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यौन और लिंग हिंसा से थर्राया केन्या

सड़कों पर उमड़ा जनसमूह

अफ्रीकी महाद्वीप के पूर्वी तट पर स्थित देश केन्या इन दिनों यौन और लिंग हिंसा की चपेट में है। हालात इतने विकट हैं कि जनता को सड़कों पर उतर सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ रही है। गत् 27 जनवरी को महिलाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी तादात में पूरे देश भर में धरने-प्रदर्शन कर लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। केन्या की राजधाानी नैरोबी में प्रदर्शनकारी उन 14 महिलाओं की तस्वीरों वाली टी-शर्ट पहन सड़कों में उतर आए जिनकी बीते दिनों नृशंस हत्या कर द गई थी।

गौरतलब है कि केन्या में बीते कुछ वर्षों से महिलाओं के प्रति हिंसा में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2016 से दिसंबर 2023 तक करीब पांच सौ महिलाओं की हत्या की जा चुकी है। नव वर्ष के प्रथम माह में ही दो महिलाओं की हत्या बाद पूरे देश में भारी भय और आक्रोश का माहौल बनने लगा था। इन दो महिलाओं की लाशें एक होटल में पाई गई थी। जिसके बाद देश भर में लोग ‘हमें मारना बंद करो’ के नारे लगाते हुए सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे हैं। उनकी मांग है कि सरकार ऐसे मामलों के लिए तत्काल न्याय प्रणाली में बदलाव करें ताकि इन मामलों की सुनवाई तेज गति से हो और अपराधियों को सजा सुनाई जा सके। केन्या में न्याय व्यवस्था में भारी विसंगतियां हैं तथा लंबे समय से न्यायालयों में न्यायधीशों के पद भारी तादात में रिक्त पड़े हैं। कानून व्यवस्था को लेकर केन्या की स्थिति लंबे समय से खराब चली आ रही है। यहां की पुलिस पर सामान्य आरोप है कि वह गंभीर अपराधों तक के मुकदमें दर्ज नहीं करती है और उसके कई अधिकारियों का माफिया संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंध है।

विश्व अपराध इंडेक्स में केन्या को 16 सबसे अधिक अपराध वाले देशों में शुमार किया गया है। यहां सबसे अधिक कार चोरी की घटनाएं होती है। 2007 में दो अमेरिकी पर्यटकों को कार लूटेरों ने जान से मार डाला था। तभी से प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण इस देश में विदेशी पर्यटकों को आने में भय महसूस होने लगा है। विश्व के सबसे भ्रष्टतम देशों में शामिल केन्या में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी को रोक पाने में सरकार की नाकामी चलते आम जनता राष्ट्रपति विलियम रूटो से बेहद निराश और नाराज हो चली है। सितंबर 2022 में राष्ट्रपति बने रूटो की लोकप्रियता तेजी से कम होने लगी है। ऐसे में यदि राष्ट्रपति महिलाओं की रक्षा कर पाने में सफल नहीं रहते हैं तो उनकी सरकार का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

विवादित छवि के हैं रूटो
पेशे से शिक्षक रह चुके विलियम रूटो खासे विवादित राजनेता हैं। 1997 में केन्या की संसद के सदस्य चुने गए रूटो 2002 में देश के सहायक गृह मंत्री बनाए गए थे। वे बाद के वर्षों में केन्या के कृषि तथा शिक्षा मंत्री भी रहे। 2013 में उपराष्ट्रपति बने रूटो सितंबर 2022 तक इस पद पर बने रहे। 13 सितंबर 2022 को वे केन्या के पांचवें राष्ट्रपति चुने गए थे। रूटो की गिनती देश के भ्रष्ट राजनेताओं में की जाती है। उन पर जमीन घोटालों से जुड़े कई आरोप और मुकदमें पूर्व में दर्ज कराए गए थे।

दिसंबर 2010 में अंतरराष्ट्रीय
आपराधिक न्यायालय ने रूटो को एक मामले में सम्मन भी जारी किए थे। उन पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के खिलाफ अपराधिक षड्यंत्र करने सरीखे गंभीर आरोप लगाए गए थे। 2016 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इस मामले को बंद कर दिया था।

निजीकरण के समर्थक हैं राष्ट्रपति

रूटो ने गत् वर्ष राष्ट्रपति बनने के बाद देश की गिरती अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए बड़े स्तर पर सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने की शुरुआत की। नवंबर 2022 में अपनी सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना ‘हस्टलर फंड’ को शुरू कर आर्थिक तंगी से त्रस्त नागरिकों को आसान शर्तों पर ऋण दे राहत पहुंचाने में सफल रहे राष्ट्रपति रूटो लेकिन अपराध पर नियंत्रण लगा पाने में सफल नहीं रहे हैं। महिलाओं और विदेशी पर्यटकों पर बढ़ रहे हमलों ने केन्या की छवि को बिगाड़ने का काम किया है। देश भर में इस हिंसा के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के चलते न केवल राष्ट्रपति की लोकप्रियता में गिरावट आई है बल्कि उनकी सरकार की विश्वसनियता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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