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पाकिस्तान को बेचनी पड़ी अमेरिका में अपनी ऐतिहासिक इमारत

पाकिस्तान में छाया आर्थिक संकट दिन प्रतिदिन देश की सरकार और आम जनता के लिए भयावह होता जा रहा है। अब तो हालात कुछ यूँ हैं कि कंगाली के इस दौर में पाकिस्‍तान को अमेरिका में स्थित दूतावास की अपनी ऐतिहासिक ईमारत को 71 लाख डॉलर में बेचना पड़ा।

 

इससे पहले पकिस्तान सरकार ने यहाँ एक होटल बेच दिया था। रिपोर्ट्स के पाकिस्‍तान अमेरिका में अपनी इस बिल्डिंग को बेचने के लिए पिछले कई महीने से प्रयास कर रहा था जिसमें अब जाकर उसे सफलता मिल पाई है। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में स्थित पाकिस्तानी दूतावास की यह इमारत साल 2003 से खाली पड़ी थी जिसे अमेरिकी सरकार नुकसानदेह संपत्ति घोषित कर चुकी है। जिसे अब हाफिज खान नाम के एक बिजनसमैन ने खरीद लिया है। अमेरिका सरकार ने इस पाकिस्‍तानी दूतावास की बिल्डिंग को डाउनग्रेड कर दिया था जिसके कारण उसका टेक्स काफी बढ़ गया था। लेकिन आर्थिक संकट से जूझती सरकार पाकिस्‍तान इस इमारत का टैक्‍स भरने में असमर्थ थी। साल 2018 में इसका राजनयिक दर्जा भी खत्‍म कर दिया गया था।

 

आईएमएफ ,UAE समेत सऊदी अरब से मिली मदद

 

आर्थिक तंगी से निपटने के लिए पकिस्तान आईएमएफ समेत कई देशों से कर्ज की गुहार लगा रहा था। जिसके तहत अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को तीन अरब डॉलर का कर्ज देने की मंजूरी दे दी है। आईएमएफ द्वारा आर्थिक सहायता राशि देने का यह फैसला आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड की बैठक में लिया गया है।
पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच इस समझौते के लिए पिछले महीने यानि जून में सहमति बनी थी। पाकिस्तान को उम्मीद है कि बोर्ड जल्द ही ऋण की पहली किश्त जारी करेगा। दरअसल पाकिस्तान के आर्थिक हलात इतने खराब थे अगर आईएमएफ की बैठक में सहमति नहीं बनती तो पाकिस्तान का डिफॉल्ट होना तय था। पाकिस्तानी के पास विदेशी कर्ज उतारने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। पाकिस्तान सरकार आईएमएफ से करीब 2.5 अरब डॉलर की उम्मीद कर रही थी, हालांकि उसकी उम्मीद से बढ़कर ही आईएमएफ ने 3 अरब डॉलर दिया है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने भी पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की मदद दी है। वहीं सऊदी अरब से पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर मदद मिली है। इस तरह कुल मिलाकर अब पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। गौरतलब है कि वित्तीय संकट से गुजर रहे पाकिस्तान के पास सिर्फ 4.4 अरब डॉलर की ही विदेशी मुद्रा ही बची थी। हालांकि आईएमएफ की 3 अरब डॉलर, सऊदी अरब की 2 अरब डॉलर और संयुक्त अरब अमीरात की 1 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता से ये देश अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार को 10 अरब डॉलर तक ले जाने में सफल होता हुआ नजर आ रहा है।

 

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