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म्यांमार पर लगे नए प्रतिबंध

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद राजनीतिक हालात काफी ज्यादा खराब हो चुके है। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा ने म्यांमार के सैन्य अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं पर समन्वित प्रतिबंध लगाए हैं। सोमवार को संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा कि वह गवर्निंग स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल एसएसी और 13 अधिकारियों की अमेरिकी संपत्ति को फ्रीज कर रहा है। और अमेरिका से किसी भी प्रकार का व्यापार करने से रोक लगा रहा है।

कनाडा ने कहा कि उसने म्यांमार सशस्त्र बलों से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए, जबकि यूनाइटेड किंगडम ने राज्य के स्वामित्व वाले उद्योग, म्यांमार जेम्स एंटरप्राइज के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा की, जो पिछले अमेरिकी प्रतिबंधों में शामिल था। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा, “आज की हमारी कार्रवाई शासन पर राजनीतिक और वित्तीय दबाव लागू करने के हमारे संकल्प और हमारे सहयोगियों के संकल्प को चिन्हित करती है।

कनाडा के विदेश मंत्री मार्क गार्नेउ ने भी एक बयान में कहा, “कनाडा म्यांमार के लोगों के साथ खड़ा है क्योंकि वे अपने देश में लोकतंत्र और स्वतंत्रता बहाल करने के लिए लड़ रहे हैं और हम आगे की कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेंगे।” तख्तापलट के बाद से सुरक्षा बलों द्वारा कम से कम 796 लोग मारे गए हैं, जबकि लगभग 4,000 लोग सलाखों के पीछे हैं।

अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने सैन्य शासन के प्रमुख सदस्यों के साथ-साथ राज्य के उद्यमों को लगातार अपनी प्रतिबंध सूची में जोड़ा है, ताकि सेना पर लोकतंत्र में लौटने के लिए दबाव डाला जा सके। कई दिनों तक चले संघर्ष के बाद रविवार 16 मई को सेना द्वारा छह विपक्षी लोगों को मार गिराया गया।

सेना का कहना है कि उसने देश में तख़्तापलट इसलिए किया क्योंकि नवंबर में आंग सान सू ची की पार्टी ने हेरफेर से चुनाव जीता था। म्यांमार के निर्वाचन आयोग ने सेना के इस दावे को नकार दिया है। वर्ष 1948 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से यह म्याँमार में तीसरा तख्तापलट है। म्याँमार में एक वर्ष की अवधि के लिये आपातकाल लागू कर दिया गया है और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेता आंग सान सू की को हिरासत में लिया गया है।

म्याँमार को वर्ष 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। इसे वर्ष 1962 से वर्ष 2011 तक सशस्त्र बलों द्वारा शासित किया जाता रहा, वर्ष 2011 में नई सरकार के साथ नागरिक शासन की वापसी की शुरुआत हुई। 2010 के दशक में सैन्य शासन ने देश को लोकतंत्र की ओर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। हालाँकि नई व्यवस्था के तहत सशस्त्र बल के अधिकारी सत्ता में बने रहे, लेकिन राजनीतिक विरोधियों को मुक्त कर दिया गया और चुनाव आयोजित करने की अनुमति दे दी गई।

वर्ष 2015 के चुनावों में आंग सान सू की के दल राजनीतिक नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) को जीत हासिल हुई, यह देश के पहला स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव था, जिसमें कई दलों ने हिस्सा लिया था, इन चुनावों के बाद यह उम्मीद जगी थी कि म्याँमार लोकतांत्रिक व्यवस्था की और बढ़ रहा है। नवंबर 2020 में हुए संसदीय चुनाव में आंग सान सू की के राजनीतिक नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) को अधिकांश सीटें हासिल हुईं। 2021 की शुरुआत में जब नव निर्वाचित संसद का पहला सत्र आयोजित किया जाना था, तभी सेना द्वारा संसदीय चुनावों में भारी धोखाधड़ी का हवाला देते हुए एक वर्ष की अवधि के लिये आपातकाल लागू कर दिया गया।

 

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