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#MeToo , कार्यक्षेत्र में यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं की लामबंदी

हैशटैग ‘MeToo’ पिछले दिनों सोशल मीडिया में बहुत तेजी से ट्रेंड कर रहा था। MeToo एक अनोखी पहल थी जिसने पूरी दुनिया का ध्यांन अपनी तरफ खींचा साथ ही ये भी बता दिया कि महिलाओं का संगठित होना अपने आपमें एक बहुत प्रभावशाली सशक्ति्करण है।

अक्टू बर 2017 में सोशल मीडिया में अचानक एक हैशटैग ट्रेंड करने लगा। MeToo नाम से शुरू ये हैशटैग धीरे-धरे एक अंतरराष्ट्री य आंदोलन के रूप में बदल गया। वास्तरव में इस हैशटैग की शुरूंआत तराना ब्रुक ने 2006 में अमेरिका में की थी। तराना एक सोशल वर्कर है और उन्हों ने एक मिशन के तहत इस फ्रेज का इस्तेोमाल किया। उनकी योजना MeToo के जरिए सहानुभूतिपूर्ण तरीके से यौन उत्पीोडन का शिकार हुई महिलाओं की मदद करना था। लेकिन जब मशहूर अभिनेत्री एलाइजा मिलानो ने इसे एक बार फिर इस्तेिमाल किया तो उनकी मंशा कुछ और ही थी। उन्होंहने ट्वीट किया कि ‘अगर ऐसी हर एक महिला जो कि यौन उत्पीोड़न का शिकार हुई है अपने स्टेकटस में MeToo लिख ले तो बाकी दुनिया को यह पता चल जाएगा कि यह समस्याि किस हद तक हमारे समाज में फैली हुई है’।

इस तरह से लगभग एक दर्जन भाषाओं में यह मुहिम आगे बढ़ी और दुनिया के कई देशों में महिलाओं को संगठित कर यौन उत्पी ड़न विशेष कर कार्यक्षेत्र में हो रहे यौन उत्पीाडन के खिलाफ आवाज बुलंद की गई।

दुनिया के किसी भी कोने में महिलाएं पूर्ण रूप से सुरक्षित कहीं भी नहीं हैं और कई बार यौन उत्पीेड़न कुछ इस तरह से होता है कि चाह कर भी उसे बता पाना या अपराधी को सजा दिला पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। कारण साफ है कि बड़ी इंडस्ट्री में ऐसे अपराध को संगठित तौर पर किया जाता है। ऐसे में महिलाओं का इस तरह से लामबंध होना पूरे विश्वं के लिए अच्‍छे संकेत हैं।

महिलाओं के खिलाफ हो रहे ऐसे अपराध के मामले में हमारा देश भी पीछे नहीं है। यहां पर इंडस्ट्री चाहे कोई भी हो महिलाओं को अवसर देने के बहाने उनका शोषण करने के कई किस्से समय समय पर बाहर आते रहे हैं। राजनीति से लेकर व्याअपार जगत तक और खेल से लेकर बॉलीवुड, टॉलीवुड में ऐसे किस्सेब सुनाई दिए हैं।

ठीक उसी समय जब पूरे विश्वक में यौन उत्पी डन के खिलाफ महिलाएं सोशल मीडिया में लामबंद हो रही थी हमारे देश में एक तमिल अभिनेत्री ‘श्री रेड्डी’ कास्टिंेग काउच के खिलाफ तरह तरह से विरोध कर रही थी। जिसे उसी की इंडस्ट्री की महिलाओं ने अकेला छोड़ दिया। इस दौरान मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का जो बयान आया उसने सबको चौंका दिया। उन्होंशने कहा कि ‘एक बात बता दूं, ये तो चला आ रहा है आदम हव्वाी के जमाने से, हर लड़की के ऊपर कोई न कोई हाथ साफ करने की कोशिश में लगा रहता है। सरकार करती है, सरकार के लोग करते हैं तो तुम फिल्म् इंडस्‍ट्री के ही पीछे क्योंस पड़े हो, वो रोटी तो देते हैं रेप करके छोड़ नहीं देते’।

यह सुनने में वाकई भयावह था लेकिन बयान के बाद सरोजखान को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंडने अपने बयान के लिए क्षमा भी मांगी। लेकिन इंडस्ट्री में रज-बस चुकी इस मानसिकता का गलत असर आने वाली पीडि़यों में जरूर पड़ेगा जब वो रोटी की शर्त पर अपना शोषण स्वीबकार कर ले।

खैर विदेश में चली मुहिम MeToo ने एक संदेश भी दिया। हॉलीवुड की जानी मानी हस्तीा निर्माता हार्वी वेंनस्टेअन जिन्हेंं उनकी फिल्मा के लिए ऑस्कएर तक मिल चुका है, वह हॉलीवुड की कई बड़ी संस्थारओं में शामिल रहे हैं को इस मुहिम के बाद अपने सभी पदों से तो हाथ धोना ही पड़ा। वेनस्टेीन पर यह आरोप एलाइजा मिलानों ने लगाए। इसके बाद तो एक के बाद एक लोगों का तांता लग गया। जिसके बाद कई नामचीन लोगों को अपने पद और प्रतिष्ठाा से हाथ धोना पड़ा। इस चीज को ग्लोलबल मीडिया ने ‘वेनस्टेीन इफेक्टग’ कहा गया।
विदेशों में जहां जहां भी महिलाओं ने हिम्मोत दिखाई और संगठित होकर किसी व्य क्ति का नाम लिया उसे समाज ने अपने आप ही सजा दे दी। महिलाओं की इस हिम्मगत ने कानून के दायरों से अलग एक बिल्कुमल नई शैली से महिलाओं को शोषण करने वालों को सजा दी और उन्हेंम अपना सामाजिक मान-सम्मा्न और प्रतिष्ठाु खो देनी पड़ी। ऐसे में महिलाओं को कंधे से कंधा मिलाकर पूरे सम्मांन के साथ काम करते हुए देखने की तमन्नाा रखने वाला हर भारतीय व्य क्ति देश की महिलाओं से पूछ रहा है कि वह कब कहेंगी #MeToo.

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