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अमेरिका में मंदी की आहट से दुनिया में लाखों नौकरियां खत्म होने का खतरा

कोरोना महामारी और फिर रूस-यूक्रेन से बढ़ी महंगाई का असर सिर्फ भारत पर ही नहीं, बल्कि दुनिया की इकलौती महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका पर भी इस समस्या से जूझ रहा है। वहां इन दिनों महंगाई का स्तर पिछले 40 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए बाइडेन प्रशासन ने ब्याज दरें बढ़ाने का कदम उठाया है। बड़े कारोबारियों और आर्थिक जानकारों का मानना ​​है कि इस कदम से महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी, लेकिन पैसे की पहुंच कम होने से अमेरिका और दुनिया में वैश्विक आर्थिक मंदी के फैलने का खतरा रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों में से एक नैस्डैक की सीईओ एडेना फ्रीडमैन का कहना है कि अभी मंदी शुरू नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से इसकी चर्चा हो रही है, उससे लोगों के मन में संदेह गहरा सकता है। जिससे व्यावसायिक गतिविधियों को झटका लगेगा और यह ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन की शुरुआत का एक बड़ा कारण बन सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स भी मंदी के संकेतों से चिंतित हैं। उनका कहना है कि कोरोना की वजह से पिछले 2 साल पहले भी दुनिया की अर्थव्यवस्था धीमी गति से चल रही थी। अब रूस-यूक्रेन युद्ध ने अपना सही काम किया है। इस युद्ध के कारण दुनिया में कई जरूरी चीजों की कमी हो गई है, जिससे महंगाई का स्तर बढ़ गया है। इस महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनिया के कई देशों ने अपनी ब्याज दरों में इजाफा किया है। इससे दुनिया में वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है।

अमेरिका के पूर्व वित्त मंत्री लॉरेंस समर्स भी इसी तरह की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब भी बेरोजगारी दर 4 फीसदी से कम और महंगाई दर 4 फीसदी से ज्यादा होती है तो दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ जाती है। इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही हो रही है। अमेरिका ने इन दोनों मानकों को पार कर लिया है। ऐसे में अमेरिका में अगले 2 साल तक आर्थिक मंदी आ सकती है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

गोल्डमैन सैक्स के वरिष्ठ अध्यक्ष लॉयड ब्लैंकफिन ने एक साक्षात्कार में बताया कि उन्होंने आर्थिक मंदी के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि इसमें जोखिम है लेकिन फेडरल रिजर्व बैंक चाहे तो इसे नियंत्रित कर सकता है। इसके लिए उसे ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी को वापस लेना होगा। साथ ही व्यावसायिक गतिविधियों पर ऋण की सुविधा को भी आसान बनाना होगा।

जापान के निवेश बैंक नामुरा ने भी अमेरिका में आर्थिक मंदी की आशंका जताई है। बैंक का कहना है कि इस साल के अंत तक अमेरिका में मंदी शुरू हो सकती है, जिसका असर न सिर्फ अमेरिका बल्कि भारत-चीन समेत दुनिया के तमाम देशों पर पड़ सकता है। साल 2008 में भी ऐसी ही आर्थिक मंदी आई थी, जिससे दुनिया में मांग काफी कम हो गई थी। इससे लोगों को बड़े पैमाने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ा और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।

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