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सीरिया की नई करवट

सीरिया युद्ध, हिंसा और तबाही का एक प्रतीक बन गया है। वह बर्बादी के एक मुहावरे में भी तब्दील हो गया है जो किसी भी सूरत में खुश होने वाली बात नहीं हो सकती। लेकिन कहा जा रहा है कि इदलिव सीरिया के युद्ध का अंतिम पड़ाव है। बहुत संभव है कि यहां से युद्ध के एक नई शक्ल अख्तियार करने से वहां की जनता के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो सकती है। इदलिव प्रांत में तीस लाख आम नागरिक और तकरीबन 90 हजार विद्रोही लड़ाके रहते हैं। इनमें 20 हजार कट्टर जिहादी चरमपंथी हैं।

संयुक्त राष्ट्र की एक रपट के मुताबिक सात वर्षों के युद्ध के दौरान सात हजार से ज्यादा बच्चे मारे गए। इस बाबत अपुष्ट रपट बताते हैं कि मरने वाले बच्चों की तादाद 20 हजार से ज्यादा है। सुंयक्त राष्ट्र के महासचिव की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गांवो ने कहा-‘मैंने इस संघर्ष के दौरान जन्म लिए और बड़े हुए बच्चों की कहानी सुनकर काफी दुखी हूं, जिन्होंने सीरिया में कभी शांति नहीं देखी। सितंबर में वहां अशांति के कारण भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी अपना सीरिया दौरा स्थगित करना पड़ा था।

सीरिया में दूसरे देशों की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष मौजूदगी भी उसे संकट से निकालने के बजाय और अधिक संकटग्रस्त कर रही है। इसमें अमेरिकी सेना की भूमिका सबसे ज्यादा है। सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के हमले चार साल पहले शुरू हुए और हमारे अब तक तीन हजार से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है। गठबंधन की सेना ने अगस्त 2014 से इराक में आईएस के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया था। अमेरिका यह हिंसक खेल आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान की आड़ में इराक में एक हजार नागरिकों के मारे जाने की बात कही है। साथ ही उसने कहा है कि आम नागरिक को कोई नुकसान नहीं हो सके इसके लिए हर मुमकिन कोशिश की जाती है।

विद्रोहियों और जेहादियों के कब्जे वाला इदविल प्रांत

असल में सीरिया का रोम इदलिव है। इदलिव शहर में युद्ध को रोकने के लिए जो सौदा हुआ था वो अब दस हजार चरमपंथियों पर निर्भर है। इमनें बड़े विदेशी लड़ाके भी शामिल हैं जो अभी भी उसमें शासन से लड़ रहे हैं। तुर्की और रूस के दरम्यान इदलिव में खून-खराबा रोकने के वास्ते एक डिमिलिटाइजेशन जोन बनाने पर भी सहमति हुई थी। जिस पर अमल नहीं हो सका। अमेरिका समर्थक इजराइल मंत्री ने डेढ़ साल में सीरिया पर दो सौ से अधिक हमले किए। रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन और इजराइल के नेतान्याहू ने युद्धग्रस्त देश सीरिया में अपने अभियान के मुताबिक नियमित बैठकें भी की।

सितंबर में सीरिया का विद्रोहियों के कब्जे वाला इलाका इदलिव सुर्खियों में रहा। पहले वहां सीरियाई सेना ने हमला शुरू किया। लेकिन तुरंत ही ईरान, रूस और तुर्की की कोशिशों से एक समझौता हुआ और लड़ाई हो गई। पिछले कुछ सालों की लड़ाई में यह इलाका पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। यहां से भारी संख्या में पलायन हुआ है। लेकिन कुछ लोग हैं जो युद्ध और हिंसा के बावजूद अपने घरों को लौट रहे हैं।

उधर रूस सीरिया के एयर डिफेंस पर भी ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण हासिल करना चाहता है। इसके बहाने रूस भी सीरिया में अपना दबाव बढ़ाना चाहता है। वह पिछले एक दशक से सीरिया को जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल पुरानी एस-300 बेचने के लिए बेचैन है। लेकिन सीरिया ने एक भी मिसाइल नहीं खरीदी है। ऐसा इसलिए कि रूस सीरिया पर इजराइल के हवाई हमले को लेकर काफी उदासीन रहा है। इदलिव को रूस ने भरोसा जताया कि अब भविष्य में तटस्थ नहीं रहेगा, सीरिया का साथ देगा।

सीरिया में जारी युद्ध के दौरान 2016 में रूस ने हस्तक्षेप भी किया था। तब रूस का साथ मिलने पर वहां की सरकार ने विद्रोहियों के ठिकानों का तेजी से सफाया भी किया था। 2016 की शुरुआत में अलटपों में मिली जीत सरकार के लिए बड़ी कामयाबी रही। इसके बाद असल सरकार की जीत का रथ निरंतर आगे बढ़ता रहा है। ले-देकर अब इदलिव ही वह बड़ा इलाका जहां विद्रोहियों का कब्जा आज भी है। इदलिव का इलाका अब पूरी तरह से बर्बाद हो कर रेगिस्तान में बदल गया है। अब यहां लड़ाई खत्म हो गई है। अब शहर में सन्नाटा है। इस युद्ध में एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपना घर खो दिया है।

अब वहां सभी विद्रोही गुटों को कहा गया है कि वो भारी हथियार जोन से बाहर रहे। तहरीर अब शाम जैसे समूहों का भी 15 अक्टूबर तक अपने लड़ाकों को वहां से हटने के लिए कहा गय है। कई संगठनों ने अपने हथियार हटा भी लिए। इस मिशन अभियान पर अमल करने के लिए तुर्की ने भी जिहादी समूहों को धमकाने और मनाने की कोशिश की। यह भी बात है कि अगर ये समूह अमन की बात पर राजी नहीं होते हैं तो साल के आखिर में जंग दोबारा शुरू हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो तय जानिए वह पहले से ज्यादा खतरनाक होगी।

विद्रोहियों और जेहादियों के कब्जे वाला इदविल प्रांत

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