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इजरायल में सियासी बवाल, किसकी बनेगी सरकार?

इजरायल की राजनीतिक उठा-पठक तेज हो गई है।, क्योंकि मंगलवार 23 मार्च को संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग होगी। सियासी संकट के चलते देश में दो साल में चौथी बार संसदीय चुनाव हो रहे है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। पिछले तीन चुनाव में बेंजामिन की लिकुड पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण छोटे राजनीतिक दलों के साथ मिलकर सरकार बनानी पड़ी। लेकिन इस बार उनके सामने काफी मुश्किलें आ रही है। क्योंकि लोग नेतन्याहू के विरोध में सड़कों पर उतरें हुए है।

आम लोगों में नेतन्याहू के खिलाफ गुस्सा है। इसलिए उन्हें जनमत संग्रह करने में दिक्कतें आ रही है। नेतन्याहू और उनकी पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए है। जब कोरोना महामारी पूरी दुनिया को अपने पंजों में ले रही थी, जब इजरायल में भी लॉकडाउन लगा दिया गया था। लेकिन इजरायल के लोगों ने बेंजामिन पर महामारी को रोकने में नाकाम रहने और बिना सोचें समझे लॉकडाउन लगाने के कारण आई मंदी, रोजगार की समस्या और मंहगाई समेत कई मुद्दों को लेकर गुस्सा है। इसी बात को लेकर लोग पिछले एक महीनें से प्रदर्शन कर रहे है। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ काले झंडे भी लहराए, और बीबी घर जाओ के नारे भी लगाए। दरअसल बीबी बेंजामिन का उपनाम है।

बेंजामिन की लिकुड पार्टी है, उनका सामना बैन्नी गैंटज और व्हाइट पार्टी से है। नेतन्याहू इजरायल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे है। इससे पहले वह चार कार्यकाल प्रधानमंत्री रह चुके है। अगर इस बार वह चुनाव जीतते है तो वह यह उनका पांचवा कार्यकाल होगा, अगर हारते है तो इजरायल की राजनीति में दशकों से बने उनके वर्चस्व का अंत हो जाएगा। इजरायल में संसद की नेसेट के लिए हर चार साल बाद चुनाव होते है। लेकिन यह किसी भी सरकार का निश्चित कार्यकाल नहीं होता। अगर सरकार अपने कार्यकाल के दौरान विश्वास मत खो देती है तो संसद में बहुमत या राष्ट्रपति डिक्री के जरिये समय से पहले चुनाव कराए जा सकते है। किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यों वाली संसद में 61 का आकड़ा पार करना होता है।

इजरायल चुनाव की प्रक्रिया

इजरायल में अनुपातिक प्रतिनिधित्व चुनावी व्यवस्था है। जिसे लिस्ट सिस्टम भी कहा जाता है। इसमें मतदाता किसी भी एक पार्टी को अपना मत डालता है। किसी भी राजनीतिक दल को जितने फीसद वोट डलते है उसी के हिसाब से संसद में उसकी सीटें तय हो जाती है। किसी भी पार्टी को कुल मतदान का न्यूनतम 3.25 फीसद मत हासिल करना जरुरी है। अगर कोई पार्टी इससे कम मतदान हासिल करती है तो उसे संसद नेसेट में सीटें नहीं मिलती है। आम चुनाव से पहले सभी पार्टियां अपनी एक प्रिफरेंशियल सूची जारी करती है। सूची में से सांसद बनाए जाते है।

इजरायल में हमेशा मतदान मंगलवार के दिन होता है। उस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है। निर्धारित पोलिंग स्टेशन पर जाकर मतदाता अपना मत करते है। मतदाता केंद्र पर पहुंचने के बाद अपना राष्ट्रीय पहचान पत्र दिखाते है और तीन दलों के अलग-अलग कार्यकर्ता उनकी पहचान की पुष्टि करते है। इसके बाद मतदाता को एक लिफाफा दिया जाता है इसमें वह अपनी पंसदीदा पार्टी के चुनाव चिन्ह की स्लिप लेकर रख लेते है। इसके बाद इस स्लिप को सीक्रेट बैलेट बॉक्स में डाल देते है। इसकी बाद इन मतों की गणना की जाती है। राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों की देखरेख मे सील तोड़ी जाती है। और बैलेट गिने जाते है। 8 दिन के अंदर सीईओ की वेबसाइट पर चुनाव नतीजें घोषित किए जाते है।

चुनाव के नतीजें घोषित होने के बाद राष्ट्रपति सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आंमत्रित करता है। इजरायल के इतिहास में अभी तक कोई भी पार्टी 61 सीटें जीतने में कामयाब नहीं रही। वहां हमेशा गठबंधन की सरकार बनती रही है। पार्टी के नेता के पास बहुमत साबित करने के लिए 28 दिन का वक्त होता है, इसके अलावा राष्ट्रपति 14 दिन का समय और दे सकता है। अगर सबसे बड़ी पार्टी बहुमत साबित नहीं कर पाती तो राष्ट्रपति दूसरी बड़ी पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए न्यौता देता है। अप्रैल 2019 में राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को सरकार बनाने के लिए बुलाया था, लेकिन नेतन्याहू गठबंधन नहीं बना सके। संसद भंग करने के पक्ष में मतदान हुआ, जिसके बाद दोबारा चुनाव कराए जा रहे है।

इस बार भी नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना आसान नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार भी नेतन्याहू की पार्टी 30 सीटों पर ही सिमट जाएगी। जो बहुमत के लिए काफी नहीं। इसलिए सरकार बनाने के लिए उन्हें फिर से छोटे राजनीतिक दलों का सहारा लेना पड़ेगा। माना जा रहा है कि उनके सहयोगी दल 50 सीटें हासिल कर सकते है। नेतन्याहू का सबसे बड़ा विरोधी दल यश अतीद पार्टी है। यश अतीद पार्टी इस बार 20 सीटें जीत सकती है। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि इस बार भी किसी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं आ रही, लिहाजा फिर एक बार इजरायल में गठबंधन सरकार बनने के आसार है।

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