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म्यांमार में बेअसर हो रही सैन्य सख्ती

सैन्य तख्तापलट के बाद से म्यांमार में स्थिति अस्त-व्यस्त है। सेना के सत्ता कब्जाने के बाद से ही म्यांमार में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। इसी बीच 9 फरवरी देर रात यंगून ( रंगून ) में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) पार्टी की नेता आंग सान सू की के पार्टी मुख्यालय पर छापा मारा गया और किसी के न मिलने पर वहां जमकर तोड़फोड़ मचाई गई है।

इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों पर भी पुलिस ने कार्रवाई की है। प्रदर्शनों को अवैध करार दिए जाने के बावजूद लोग मंगलवार को सड़कों पर उतरे और उन्हें हटाने के लिये पुलिस ने हवा में गोलियां भी चलाईं और उनपर पानी की बौछारें भी की। इससे कई लोगों को गंभीर चोटें भी आई हैं जबकि 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया है।

मांडले के मेयर भी हिरासत में

म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मंडाले में विरोध-प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भीड़ को हटाने के लिए चेतावनी देते हुए कम से कम दो गोलियां चलाई गईं। ‘द म्यांमार टाइम्स’ के अनुसार, देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के मेयर यू येविन को भी हिरासत में लिया गया है। इस बीच, यंगून में भी कर्फ्यू को नजरअंदाज करते हुए विरोध प्रदर्शन किए गए।

सोशल मीडिया पर आई खबरों के अनुसार, अब तक पुलिस ने वहां से दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने राजधानी नेपिताव में भी पुलिस द्वारा पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया और हवा में गोलियां चलाईं गई।

कर्फ्यू की परवाह किए बिना कई जगह प्रदर्शन

नेपिताव में पुलिस द्वारा भीड़ पर रबर की गोलियां चलाए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिसके चलते कई लोगों के घायल होने की खबर है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में एक अधिकारी छोटी बंदूक से गोलियां चलाते हुए नजर आया। इन तस्वीरों में कई घायलों को भी दिखाया गया है।

इस तरह की अफवाहें भी है कि पुलिस की ओर से प्रदर्शन में गोलीबारी की गई है। जिसके कारण कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

गौरतलब है कि सेना ने देश में विरोध प्रदर्शन के लिए सभी सार्वजनिक कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग मंगलवार को विरोध करने के लिए अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रदर्शनकारी एक लोकतांत्रिक सरकार की बहाली के साथ-साथ सू की की रिहाई की मांग कर रहे हैं। 1 फरवरी को देश की सेना ने विद्रोह कर दिया और चुनी हुई सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था । सेना का कहना है कि पिछले साल नवंबर में आम चुनाव में धांधली हुई थी। इसी के साथ सेना ने कार्यकारी राष्ट्रपति आपातकाल भी लगा दिया है। आपको बता दें कि म्यांमार में पूर्ण इंटरनेट लॉक डाउन हैं।

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