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हिंसा से जल रहा पाक

आजादी के बाद पकिस्तान में ऐसे कई विवादास्पद मुद्दों को जन्म दिया जाता रहा है, जो आग उगलते रहे हैं। यह देश आतंकवाद, धर्म परिवर्तन और गलत धारणा को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहता है। इन दिनों तहरीक-ए-लब्बैक के प्रमुख साद रिजवी की गिरफ्तारी को लेकर पूरा देश सुलग उठा है। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो रहा है। हिंसा में एक पुलिस जवान सहित तहरीक-ए-लब्बैक पार्टी (टीएलपी) के 12 कार्यकर्ताओं की मौतें हो गई हैं। पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा पंजाब साहिब के दर्शन करने गए 815 भारतीय सिख लाहौर में फंस गए है।

हिंसा की वजह फ्रांस की एक पत्रिका में पिछले वर्ष छपा पैगम्बर मोहम्मद का विवादित कार्टून है। इससे क्रोधित होकर इस्लामिक कट्टरपंथी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पिछले कई महीनों से फ्रांस के राजदूत को देश से निकालने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। फ्रांस के राजदूत को लेकर इस बात की नाराजगी है कि हजरत मुहम्मद का कार्टून प्रकाशित कर उनका अपमान किया था। प्रदर्शन के दौरान टीएलपी के मुखिया साद रिजवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। इस घटना के बाद देशभर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। हालात इस कदर बिगड़ रहे हैं कि देश गृहयुद्ध के मुहाने पर है। धार्मिक नेता साद हुसैन रिजवी और उनके कई सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद देश के कई हिस्सों में तनाव है। पुलिस ने साद रिजवी समेत तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी (टीएलपी) के कई नेताओं के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

एफआईआर में कहा गया है कि इन्होंने लोगों को हिंसा करने और जाम लगाने के लिए उकसाया। इसके लिए लाउडस्पीकर से ऐलान करने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप भी लगाए गए हैं। कहा जा रहा है कि अपने नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने जान लेने के इरादे से पत्थरबाजी की और पुलिसकर्मियों पर हमले किए। एफआईआर के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिसकर्मियों को पीटा जिसमंे एक सिपाही की मौत हो गई। इसके बाद से ही देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं जिससे कई इलाकों में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। साद रिजवी की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुए प्रदर्शनों से सबसे ज्यादा प्रभावित लाहौर है। यहां पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला। इसमें लाहौर पुलिस की डाॅलफिन फोर्स और इलीट फोर्स के जवानों ने भी हिस्सा लिया। टीएलपी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शनों की वजह से शहर के 17 इलाके बंद हैं।

प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। यहां पुलिस ने कई मदरसों और टीएलपी नेताओं के घरों पर छापेमारी की। गिरफ्तारी से बचने के लिए कई कार्यकर्ता घरों से भाग गए हैं। पुलिस ने रिजवी को हिरासत में लेने के बाद कोई कारण नहीं बताया है। साद रिजवी ईशनिंदा विरोधी फायरब्रांड धर्मगुरू खादिम हुसैन रिजवी के बेटे हैं। हालांकि तहरीक-ए- लब्बैक पार्टी के नेता पुलिस के इस कदम को 20 अप्रैल को प्रस्तावित इस्लामाबाद मार्च को रोकने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। साद रिजवी जब एक दफन में शामिल होने जा रहे थे तब उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया। जैसे ही उनकी गिरफ्तारी की खबर फैली तहरीक-ए-लब्बैक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन शुरू कर दिए।

दरअसल, पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार ने तहरीक-ए-लब्बैक के पूर्व प्रमुख खादिम हुसैन रिजवी के साथ 16 नवंबर 2020 को चार सूत्रीय समझौता किया था। खादिम फ्रांस के राजदूत को देश से निकालने की मांग कर रहे थे। सरकार ने वादा किया था कि वो इस मुद्दे को संसद के सामने ले जाएगी और जैसा संसद में तय होगा वैसा किया जाएगा। ये समझौता खादिम हुसैन रिजवी को इस्लामाबाद की तरफ मार्च करने से रोकने के लिए किया गया था। जब इस समझौते का पालन नहीं हुआ तो पार्टी ने सरकार के साथ फरवरी 2021 में एक और समझौता किया। इसके तहत टीएलपी ने पाकिस्तान सरकार को फ्रांसीसी राजदूत को वापस भेजने के लिए 20 अप्रैल तक का समय दिया है। खादिम रिजवी के बेटे साद रिजवी ने अपने पिता के मिशन को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। वो इस समय अपने पिता के बनाए मदरसे में दर्स निजामी के अंतिम वर्ष के छात्र हैं। इस्लामी शिक्षा में ये डिग्री स्नातकोत्तर के बराबर होती है।

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