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कोरोना से ‘ए’ ब्लड ग्रुप वालों को सबसे ज्यादा खतरा?

दुनिया के 137 देशों में फैल चुके कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में 7900 से भी अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अकेले चीन में इस वायरस ने 3200 से अधिक लोगों की जानें ली हैं।

भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 147 हो गई है, साथ ही महामारी घोषित हो चुके इस वायरस से 3 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसी बीच चीन के हुबेई प्रांत के झोंगनान अस्पताल के शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस को लेकर एक नया खुलासा किया है।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उनकी स्टडी के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जिनके मुताबिक पता चला है है कि ब्लड ग्रुप ए वाले लोग इस वायरस से दूसरों की अपेक्षा जल्दी संक्रमित हो सकते हैं। जबकि ब्लड ग्रुप ओ वाले लोगों को इस वायरस से संक्रमित होने में समय लगता है।

ये रिसर्च चीन के वैज्ञानिकों ने चीन के झोंगनान अस्पताल में की है। इस पूरी रिसर्च में उन्होंने 2173 लोगों के ब्लड सैंपल लिए। इनमें से 206 लोगों की मौत कोरोना वायरस के कारण ही हुई थी। ये सभी हुबेई प्रांत के अस्पतालों में भर्ती कराए गए थे। चीन में इस वायरस ने सबसे ज्यादा लोगों की जान ली है।

इस स्टडी में सामने आया कि जिनका ब्लड ग्रुप ओ है। उन्हें इस वायरस के संक्रमण का खतरा कम है। क्योंकि वुहान में मरने वाले 206 में से 85 लोगों का ब्लड ग्रुप ए था जबकि 52 लोगों का ब्लड ग्रुप ओ था।

साथ ही जिनका ब्लड ग्रुप ए है उन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता है क्योंकि शोधकर्ताओं ने पाया कि ब्लड ग्रुप ए के मरीजों में संक्रमण की दर और गंभीर लक्षण अधिक विकसित हुए, इस ब्लड ग्रुप के मरीजों को अधिक सतर्क निगरानी और त्वरित इलाज की आवश्यकता है।

अन्य ब्लड ग्रुप की तुलना में ब्लड ग्रुप ओ में संक्रमण का खतरा कम था। हालांकि इस रिसर्च का रिव्यू अभी नहीं हुआ है, लेकिन लेबोरोटरी ऑफ एक्सपेरिमेंटल हीमैटोलॉजी के वैज्ञानिक गाओ यिंगदाई ने कहा है कि ये स्टडी कोरोना वायरस का इलाज खोजने में मददगार साबित होगी। कोरोना वायरस से चीन में सबसे अधिक मौतें हुई हैं।

इस रिसर्च के बाद यह भी कहा गया है कि यदि आपका ब्लड ग्रुप ओ है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप बिल्कुल सुरक्षित हैं, बल्कि स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा गाइडलाइन का पालन करें।

कोरोना के बढ़ते कहर को देखते हुए भारत में केंद्र सरकार ने प्राइवेट लैब को भी इस वायरस की जांच की अनुमति दे दी है। इससे पहले केवल सरकारी लैब ही इसकी जांच कर रहे थे। साथ ही देश के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेज 31 मार्च तक बंद कर दिए गए हैं।

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