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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट कैसे बन रहा है कूड़े का पहाड़?

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट कैसे बन रहा है कूड़े का पहाड़?

हिमालय के शीर्ष माउंट एवरेस्ट पर दिन-प्रतिदिन कूड़े का अम्बार लगता जा रहा है। बर्फ की सफेद चादर ओढ़े दुनिया के सबसे बड़े इस शिखर पर्वत पर इतनी गंदगी फैलने की वजह यहां बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों का इजाफा होना है। हाल ही में नेपाल सरकार ने एवरेस्ट समेत हिमालय की पांच अन्य चोटियों से लगभग 35 हजार किलोग्राम कचरा हटाने की योजना बनाई है। इस काम में सेना को लगाया जाएगा। इसमें 75 लाख डॉलर का खर्च आने का अनुमान है।

पिछले साल सेना ने इस क्षेत्र से दस हजार किलो कचरा हटाया था, लेकिन नेपाल में सरकार की इस योजना का यह कहते हुए विरोध हो रहा है कि सेना के माध्यम से यह योजना सफल नहीं हो सकती। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को रिकॉर्ड 24 बार फतह करने वाले कामी रीता शेरपा कहते हैं कि सेना के पास ऊंची चोटियों पर पहुंचने की दक्षता नहीं है। नेपाल के जाने-माने शेरपा का कहना है कि सेना ने कम ऊंचाई वाले इलाकों से ही कचरा हटाया। अधिक ऊंचाई से कचरा हटाना है, तो इस काम के लिए हमारा इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए हमें उचित पैसा भी दिया जाना चाहिए।

नेपाल सरकार की योजना है कि एवरेस्ट, ल्होत्से, पुमोरी, अमादब्लम, मकालू, धौलागिरी चोटियां हर साल दुनियाभर के पर्वतारोहियों को आकर्षित करती हैं। पर्वतारोही चढ़ाई के अभियान में इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीजन और खाना पकाने वाली गैस के खाली सिलेंडरों, पर्वतारोहण के साजो-सामान और अन्य कचरे को वहीं छोड़ देते हैं। इन चोटियों पर चढ़ना काफी मुश्किल होता है। हर साल बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है पिछले वर्ष 2019 में एवरेस्ट पर 11 लोगों की मौत हुई थी, इनमें से कई के शव पहाड़ों पर ही रह जाते हैं। सफाई अभियान के तहत इन शवों को भी लाया जाएगा, लेकिन ऊंची जगहों से चीजों को नीचे लाना आसान काम नहीं होता। कई बार तो सामान, शव और कचरा दशकों तक बर्फ के नीचे दबे रह जाते हैं।

21 बार एरवरेस्ट फतह कर चुके शेरपा कामी रीता कहते हैं, ‘पहाड़ों को नापने वाले शेरपा ही चोटियों को साफ करने के काम के लिए सही रहेंगे। सरकार को यह ध्यान में रखना चाहिए। नेपाल की सेना के प्रवक्ता बिज्ञान देव पांडे ने कहा कि वह आश्वस्त हैं कि उनकी टीम इस साल चलने वाले सफाई अभियान के तहत ऊंचे इलाकों तक पहुंचेगी और यह अभियान पांच जून तक खत्म हो जाएगा। ‘हम अपनी गलतियों से सीख रहे हैं और ऊंची जगहों पर जाकर पहाड़ों को साफ करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।’

नेपाल की सरकार ने भी कुछ ऐसे कदम उठाए हैं ताकि लोगों को कचरा न फैलाने के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्हें 400 डॉलर जमा करवाने के लिए कहा जाता है और फिर यह रकम तभी लौटाई जाती है जब वे अपना कचरा वापस लेकर आते हैं। लेकिन शेरपा कहते हैं कि यह काम आसान नहीं है। शेरपा कामी रीता नेपाल माउंटेनीयरिंग एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी हैं। उनका कहना है कि खाली सिलेंडरों या शवों को ऊंचाई पर स्थित कैंपों से नीचे तक लाना बहुत ही मुश्किल होता है। इस काम के लिए शेरपा ऐसा करने के लिए कई बार अपनी जिंदगी दांव पर लगा चुके हैं। बर्फ में जमे हुए अधिकतर शवों का वजन 150 किलोग्राम से अधिक होता है, शेरपाओं के लिए उन्हें नीचे तक लाना काफी मुश्किल होता है।

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर नेपाल सरकार के दो महीने के सफाई अभियान के दौरान वहां से 11000 किलोग्राम कूड़ा और चार शव हटाये गये। सेना के हेलीकॉप्टर एवरेस्ट के आधार शिविर से इस कूड़े को काठमांडू लाए। उनमें ऑक्सीजन के खाली सिलेंडर, प्लास्टिक की बोतलें, कनस्तर, बैटरियां, भोजन को लपेटकर रखने वाली चीजें, मानव मल और रसोई घर संबंधी शामिल हैं।

यह कार्यक्रम स्वच्छता अभियान के समापन पर आयोजित किया गया था। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी से टनों कूड़ा लाने के लिए यह अभियान चलाया गया था। माउंट एवरेस्ट कूड़े के ढेर में तब्दील हो गया था। हर साल सैंकड़ों पर्वतारोही, शेरपा और भारवाहक एवरेस्ट की तरफ जाते हैं और अपने पीछे इस सबसे ऊंची चोटी पर टनों जैविक और अजैविक कूड़ा छोड़ आते हैं। पिछले साल 2019 में भी करीब 600 से अधिक लोग इस शिखर पर्वत की छोटी तक पहुंचे। यहां जाने वाला हर पर्वतारोही अपनी सुरक्षा के पूरे इंतजाम होने के बाद ही इस पर्वत की चढ़ाई चढ़ता है। और एवरेस्ट फतह करने वाले पर्वतारोही तो सुर्खियां बटोर लेते हैं, लेकिन उनके फैलाए कूड़े का कोई भी जिक्र नहीं करता। 18 बार एवरेस्ट फतह करने वाली पेम्बा दोरजे शेरपा ऐवरेस्ट पर कूड़ा छोड़ने के खिलाफ हैं। पर्वतारोहियों की ऐसी लापरवाहियों की वजह से आज एवरेस्ट कूड़े का ढेर बनता जा रहा है।

वर्ष 2019 में 14 अप्रैल से शुरू हुए महत्वाकांक्षी स्वछता अभियान के तहत लगभग 3000 किलोग्राम कचरा हटाया गया था। इसके बाबजूद भी एवरेस्ट पर काफी कचरा फैला हुआ है। कचरे की सफाई का जिम्मा सोलुखुंबू जिले का खम्बु पासादल्हामु नगर निकाय ने उठाया है। इसका लक्ष्य एवरेस्ट से करीब 10000 किलोग्राम कचरा हटाना था। इस अभियान में नेपाल की सरकार ने तकरीबन 2 .3 करोड़ नेपाली रुपए खर्च किए थे। पर्वतारोहियों को एवरेस्ट पर भेजने वाली सस्थाओं को भी इसे सुरक्षित रखने की पहल करनी चाहिए। चढ़ाई से पहले उन्हें स्वछता को लेकर कड़े निर्देश देने की जरुरत है। और जंग फूड या पैकिंग फूड के बजाए दूसरे विकल्पों पर विचार करना चाहिए। इसको लेकर सख्त नियम बनाए जाने की जरूरत है ताकि पर्वतारोही कचरा फेंकना बंद कर दें।

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