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थाईलैंड में अनुच्छेद 112 के खिलाफ और तेज हुआ जनआंदोलन

थाईलैंड में  अनुच्छेद 112 के खिलाफ जनांदोलन और तेज हो गया है। संविधान के इस अनुच्छेद के तहत थाईलैंड में लोग राजा के खिलाफ नहीं बोल सकते। राजा के खिलाफ बोलने पर आपराधिक मामला बन जाता है। लिहाजा लोग अनुचछेद 112 को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन मानते हुए आंदोलन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन पिछले साल बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में हुआ था। गिरफ्तार लोगों पर आरोप है कि उन्होंने राजशाही का  अपमान, किया है।

थाईलैंड की आपराधिक संहिता के अनुच्छेद 112 में निहित “लेज़ मेजस्टे” कानून, जेल में 15 साल तक की सजा का प्रावधान है।छात्र कार्यकर्ताओं का कहना है कि राजनीतिक विरोध को एक सैन्य-शाहीवादी प्रतिष्ठान को कुचलने के लिए दशकों से कानून का दुरुपयोग किया गया है।

“हम चाहते हैं कि अनुच्छेद 112 को इस कानून के तहत दोषी ठहराए गए हमारे चार नेताओं और अन्य राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए। ”पूर्व सैन्य जुंटा प्रमुख प्रथुथ चान-ओन्हा के नेतृत्व वाली सरकार ने कानून के किसी भी दुरुपयोग से इनकार करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध की अनुमति है लेकिन राजा का अपमान करके कानून तोड़ने पर दंडित किया जाएगा। थाईलैंड आधिकारिक रूप से एक संवैधानिक राजतंत्र है, लेकिन राजा को विशेष रूप से रूढ़िवादी थाई संस्कृति द्वारा सम्मानित किया जाता है जो उसे बौद्ध धर्म और राष्ट्र के रक्षक के रूप में चित्रित करता है।

पिछले साल उभरने वाले छात्र आंदोलन ने राजा महा वज्रालोंगकोर्न की खुलेआम आलोचना करके लंबे समय तक वर्जित रहा, जो कहते हैं कि 2016 में अपने पिता की मृत्यु के बाद सिंहासन लेने के बाद से बहुत अधिक व्यक्तिगत शक्ति अर्जित की है।थाईलैंड में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।  हजारों की तादाद में लोगों ने गवर्नमेंट हाउस का भी घेराव किया । जिसके कारण पुलिस को भी पीछे हटना पड़ा है। प्रदर्शनकारी देश का नया संविधान बनाने और दोबारा चुनाव करने की मांग पर अड़े हैं। गवर्नमेंट हाउस को थाईलैंड में सरकार का आधिकारिक परिसर माना जाता है। इसी परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर सभी मंत्रालय स्थित हैं। बताया जा रहा है कि 2014 के बाद से यह थाईलैंड में सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक है।

राजधानी बैंकाक में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस की तैनाती की गई है। लेकिन, प्रदर्शनकारियों की बढ़ती तादाद के आगे उनकी एक नहीं चल रही है। प्रदर्शनकारी साफ लहजे में प्रधानमंत्री प्रयुत्त चान-ओ-चा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। कोरोना वायरस की मार से त्रस्त लोग सरकारी भ्रष्टाचार से नाराज होकर सड़कों पर उतर आए हैं। उनका आरोप है कि सरकार की तरफ से उन्हें इस मुसीबत से निकालने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। जबकि देश में नौकरशाही में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है।

पहले थाईलैंड की सेना प्रमुख रहे प्रयुत्त चान-ओ-चा 2014 में तख्तापलट कर देश की सत्ता हथिया ली थी। उनके ही नेतृत्व में 2016 में थाईलैंड का नया संविधान तैयार हुआ था। जिसमें कई ऐसे नियम बनाए गए थे जो मानवाधिकार के खिलाफ थे। इसमें सरकार और राजा की आलोचना करने वालों को गंभीर सजा देने का प्रावधान भी है। थाईलैंड में 2019 में चुनाव भी हुए थे जिसमें प्रयुत्त की पार्टी को जीत मिली थी। हालांकि, लोगों का आरोप है कि सरकार ने अपनी ताकत के बल पर गड़बड़ी करवा कर चुनाव में जीत हासिल की थी। तभी से उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है।

थाईलैंड में सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण का बहाना बनाकर इमरजेंसी लागू की । जिससे लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ लगाने या किसी विरोध प्रदर्शन को आयोजित करने पर पाबंदी है। हालांकि, लोगों ने पाबंदियों की परवाह न करते हुए पूरे जोर से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इतना ही नहीं, थाईलैंड की सरकार के ऊपर न्यायपालिका पर भी दबाव बनाने का आरोप लग रहा है। कहा जा रहा है कि सरकार के इशारे पर ही विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाली एक पार्टी की मान्यता को खत्म किया गया ।

भगवान विष्णु  का अवतार कहे जाने वाले थाईलैंड के राजा महा वाजिरालोंगकोर्न ऊर्फ राम दशम कोरोना संकट में अपने देश की जनता को छोड़कर विदेशों में सुंदरियों के साथ छुट्टियां मना रहे थे ।

थाइलैंड में राजा की आलोचना करने पर 15 साल जेल की सजा का प्रावधान है। इसके बाद भी लोकतंत्र समर्थक लोग राजा राम के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। थाईलैंड में पिछले साल 18 जुलाई से ही राजा राम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शनकारी देश में स्वतंत्र  चुनाव कराए जाने, एक नए संविधान को बनाने और राजा राम की सेना के उत्पीड़न  को बंद करने की मांग कर रहे हैं। देश में वर्ष 1932 से ही संवैधानिक राजतंत्र लागू है।

शनिवार छह मार्च को प्रदर्शनकारी  एकजुट होकर कांटेदार तार से घिरे एक आपराधिक न्यायालय के सामने इकट्ठे  हुए थे। उनकी मांग है कि धारा 112 को समाप्त करें”, उन्होंने यह भी कहा, थाईलैंड के लेज़ मेजस्टे कानून या थाई आपराधिक कोड में धारा 112 का उल्लेख करते हुए, जो किसी को भी राजा को अपमानित या बदनाम करने से रोकता है।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने रैली में राजा की तस्वीरें जला दीं। अलग-अलग समूहों ने बैंकॉक के अन्य स्थानों पर दो अन्य विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया।इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी थी कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और अगर प्रदर्शनकारी बेलगाम हो गए तो पुलिस कठोर उपायों का इस्तेमाल कर सकती है।

एक सम्मेलन बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन पुलिस ब्यूरो के डिप्टी कमिश्नर पिया तावीचाई ने कहा कि जो कोई भी अन्य लोगों के साथ जुड़ता है या शामिल होता है, वह कानून तोड़ रहा है।यह अवैध विरोध प्रदर्शन है।

थाइलैंड: बैंकाक में सैकड़ों विरोध लेज़ मजिस्ट्रेट कानून महामारी के कारण लगे देशव्यापी लॉकडाउन के बाद कार्यकर्ता लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। एक शाही मानहानि कानून के तहत प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा चलाया जा रहा है।

शाही मानहानि कानून और उनके हिरासत में लिए गए नेताओं की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने बैंकॉक की थाई राजधानी में मार्च किया। विरोध काफी हद तक शांतिपूर्ण था और कई विरोध समूहों के गठबंधन द्वारा आयोजित किया गया था। समूह प्रधान मंत्री प्रथुथ चान-ओशा और उनकी सरकार के इस्तीफे के लिए, संविधान को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए और राजशाही को और अधिक जवाबदेह बनाने के लिए बुला रहे हैं।

शासन के आलोचकों को प्रभावी ढंग से एक झूठे राजपत्र कानून द्वारा चुप करा दिया गया है जो राज्य के शक्तिशाली राजा महा वजिरलॉन्गकोर्न और शाही परिवार को मानहानि से लेकर 15 साल तक के कारावास की सजा सुनाता है।

प्रदर्शनकारियों ने को बैंकॉक की आपराधिक अदालत में मार्च किया, जहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने कचरे को इकठ्ठा कर दिया और राजा के चित्र के नीचे आग लगा दी। मानवाधिकार वकील एनोन नम्पा और छात्र नेता परित चिवारक के नाम का जाप किया, और पूर्व सिविल सेवक अंचन की रिहाई का आह्वान किया, जिन्हें राजशाही का अपमान करने के लिए जनवरी में 43 साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया था।

3,000 से अधिक पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों  के आगे तैनात थे। शहर भर में कई दर्जन प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर गिरफ्तार किया गया था।थाई वकीलों ह्यूमन राइट्स के अनुसार, जुलाई 2020 से 13 बच्चों सहित कम से कम 382 लोगों ने विरोध प्रदर्शन का आरोप लगाया है। पिछले हफ्ते  प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए, जिन्होंने उनके खिलाफ रबर की गोलियां, पानी की तोपों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

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