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दुनिया से 2030 तक भी खत्म नहीं हो पाएगी गरीबी : विश्व बैंक

विश्व बैंक ने हाल ही में दुनिया में बढ़ती गरीबी और असमानता पर एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जो बढ़ती गरीबी को लेकर चिंता को बढ़ाते हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में कोरोना संकट ने दुनिया भर में 7 करोड़ लोग गरीबी में धकेल दिए गए । रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गरीबी के साथ-साथ दुनिया भर में असमानता बढ़ी है।

विश्व बैंक ने यह रिपोर्ट “गरीबी और साझा समृद्धि 2022: सुधार पाठ्यक्रम” शीर्षक के तहत जारी की है। तदनुसार, वैश्विक गरीबी में वृद्धि में कोविड महामारी का प्रमुख योगदानकर्ता बताया जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में वैश्विक गरीबी को मिटाने के लिए जो भी प्रयास किए गए हैं, उन्हें कोविड महामारी ने एक बड़ा झटका दिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्थिक विकास की दर को देखते हुए 2030 तक दुनिया में अत्यधिक गरीबी को समाप्त करने का लक्ष्य हासिल होने की संभावना नहीं है।

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2015 तक दुनिया की अत्यधिक गरीबी दर में आधे प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। वर्ष 2020 में अत्यधिक गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या में 7 करोड़ से अधिक की वृद्धि हुई है। 1990 में विश्व गरीबी सर्वेक्षण शुरू होने के बाद से यह एक साल की सबसे बड़ी वृद्धि है। 2020 के अंत तक दुनिया भर में अनुमानित 7.19 मिलियन लोग 175 रुपये पर प्रतिदिन जीवन यापन कर रहे हैं ।

दुनिया भर में असमानता भी बढ़ी

विश्व बैंक ने यह भी देखा है कि वर्ष 2020 में असमानता में बड़ी वृद्धि हुई है। महामारी से बहुत गरीब आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। दुनिया के सबसे गरीब 40 प्रतिशत ने अपनी आय का औसतन 4 प्रतिशत खो दिया। इसकी तुलना में सबसे अमीर लोगों में से 20 प्रतिशत को वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा। नतीजतन, वैश्विक असमानता एक दशक में पहली बार बढ़ी है। 2020 में वैश्विक औसत आय में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। 1990 में औसत आय की माप शुरू होने के बाद से यह पहली गिरावट है।

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