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चीन के चुंगल में फसा नेपाल ,ड्रैगन की धोखेबाजी के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता

 चालबाज चीन के साथ सीमा विवाद को  लेकर एशियाई देशों में इन दिनों तनाव जारी है।पिछले कुछ महीनों से भारत -चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों में तनावपूर्ण स्थिति  बनी  हुई है। इस बीच  चालबाज चीन की शह  पर भारत के खिलाफ  अजेंडे में जुटी नेपाल की केपी ओली सरकार को चीन  ने ऐसा तमाचा मारा  है कि वह कुछ बोल नहीं पा रही है। इसके बाद नेपाल की  जनता का आक्रोश अब सातवें आसमान पर है।  नेपाल के हुमला में चीनी कब्जे और इमारतों के निर्माण की पुष्टि होने के बाद राजधानी काठमांडू में लोग सड़कों पर उतर चीन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाल रहे हैं । हाथों में तख्तियां लिए लोगों ने बालूवाटर स्थित चीनी दूतावास के बाहर नारेबाजी की।

ख़बरों के  मुताबिक, आक्रोशित लोग ‘सीमा अतिक्रमण रोका’, अतिक्रमण की हुई नेपाली जमीन लौटाओ, नेपाल-चीन बॉर्डर का नाका खोलो, चीनी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद जैसे नारे लगा रहे हैं। युवाओं की तख्तियों और बैनरों पर भी इस तरह के नारे लिखे हैं। इसके  चलते  चीनी दूतावास के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया । सोशल मीडिया पर भी प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं और इसके साथ ही लोग चीनी अतिक्रमण के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।

हालांकि नेपाल के हुमला जिले में चीन द्वारा कथित रूप से इमारतों का निर्माण करने के खिलाफ देश के सिविल सोसाइटी समूहों के विरोध प्रदर्शनों पर चीन ने ऐसी रिपोर्टों को खारिज करते हुए कब्जे  की घटना से इनकार किया है। नेपाल में चीनी दूतावास ने अतिक्रमण संबंधी रिपोर्टों का खंडन किया। उसने कहा कि इमारतें चीन की सीमा के अंदर बनाई गई हैं। चीन और नेपाल के बीच कोई भौगोलिक विवाद नहीं है। वहीं, नेपाल के विदेश मंत्री ने भी सफाई देते हुए कहा है कि उनके देश का चीन के साथ कोई सीमा विवाद नहीं है और न ही चीन ने उनके देश की जमीन पर कब्जा किया है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि देश के सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में पाया गया है कि उक्त इमारतें नेपाली क्षेत्र में स्थित नहीं हैं।

दरअसल, पिछले हफ्ते   कहा जा रहा था कि चीन ने तिब्बत से लगे हुमला जिले में नेपाली जमीन पर कथित रूप से नौ इमारतों का निर्माण कर लिया है। इन इमारतों के हुमला जिले के लंपचा बागर इलाके में बनाए जाने का दावा किया गया था। इन ख़बरों  के  बाद नेपाल के लोगों में चीन को लेकर आक्रोश पैदा हो गया था।

नेपाल के एक सिविल सोसायटी समूह ने कल 23 सितंबर को हुमला जिले में चीन द्वारा कथित रूप से इमारतें बनाने के खिलाफ प्रदर्शन किया। समूह के कार्यकर्ताओं ने ‘नेपाल की जमीन वापस लौटाओ’ और ‘चीन का विस्तारवाद बंद करो’ जैसे नारे लगाए। काठमांडू में चीनी दूतावास के सामने भी विरोध प्रदर्शन हुए। अब ऐसी ख़बरें आ रही  हैं कि नेपाल-चीन सीमा का निर्धारण करने वाला पिलर नंबर-11 ही गायब हो गया है। इन खबरों के सामने आने बाद नेपाल की केपी शर्मा ओली की सरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है।

इस बीच हुमला से सांसद चक्का बहादुर लामा ने कहा कि जब तक दोनों पक्ष नदारद पिलर का पता नहीं लगा लेते तब तक विवाद जारी रहेगा। सूत्रों के मुताबिक कहा जा रहा है कि मंगलवार 22 सितंबर को मुख्य जिला अधिकारी के नेतृत्व में नेपाल का एक प्रतिनिधिमंडल चीनी अधिकारियों से बात करने उस इलाके में गया लेकिन चीनी अधिकारियों ने यह कहते हुए उन्हें लौटा दिया कि यह जमीन चीन की है। वहीं चीन सरकार की ओर से भी दावा किया जा रहा है कि उसने सीमा पर अपनी ओर इमारतों का निर्माण किया है।

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