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ब्रिटिश अदालत से जूलियन असांजे को राहत, जाते-जाते ट्रंप भी कर सकते हैं माफ

ब्रिटिश कोर्ट द्वारा विकिलीक्स वेबसाइट के संस्थापक जूलियन असांजे के मामले में सुनाए गए फैसले से दुनियाभर के मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थकों को बेहद खुशी का अनुभव हो रहा है।  ब्रिटेन की अदालत ने असांजे की मानसिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्हें अमेरिका डिपोर्ट करने से मना कर दिया है। हालांकि इसके बाद भी असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित कराने के प्रयासों पर पूर्ण विराम नहीं लगा है। ब्रिटेन की कोर्ट की ओर से फिलहाल असांजे की मानसिक स्थिति के मद्देनजर प्रत्यर्पण की अमेरिकी अर्जी को ठुकरा दिया गया है।

न्यायाधीश ने स्वास्थ्य आधार पर प्रत्यर्पण से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका में कठोर परिस्थितियों के दौरान 49 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई की भी मौत होने की आशंका है। न्यायाधीश ने 6 जनवरी, बुधवार को कहा कि असांजे के “फरार होने का खतरा है” और यह मानने के वाजिब कारण हैं कि वह रिहाई के लिए अदालत नहीं लौटेंगे।

पक्ष में मानवाधिकार कार्यकर्ता और राजनीतिक संगठन

गौरतलब है कि महीनों से ही असांजे के पक्ष में मानवाधिकार कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में राजनीतिक संगठन मुहिम के जरिए अपनी आवाज सरकार तक पंहुचा रहे थे। कुछ समूहों द्वारा तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से असांजे को क्षमादान देने की अपील भी की गई थी। लेकिन ट्रंप ने आरंभिक संकेत देने के बावजूद ऐसा नहीं किया। ताजा फैसला असांजे के मामले में ओल्ड बेली के डिस्ट्रिक्ट जज ने दिया। लेकिन इस बीच चर्चा है कि ब्रिटेन कोर्ट के इस फैसले पर अमेरिका अपील करेगा। जिसके बाद ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में मामले की पूरी सुनवाई का मार्ग साफ हो जाएगा। वहां कई ऐसे तकनीकी पहलू उठ सकते हैं, जिसमें असांजे के बचाव पक्ष को दिक्क़ते आ सकती हैं।

बिडेन के शपथ लेने से पहले अमेरिका छोड़ देंगे ट्रंप !

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सुप्रीम कोर्ट में हार हुई तो असांजे के बचाव पक्ष के वकीलों के पास मात्र एक विकल्प रह जाएगा कि वह मामले को यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स के पास ले जाए। क्योंकि इस कोर्ट के फैसले आमतौर पर मानवाधिकारों के पक्ष में होते आए हैं। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में अगर असांजे को जीत मिली तो उनकी रिहाई का रास्ता खुल जाएगा। लेकिन संदेह हैं कि इसके बावजूद भी अमेरिका अपने वर्चस्व और पॉवर का इस्तेमाल कर दुनिया या यूरोप में उनकी मुक्त आवाजाही के रास्ते में बाधाएं खड़ी कर सकता है।

मानवाधिकार संगठन लंबे समय से कर रहे हैं असांजे को माफी देने की अपील

मेक्सिको के राष्ट्रपति आंद्रे मैनुएल लोपेज ओब्रादोर की ओर से ब्रिटेन का फैसला आते ही असांजे को अपने देश में शरण देने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि वे अपने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से ब्रिटेन से संपर्क करने को कहेंगे, ताकि असांजे की रिहाई की संभावना का पता लगाया जा सके। अगर उनकी रिहाई हो जाती है, तो उन्हें मेक्सिको में शरण दे दी जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि कई और देश भी असांजे को पनाह दे सकते हैं। ऐसे प्रस्ताव ज्यादातर लैटिन अमेरिकी देशों की ओर से आ सकते हैं। गौरतलब है कि असांजे ने लगभग छह साल तक लंदन स्थित इक्वाडोर के दूतावास में पनाह ले रखी थी।

असांजे समर्थकों को आशंका है कि जैसे ही अमेरिका में जो बिडेन आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति बन जाएंगे तो विकिलीक्स मामले में अमेरिका की नीति और ज्यादा सख्त हो जाएगी। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि 2010 में जो बाइडन ने असांजे को हाई टेक आतंकवादी बताया था। उस समय बाइडन उप राष्ट्रपति के पद पर थे। ऐसे मामलों में ट्रंप की नीति काफी नरम रही है। इसलिए अटकलें लगाई जा रही हैं कि राष्ट्रपति पद से हटने से पहले बचे समय में शायद असांजे को क्षमादान दे दें। अब ट्रंप के लिए ब्रिटिश कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें माफी देना और भी आसान हो गया है।

दो साल से चल रहा है ब्रिटेन की अदालत में असांजे के प्रत्यर्पण का मामला

असांजे ने 2006 में विकीलीक्स वेबसाइट बनाई। 2007 से, उन्होंने अमेरिका और कई अन्य देशों से गोपनीय दस्तावेजों को जारी करना शुरू कर दिया। इसने दुनिया में बहुत चर्चा पैदा की। इसने अमेरिकी सरकार के लिए बहुत असहज स्थिति पैदा कर दी। अमेरिका की पहल पर उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था। असांजे ने इसके बाद लंदन के इक्वाडोरियन दूतावास में शरण ली। इसके कारण ब्रिटेन और इक्वाडोर के बीच कूटनीतिक टकराव हुआ।

2019 में यह गतिरोध दूर हो गया जब इक्वाडोर ने असांजे को दी गई राजनीतिक शरण को समाप्त कर दिया। वह तब से ब्रिटेन की हिरासत में है। तब से उनके खिलाफ ब्रिटिश अदालत में प्रत्यर्पण का मामला चल रहा था। इस मामले में असांजे एक बिंदु पर जीत गए हैं। लेकिन यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। उन पर अभी भी प्रत्यर्पण की तलवार लटक रही है।

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