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लंदन बना भारत विरोधी संगठनों का केंद्र

भारत में लंबे अर्से तक शासन कर चुके ब्रिटेन में इन दिनों कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन जारी हैं। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर रियासत के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने जिस विलय संधि में हस्ताक्षर किए थे, उस पर ब्रिटिश हुकुमत के अंतिम वायसराय और आजाद भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बार्ड माऊटबेंटन के भी हस्ताक्षर हैं। लंदन स्थित इंडियन हाई कमिशन के सामने दक्षिण एशिया के अप्रवासी नागरिकों ने आज, 16 अगस्त के दिन प्रदर्शन कर इस अनुच्छेद को हटाए जाने का विरोध किया। इस प्रदर्शन को ब्रिटेन की कश्मीर काउंसिल ने आयोजित किया जिसमें बड़ी संख्या में खालिस्तान समर्थक सिख समूह भी शामिल हुए। भारी नारेबाजी करते इन प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार के इस कदम को जुल्म करार देते हुए इसे पूरी तरह से गैरकानूनी भी बताया। स्काॅटलैंड यार्ड पुलिस बल के जवानों की सतर्क निगाह में हुए इस धरने-प्रदर्शन का काऊंटर लंदन में रह रहे अप्रवासी भारतीयों ने जोरदार तरीके से जश्ने आजादी मना कर किया।

यह प्रदर्शन भी भारतीय उच्चायोग के सामने आयोजित किया गया। इसमें शामिल प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार के इस कदम को ‘प्रोग्रेसिव एक्शन’ करार देते हुए उम्मीद जताई है कि अब जम्मू-कश्मीर में डेवलपमेंट के नए रास्ते खुलेंगे। ब्रिटेन के कई अन्य शहरों में भी कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ इन दिनों प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। खाड़ी के देश बहरीन में 12 अगस्त को पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा भारत के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने से नाराज बहरीन सरकार ने ऐसे प्रदर्शनकारियों को कुछ समय के लिए गिरफ्तार भी किया।

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