार करते हुए भारत और बहरीन द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद के इस्तेमाल को अस्वीकृत करने की 25 अगस्त ,रविवार को अपील की गयी। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देश सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला करने एवं खुफिया सूचना के आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग और अधिक बढ़ाने को सहमत हुए।

जारी बयान में किसी देश का नाम लिए बगैर कहा गया, “दोनों देश दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद के इस्तेमाल को खारिज करने, आतंकवादी बुनियादी ढांचे को (जहां कहीं अस्तिव में हैं, उन्हें) खत्म करने और अन्य देशों के खिलाफ सभी तरह के आतंकवाद को समर्थन एवं धन की आपूर्ति को काटने तथा सभी आतंकवादी हरकतों को न्याय के दायरे में लाने की सब देशों से अपील करते हैं।” साथ ही बहरीन की अपनी दो दिनों की यात्रा के दौरान मोदी ने इस खाड़ी देश के शाह हमद बिन इसा अल खलीफा और प्रधानमंत्री खलीफा बिन सलमान अल खलीफा के साथ द्विपक्षीय बैठकें की। मोदी की यात्रा रविवार 25 अगस्त को संपन्न हुई। आज तक में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की बहरीन की यह प्रथम यात्रा थी। क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहां यूएई के सर्वोच्च नागरिक सम्‍मान  ‘ऑर्डर ऑफ जायद’  से सम्‍मानित भी किया गया। एक संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों द्वारा बैठकों के दौरान पारस्परिक हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। गौरतलब है कि दुनिया के कई मुस्लिम देशों आतंकवाद के मसले पर भारत का समर्थन किया है।

भारत और बहरीन द्वारा आतंकवाद एवं कट्टरपंथ को प्रोत्साहित करने वाले और सामाजिक सौहार्द्र में खलल डालने वाली गतिविधियों में साइबर जगत के इस्तेमाल की रोकथाम करने सहित साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के तौर तरीकों पर भी चर्चा की गयी। दोनों नेताओं ने इस बात का भी जिक्र किया कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा संगठित कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने आतंकवादियों और उनके संगठनों की संयुक्त राष्ट्र द्वारा व्यापक पाबंदी की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित होनी चाहिए। इसमें अन्य देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। दोनों देश ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और मानव संसाधन के प्रशिक्षण पर भी सहमत हुए। दोनों देश खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए। यह क्षेत्र समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

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