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मीडिया में छाए रहे मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के पहले और बाद में भी दुनिया भर के मीडिया में छाए रहे। स्थिति यह रही कि जो मीडिया समूह चुनाव से पहले मोदी की आलेचना कर रहे थे, एनडीए को मिली प्रचंड जीत के बाद उनके सुर भी बदल गए। मीडिया के साथ ही विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रमुख नेताओं ने भी नरेंद्र मोदी की जीत को अपने-अपने मुल्कों के लिए बेहतर बताया है।

मोदी के नेतृत्व में भाजपा और सहयोगी दलों को मिली जीत पर सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक रवैया विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित अमेरिका की जानी-मानी पत्रिका टाइम का रहा। लोकसभा चुनाव से पहले इस मैगजीन ने अपने कवर पृष्ठ पर ‘इंडियाज डिवाइडर इन चीफ’ शीर्षक के साथ मोदी का चित्र प्रकाशित किया था। पत्रिका ने सवाल उठाया था कि ‘क्या विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र फिर से मोदी को पांच साल का मौका देने को तैयार है?’ मैगजीन की राय थी कि मोदी का पूरा जोर अपनी नाकामी को छुपाकर राष्ट्रवाद की भावना को उभारना है, लेकिन अब उनका पहले जैसा करिश्मा नहीं रहा।

अपनी पूर्व राय के एक दम उलट अब टाइम्स मैगजीन ने अपने ताजा अंक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को एक सूत्र में पिरोया है। पिछले कई दशकों में कोई दूसरा प्रधानमंत्री यह काम नहीं कर सका। मोदी ने पिछली बार की तुलना में ज्यादा लोगों का समर्थन जुटाकर सत्ता फिर से हासिल की। मैगजीन के मुताबिक मोदी भारत की सबसे बड़ी फॉल्ट लाइन ‘द क्लास डिवाइड’ (जातिगत विभाजन) को ही लगभग खत्म कर दिया है।

टाइम की वेबसाइट पर एक लेख छपा है। इसे मनोज लाडवा ने लिखा है। वह ब्रिटेन की कंपनी ‘इंडिया इंक’ के सीईओ हैं। इस कंपनी के जरिए ही इंडिया ग्लोबल बिजनेस का प्रकाशन किया जाता है। हालांकि ताजा लेख मैगजीन की कवर स्टोरी नहीं है, लेकिन इसमें कहा गया है कि मोदी ने ऐसे सामाजिक परिवेश में जन्म लिया जिसे पिछड़ा माना जाता था। शीर्ष पर पहुंचने के दौरान उन्होंने खुद को कुछ इस तरह से देश के गरीब और लाचार तबके से संबद्ध किया, जो काम नेहरू गांधी परिवार आजादी के 72 सालों बाद भी नहीं कर सका। लाडवा लिखते हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान मोदी को अपनी नीतियों के लिए बेवजह आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस मैराथन चुनाव में उन्होंने सारे देश को एक सूत्र में पिरोते हुए आश्चर्यचकित करने वाली जीत हासिल की। मोदी सरकार ने हिंदुओं के साथ अल्पसंख्यक समुदाय को भी गरीबी रेखा से बाहर निकाला।

भारत के लोकसभा चुनाव पर सबसे पैनी नजर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के मीडिया की रही। पाकिस्तानी मीडिया में भारत के लोकसभा चुनाव के नतीजों के लाइव अपडेट दिखाए गए। भारत में विभिन्न चैनलों के एक्जिट पोल के नतीजे के बाद पाक के टीवी चैनलों पर जिस तरह डिबेट चली उससे पड़ोसी देश की घबराहट के तौर पर देखा गया। 23 मई को जब नतीजे आए तो पाक के सरकारी महकमे और मीडिया में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि अब पाकिस्तान को क्या करना चाहिए। ऐसे समय जबकि बालाकोट के बाद पाकिस्तान अभी तक हाईअलर्ट पर है।

पाकिस्तानी चैनलों के डिबेट में कहा जा रहा है कि जैसा कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर में धारा 370 और 35ए हटाने की बात कही है, उससे आने वाले समय में कश्मीर के हालात बदलने वाले हैं। पाकिस्तान के मीडिया चैनलों में बहस का विषय रहा। ‘क्यों राहुल गांधी फेल हो गए। क्या भारत अब कट्टर हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा।’ यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि अब पांच साल के बाद तो किसी भी विपक्ष का फिर से सत्ता में लौटना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि मोदी सभी का राजनीतिक अस्तित्व खत्म कर देगा। पांच साल के बाद तो भारत के लोगों के पास वोट देने के लिए दूसरा ऑप्शन होगा ही नहीं।

पाकिस्तान में नरेंद्र मोदी के फिर से सत्ता में लौटने पर बहुत से लोगों में मायूसी है, तो कुछ लोग यह भी समझ रहे हैं कि नरेंद्र मोदी इस बार कोई सकारात्मक कदम उठाएंगे और दोनों देशों के बीच हालात सामान्य होंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पाक प्रधानमंत्री इमरान खान को आमंत्रित नहीं करने का विषय भी पाक मीडिया की सुर्खियों में है। देश के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र ‘डॉन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक समाचार चैनल से कहा कि उनका (मोदी) पूरा ध्यान अपने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान पाकिस्तान को कोसने पर था। हम अभी यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वे इतनी जल्दी इससे बाहर निकलेंगे।

भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए सभी बिम्सटेक देशों के नेताओं को आमंत्रित किया गया। बिम्सटेक देशों में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि मोदी ने जब 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तो उनके शपथ ग्रहण समारोह में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (दक्षेस) देशों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था जिनमें पाकिस्तान भी शामिल था। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उस समय मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की थी।


चीन के सरकारी मीडिया ने भी पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल को लेकर कयास लगाए हैं। चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के एक लेख में कहा गया है कि पीएम नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को सही करने की है। लेख में यहां तक कहा गया है कि पीएम मोदी के लिए कई बड़ी समस्याएं उनका इंतजार कर रही हैं। लिहाजा उनके लिए यह दूसरा कार्यकाल आसान नहीं रहने वाला है। इसमें कहा गया है कि बीते दो माह से चल रहे चुनावी माहौल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है। इसके अलावा वहां पर बेरोजगारी का मुद्दा भी अपने चरम पर है। यही वजह है कि पीएम मोदी के लिए अर्थव्यवस्था का मुद्दा सबसे बड़ा है। देश के इन चुनौतीपूर्ण मुद्दों से निपटना पीएम की बड़ी परीक्षा बनने वाली है। इसमें कहा गया है कि बढ़ती मांग के बीच बढ़ती बेरोजगारी भारत की सबसे बड़ी समस्या है।
भारत में एक बार फिर मोदी सरकार बनने को लेकर दुनिया के कई देशों ने बधाई दी है। मालद्वीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने तो एक्जिट पोल के नतीजों पर ही बधाई दे दी थी। इस बीच अमेरिका ने भी उम्मीद जताई है कि दोनों देश बढ़ती सुरक्षा भागीदारी के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने पर विचार करेंगे। भारत में अमेरिकी दूतावास में सार्वजनिक मामलों के राजनयिक डेविड केनेडी ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और अमेरिकी संबंधों को निरंतर मजूबत करने की इच्छा व्यक्त की है। इसलिए यह हमारे लिए आगे बढ़ने का एक अवसर है क्योंकि हमारे बीच पहले से बहुत अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों अपने वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 120 अरब डालर से भी और आगे बढ़ाना चाहेंगे और इसे शानदार अवसर के रूप में देखेंगे। केनेडी ने कहा, मुझे लगता है कि हमारे बीच सुरक्षा संबंध बहुत व्यापक हैं और इनमें विस्तार हो रहा है। साझा हितों और मूल्यों को देखते हुए कई मायनों में हमारे संबंध बढ़ेंगे। मुझे भरोसा है कि हम आगे भी अच्छे संबंध बनाए रखेंगे।

नीदरलैंड के राजदूत मार्टेन वेन डेन बर्ग ने कहा कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान भारत के साथ बेहतर निवेश और व्यापार संबंधों के लिए नीदरलैंड अच्छा सहयोग करना जारी रखेगा। हमारे मोदी सरकार के साथ बहुत अच्छे और करीबी संबंध हैं। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे संबंध हैं। हमने भारतीय कंपनियों को नीदरलैंड के कारोबारी इकाइयों से जोड़ने वाले आर्थिक मुद्दों पर बहुत बारीकी से काम किया। बर्ग ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हम नीदरलैंड और भारत के बीच निवेश और व्यापार संबंधों को बढ़ाने के लिए इस अच्छे सहयोग को जारी रखेंगे।

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