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दक्षिण अफ्रीका में है एक रेप का शहर, जहां रेप बहुत आम है

क्‍या कभी इस बात की कल्‍पना कर सकते हैं कि दुनिया में कोई शहर ऐसा हो जहां हर तीसरा आदमी रेपिस्‍ट हो। यह बात सच है दक्षिण अफ्रीका का एक ऐसा शहर है जहां रेप करना बहुत आम बात है। कानून व्‍यवस्‍था इतनी लचर है कि रेप के बाद रेपिस्‍ट पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होती है।

इस शहर का नाम है ‘’डीपस्‍लूट’। यहां हर तीन युवकों में से एक ने कम से कम एक बार रेप किया है। यह इस शहर की आबादी का 38 प्रतिशत हिस्‍सा है। यहां रेप करने के लिए चाकू या झुंड लेकर घर में धावा बोल दिया जाता है और इसके बाद चाकू की नोक में या फिर घर के छोटे बच्‍चों को निशाना बनाकर महिलाओं के साथ रेप होता है।

एक न्‍यूज वेबसाइट पर लिखी गई खबर के अनुसार ये रेपिस्‍ट कैमरे पर भी बिना किसी डर के आ जाते हैं। इनको न तो कानून और सजा किसी का डर नही है।

यहां की आम जनता या बचे 62 प्रतिशत लोग ऐसी घटनाओं का विरोध तो करते हैं लेकिन उसका कुछ खास असर नहीं होता। कई जगह तो भीड़ इतनी उग्र हो जाती है कि दोषियों को वहीं सजा दे देती है। हाल ही में रेप के चार आरोपियों को भीड़ ने पहले मारा और उसके बाद वहीं उन्‍हें पेट्रोल डाल कर आग के हवाले कर दिया।

इन घटनाओं के बाद भी वहां रेप रुक नहीं रहे हैं। पुलिस भी कुछ नहीं कर पा रही है न तो रेप के आरोपियों को वह सजा दे पा रही है और न ही भीड़ को उग्र होने से रोक पा रही है। पुलिस को डर रहता है कि उनका कोई कदम दंगे न भड़का दे।

यह स्थिति ऐसी है कि बीते तीन सालों में ‘डीपस्‍लूट’ में 500 से ज्‍यादा रेप की शिकायते आई हैं और किसी में भी कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकी है। रेप के अलावा दूसरे मामलों में भी कानून व्‍यवस्‍था ऐसी ही है। वहां प्रशासन पूरी तरह से नाकाम है इसी कारण से बुरे से बुरे अपराध लोग खुले आम करते हैं और फिर आम जनता को उग्र रूप में इसका विरोध करना पड़ता है।

मुझे HIV है और मैं इसे फैलाना चाहता हूं

बीबीसी हिन्‍दी की वेबसाइट पर लिखी इस खबर में एक पक्ष ऐसा भी है जहां डेविड नाम का व्‍यक्ति यह स्‍वीकार करता है कि उसने अब तक 22 से 25 महिलाओं के साथ रेप किया है। वह जानता है कि वह HIV से संक्रमित है और वह यह संक्रमण फैलाना चाहता है।

ऐसी मानसिकता के लोग वहां आजाद घूम रहे हैं और जब म‍र्जी आ रही है किसी भी घर में घुस कर रेप कर रहे हैं। यह स्थिति बहुत भयावह है और ऐसे में कानून व्‍यवस्‍था का कुछ न कर पाना वहां के लोगों के लिए बहुत दुखद है।

उम्‍मीद है कि इस खबर के बाद कुछ अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍थाएं यहां काम करें और यहां के लोगों के लिए भयमुक्‍त जीवन का अवसर बने।

खबर बीबीसी हिन्‍दी से साभार  

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