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नए नेतृत्व की पुरानी चुनौतियां

ब्रिटेन को बोरिस जॉनसन के रूप में एक नया नेतृत्व मिला है। कंजरवेटिव पार्टी के नेता जॉनसन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की समय सीमा नजदीक है। जॉनसन ब्रेक्जिट के प्रबल पैरोकार रहे हैं। लेकिन अभी इसके लिए हालात उनके लिए आसान नहीं हैं। सच तो यह है कि यदि हालात अनुकूल होते तो तीन साल के भीतर ही उनसे पूर्व के दो प्रधानमंत्रियों को ब्रेक्जिट की वजह सत्ता से बाहर की राह न पकड़नी पड़ती। आखिर क्या गारंटी है कि पूर्व प्रधानमंत्री टेरीजा में के प्रस्ताव जिन कारणों से गिरे थे, वे जॉनसन के लिए समस्याएं नहीं बनेंगे? खासकर तब जब चांलसर फिलिप हैमंड समेत कई प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों ने उनके नेतृत्व में काम न करने की घोषणा कर दी है।

जॉनसन की एक बड़ी चुनौती अगले सप्ताह होने वाले दो उपचुनावों में कंजरवेटिव पार्टी को विजय दिलाने की होगी। अगर इसमें वे सफल नहीं हुए तो हाउस ऑफ कॉमन्स में उनकी स्थिति और कमजोर होनी स्वाभाविक है, क्योंकि अभी निचले सदन में उसे मामूली बहुमत ही है। इन हालात में 31 अक्टूबर तक ब्रेक्जिट पर समर्थन हासिल करने की अहम चुनौती है। ब्रेक्जिट के आक्रामक पैरोकार जॉनसन के सामने स्थिति इतनी विकट है कि वे इतने कम समय में ब्रेक्जिट के इतर कोई सामानांतर सोच भी प्रस्तुत नहीं कर सकते। जाहिर है कि सत्ता संभालते ही उनके सामने बड़ी चुनौतयां खड़ी हो चुकी हैं। ब्रेक्जिट की चुनौती पहले से ही चली आ रही है।

जॉनसन ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के 55वें प्रधानमंत्री हैं, जबकि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के कार्यकाल में ब्रिटेन के 14वें प्रधानमंत्री हैं। राजकुमारी एजिलाबेथ ने 1952 में अपने पिता जार्ज के निधन के बाद ब्रिटेन की महारानी का पदभार संभाला था और तब उनके कार्यकाल के पहले प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल थे। जानसन जब महारानी से मिलने बकिंघम पैलेस जा रहे थे तब कुछ लोगों ने उनका विरोध भी किया। पीएम पद के लिए आमने-सामने रहे बोरिस जॉनसन और जेरेमी हंट के बीच बाजी बोरिस ने जीती है। बोरिस जॉनसन को 74 फीसदी, जबकि जेरेमी हंट को 26 फीसदी सदस्यों ने पसंद किया था।

ब्रिटेन का प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद जॉनसन 10, डाउनिंग स्ट्रीट रहने चले गए हैं, जो ब्रिटिश प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास है। यहां बतौर पीएम अपने पहले संबोधन में उन्होंने एक बार फिर जोर देकर कहा कि ब्रेक्जिट संभव होकर रहेगा और यह 31 अक्टूबर की निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा होगा। उन्होंने दो टूक कहा, ‘समय आ गया है, ब्रेक्जिट अब दूर की कौड़ी नहीं रह गया है।’ साथ में यह भी कहा कि ब्रिटेन के लोगों को डील के बगैर भी ब्रेक्जिट के लिए तैयार रहने की जरूरत है। घरेलू फ्रंट पर सामाजिक सुरक्षा और अपनी सरकार की अन्य कल्याणकारी नीतियों को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखी।

जॉनसन ने जल्द ही अपनी कैबिनेट का गठन भी किया है। जिसमें भारतीय मूल के कई सांसदों को जगह मिली है। इनमें प्रीती पटेल, आलोक शर्मा, ऋषि सुनक, कुलवीर रांगड़ का नाम भी उनकी कैबिनेट में शामिल है। जिन्हांने टेरेसा मे की अगुवाई वाली कंजरवेटिव पार्टी की सरकार में भी कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। बोरिस जानसन के औपचारिक तौर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद दुनियाभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ब्रिटिश समकक्ष को बधाई दी है। अपने ट्वीट में उन्होंने जॉनसन के कार्यकाल में भारत और ब्रिटेन के बीच हर क्षेत्र में साझेदारी बढ़ने का अनुमान जताया।

बोरिस जॉनसन दो बार सांसद रहे चुके हैं। इसके अलावा विदेश मंत्री और लंदन के मेयर की भूमिका भी उन्होंने निभाई है। इसके अलावा बोरिस गर्लफ्रेंड के साथ रिश्तों को लेकर भी चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री बोरिस ने अपने मंत्रिमंडल में कुछ खास लोगों को जगह दी है। भारतीय मूल की प्रीति पटेल ब्रिटेन की नई गृहमंत्री होंगी। साथ ही, साजिद जाविद को गृह मंत्री पद से हटाकर अब वित्त मंत्री बना दिया गया है। यानी अब ब्रिटेन में गृह मंत्री भारतीय मूल और वित्त मंत्री पाकिस्तानी मूल के हैं।

डोमिनीक राब को नया विदेश मंत्री बनाया गया है। दो साल पहले एक विवाद के बाद प्रीति पटेल की अब उनकी सरकार में शानदार वापसी हुई है। 47 साल की प्रीति का जन्म लंदन में ही हुआ था। उनके माता-पिता मूल रूप से गुजरात से हैं, लेकिन फिर वो युगांडा चले गए थे। 1960 के दशक में वो ब्रिटेन आ बसे। प्रीति पटेल बहुत कम उम्र में कंजरवेटिव पार्टी में शामिल हो गई थीं। उस वक्त उनकी उम्र 20 भी नहीं हुई थी। तब जॉन मेजर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे। साल 2017 में अपनी निजी इसराइल यात्रा को लेकर हुए विवाद के बाद प्रीति पटेल को इंटरनेशनल डेवलपमेंट सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अगस्त 2017 में निजी पारिवारिक छुट्टियों पर इसराइल गईं प्रीति पटेल ने प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू और अन्य इजराइली अधिकारियों से मुलाकघत की थी। इसकी जानकारी उन्होंने ब्रितानी सरकार या इजराइल में ब्रितानी दूतावास को नहीं दी थी।

 

कंजरवेटिव पार्टी में उन्हें एक चमकते सितारे के तौर पर देखा जाता रहा है। इससे पहले भी वो सरकार में कई भूमिकाएं निभा चुकी हैं। जून 2016 में उन्हें इंटरनेशनल डेवलपमेंट मंत्री बनाया गया था। यानी ब्रिटेन की विकासशील देशों को दी जाने वाली आर्थिक मदद का काम वही देख रही थीं। वो यूरोपीय संघ की आलोचक रही हैं। उन्होंने समलैंगिक शादियों के खिलाफ मतदान किया था और धूम्रपान पर प्रतिबंध के खिलाफ भी अभियान चलाया था।

49 साल के साजिद जाविद पाकिस्तान मूल के परिवार से हैं। साल 2018 में जब टेरीजा मे की सरकार में उन्हें गृहमंत्री बनाया गया तो वो ब्रिटेन के पहले नस्लीय अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले गृहमंत्री बने थे। उनका जन्म राकडेल में एक पाकिस्तानी परिवार में हुआ। अपने परिवार के बारे में उन्होंने ईवनिंग स्टेंडर्ड को बताया था। मेरे पिता पाकिस्तान के एक छोटे से गांव से हैं और वो सिर्फ 17 साल की उम्र में काम करने के लिए ब्रिटेन आए थे। मेरे पिता राकडेल में बस गए और यहां कपड़े की मिल में काम किया, लेकिन वो महत्वाकांक्षी थे और उन्हें महसूस हुआ कि बस ड्राइवरों का वेतन अच्छा है। वो बस ड्राइवर बन गए। वो दिन हो या रात जब भी उन्हें काम मिलता था, काम करते थे और इसलिए ही उन्हें मिस्टर ‘नाइट एंड डे’ के नाम से भी जाना जाता था। ‘उन्होंने स्कूली पढ़ाई ब्रिस्टल से की जहां उनके परिवार ने महिलाओं के कपड़ों की एक दुकान खरीदी थी। इसी दुकान के ऊपर बने दो कमरों के फ्लैट में उनका परिवार रहता था। स्कूली पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि बैंक और निवेश में हो गई थी। उन्होंने 14 साल की उम्र में ही अपने पिता की बैंक के मैनेजर से मुलाकात की और पांच सौ पाउंड उधार ले लिए। ये रकम उन्होंने शेयरों में निवेश कर दी। आगे चलकर कम उम्र में ही उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में बड़ी कामयाबियां हासिल कीं।

बोरिस जानसन की टीम में एक और भारतीय मूल के सांसद आलोक शर्मा को भी जगह मिली है। उन्हें अंतरराष्ट्रीय विकास का राज्य मंत्री बनाया गया है। प्रीति पटेल ने कहा, ‘हम अपने देश को सुरक्षित रखने के लिए, अपने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए और अपराधों से लड़ने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगाएंगे। मैं आगे आने वाली चुनौतियों का इंतजार कर रही हूं।’ प्रीति पटेल को भारत समर्थक नेता के तौर पर देखा जाता है जो दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध की पक्षधर हैं। आशा जताई जा रही है कि नई सरकार के गठन के बाद भारत के भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कसेगा। प्रीति के गृहमंत्री बनने से जल्द ही विजय माल्या और नीरव मोदी केस में भारत के पक्ष में फैसला आने की उम्मीद है।

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