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पाकिस्तान को एक और झटका

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को नीचा दिखाने के लिए पाकिस्तान हर संभव कोशिश रहा है, लेकिन हर बार वह अपनी ही चाल में फंस जाता है। इस बीच जेनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् (यूएनएचआरसी) के 42वें सत्र में भी कश्मीर मामले और 370 पर उसे मुंह की खानी पड़ी। पाकिस्तान ने कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र से मध्यस्थता करने की मांग की थी, मगर संयुक्त राष्ट्र ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। यूएन महासचिव एंटोनियो गुतारेस के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की अपील स्वीकार नहीं की जा सकती। दोनों देशों को ही यह मुद्दा आपसी बातचीत के जरिए सुलझाना होगा। पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) पहुंचा, लेकिन भारत ने अपने तर्कों से उसकी हर मांग को बेदम कर दिया। पाकिस्तान की दिक्कत यह है कि वह कठघरे में खड़ा तो भारत को कर रहा है, लेकिन खुद दोषी साबित हो जा रहा है। उसके द्वारा गैरकानूनी तरीके से कब्जाए गए हिस्से के निवासी ही प्रताड़ना के खिलाफ न सिर्फ आवाज बुलंद कर रहे हैं, बल्कि विश्व समुदाय की आंखें खोलने का भी काम कर रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान के एक्टिविस्ट सेंगे एच सेरिंग ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सत्र में अपने भाषण में साफ कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का अभिन्न हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को यह समझने की जरूरत है कि पाकिस्तान पिछले 70 सालों से बड़ा अवरोधक बना हुआ है।

इसी तरह गिलगित-बाल्टिस्तान से ताल्लुक रखने वाले कर्नल वजाहत हसन (सेवानिवृत्त) ने सत्र में कहा, ‘पाकिस्तान कहता है कि पूरा जम्मू-कश्मीर विवादित क्षेत्र है और वहां लोगों को खुद फैसला लेने की आजादी होनी चाहिए। मैं यह जरूर कहूंगा कि पाकिस्तान यह दावा कैसे कर सकता है कि यह विवादित क्षेत्र है?’ हसन ने कहा कि पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान को लंबे समय से कश्मीर के अखाड़े के अंदर रखा हुआ है, जिस वजह से लोग गिलगित-बाल्टिस्तान के महत्व को नहीं जानते हैं और न ही जम्मू-कश्मीर राज्य के साथ इसके लिंक को। उधर, ऐक्टिविस्ट सेंगे सेरिंग ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर में कुछ लोगों के लिए एक हथियार बना हुआ था, जिसने उन्हें दूसरी जाति और धर्म पर वीटो का अधिकार दे रखा था। जो लोग इससे लाभान्वित हो रहे थे, वे पाकिस्तान की मिलिटरी के समर्थक बन गए थे और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के रणनीतिक हित का प्रचार कर रहे थे।’

उल्लेखनीय है कि कश्मीर का मुद्दा यूएनएचआरसी के सत्र की शुरुआत से ही छाया हुआ है। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटाए जाने के मुद्दे को उठाते हुए भारत पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगाए, वहीं भारतीय प्रतिनिधियों ने पाक को जमकर लताड़ लगाई और यूएनएचआरसी को बताया कि यह भारत का आंतरिक मामला है। भारतीय राजनयिकों ने यह भी बताया कि किस तरह पाकिस्तान, भारत में आतंक फैला रहा है और वहां के मंत्री तक युवाओं को जिहाद के लिए उकसा रहे हैं।

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के लाख गिड़गिड़ाने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र ने मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इसका हल बातचीत से होना चाहिए। ऐसे में अगर संयुक्त राष्ट्र आमसभा में 27 सितंबर को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान फिर कश्मीर राग अलापते हैं तो इसका कोई फायदा नहीं होगा। कश्मीर मुद्दे पर लगातार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान की बौखलाहट जारी है। पाकिस्तान ने यूएनएचआरसी के समक्ष जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति पर एक ‘‘संयुक्त बयान“ प्रस्तुत किया है, जिसमें दावा किया गया है कि इसे 60 देशों का समर्थन हासिल है। हालांकि 60 देशों के इस संयुक्त बयान में कौन-कौन देश शामिल हैं और किसने जम्मू- कश्मीर पर पाकिस्तान का समर्थन किया है, इसका जिक्र नहीं है। यही वजह है कि पाकिस्तान के दावे पर एक बार फिर से सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि संयुक्त बयान में कथित तौर पर 57 सदस्यीय संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) और पाकिस्तान के हमेशा से सहयोगी रहे चीन का समर्थन हासिल है। हालांकि इंडोनेशिया जैसे कई ओआईसी सदस्य देशों के राजनयिकों ने भारतीय समकक्षों के साथ बातचीत के दौरान इस कदम से खुद को दूर कर लिया।

गौरतलब है कि मार्च 2006 में स्थापित हुए यूएनएचआरसी में कुल 47 निर्वाचित सदस्य देश हैं। भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सदस्यों को पांच क्षेत्रीय समूहों में बांटा गया है। अफ्रीकन स्टेट्स में 13 सदस्य, एशिया-पैसिफिक में 13 सदस्य, ईस्टर्न यूरोपियन स्टेट्स में 6 सदस्य, लैटिन अमेरिकन और कैरिबियन स्टेट्स में 8-8 सदस्य, जबकि वेस्टर्न यूरोपियन और अन्य स्टेट्स के लिए 7 सीटें निर्धारित हैं। जो नए सदस्य चुने गए हैं, उन देशों के नाम हैं-बुर्किना फासो, कैमरून, इरिट्रिया, सोमालिया, और
टोगो। यह सभी अफ्रीकन स्टेट्स कैटिगरी में हैं। वहीं ईस्टर्न यूरोपियन स्टेट्स ग्रुप में बुल्गारिया और चेक रिपब्लिक, जबकि लैटिन अमेरिकन-कैरिबियन स्टेट्स कैटिगरी में अर्जेंटीना, बहामास और उरुग्वे शामिल हैं। इसके अलावा वेस्टर्न यूरोपियन और अन्य राज्यों की कैटिगरी में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क और इटली नए सदस्य निर्वाचित हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र में पाक की प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने एंटोनियो गुतारेस के सामने कश्मीर मुद्दा उठाया था और मध्यस्थता का आग्रह किया था। गुतारेस के प्रवक्ता स्टेफिन दुजारेक ने कहा कि भारत और पाक को किसी भी तरह के आक्रामक रवैये से बचना चाहिए और दोनों देशों को आपस में बातचीत करके इस मुद्दे का सही समाधान तलाशना चाहिए। यूएन महासचिव के प्रवक्ता ने कहा, मध्यस्थता पर हमारी स्थिति पूर्ववत ही है, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। महासचिव ने दोनों देशों की सरकार से संपर्क किया है। जी-7 की बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस पर चर्चा की और पाकिस्तान के विदेश मंत्री से इस पर बात हुई है। दोनों देशों को बातचीत के जरिए ही इस मुद्दे को सुलझाना होगा। जानकारों की मानें तो संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का कश्मीर मुद्दे पर दोनों देशों के बीच वार्ता करने की अपील ने भारत के रुख को मजबूत किया है।

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