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जॉर्डन के प्रिंस हमजा ने त्यागी शाही जिंदगी

  •      वृंदा यादव, प्रशिक्षु

जॉर्डन के पूर्व क्राउन प्रिंस हमजा बिन अल-हुसैन ने गत् 6 अप्रैल को अपने राजशाही पद को छोड़ देने की घोषणा की है। इन्हें अप्रेल 2021 से ही कथित रूप से भ्रष्टाचार के आरोप में नजरबंद करके रखा गया था। दरअसल ‘हमजा’ किंग हुसैन एवं उनकी एक पत्नी क्वीन नूर के सबसे बड़े बेटे और किंग अब्दुल्ला के सौतेले भाई हैं। 1999 में हुसैन की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे अब्दुल्ला जॉर्डन के राजा बने 2004 में अब्दुल्ला ने हमजा को उत्तराधिकारी बनाने का ऐलान किया, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया। इस पूरी कहानी को समझने के लिए जॉर्डन की शासन व्यवस्था का ज्ञान होना बहुत जरूरी है।

जॉर्डन की शासन व्यवस्था
किंगडम ऑफ जॉर्डन मीडिल-ईस्ट का एक छोटा-सा देश है। जॉर्डन में कई विदेशी साम्राज्यों ने शासन किया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1922 में यह ब्रिटिश के कब्जे में आ गया और 1946 तक यह ब्रिटिश का ही गुलाम रहा। इसी वर्ष 22 मार्च को इसे ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त हुई। आज़ादी के बाद यहां संवैधानिक राजतंत्र की शुरुआत हुई और ‘अब्दुल्ला बिन अल-हुसैन’ आजाद जॉर्डन के सबसे पहले राजा बने, इनके बाद इनके बड़े पुत्र ‘तलाल’ ने सत्ता संभाली, इन्हें गद्दी से हटाने के बाद ‘किंग हुसैन’ ने सत्ता संभाली और 46 वर्षों तक राज किया। 1999 में किंग हुसैन की सेहत बहुत खराब हुई और वह काफी बीमार पड़ गए। तब उन्होंने अपना क्राउन प्रिंस अपने बड़े बेटे ‘अब्दुल्ला’ को बना दिया। इससे पहले किंग हुसैन ने अब्दुल्ला को इस पदवी से हटा कर अपने छोटे भाई को क्राउन प्रिंस बनाया था। अपने खराब सेहत के दौरान उन्होनें एक चिट्ठी लिखी जिसमें उन्होंने अपने भाई के प्रति नाराजगी के कारणों को बताते हुए उन्हें क्राउन प्रिंस से हटा अपने पुत्र अब्दुल्ला को दोबारा इस पर बैठा दिया। किंग हुसैन के बाद अब्दुल्ला जॉर्डन के राजा बनने तक उन्होंने अपने छोटे सौतेले भाई ‘हमजा’ को क्राउन प्रिंस बनाया पर इसके 5 साल बाद 2004 में अब्दुल्ला ने हमजा से ये कहते हुए कि ‘इस पद की वजह से तुम कुछ जरूरी जिम्मेदारियां नहीं उठा पा रहे हो जॉर्डन को तुम्हारी जरूरत है, इसलिए मैंने तुम्हें क्राउन प्रिंस के पद से हटाने का फैसला किया है। आशा है तुम राजा के प्रति वफादार बने रहोगे’ यह पद छीन लिया और कुछ समय बाद अपने बेटे हुसैन को क्राउन प्रिंस बना दिया।

हमजा का शाही पहचान त्यागने का कारण?
पिछले वर्ष हमजा को भ्रष्टाचार और राजतंत्र के खिलाफ आरोप लगाने के जुर्म में नजरबंद कर दिया गया, और उनसे सारी शाही शक्तियां छीन ली गई। इस खबर ने जॉर्डन की सत्ता और देश को हिला कर रख दिया था। हमजा के साथ ही वहां के कुछ पूर्व मुख्य सलाहकारों को भी जेल में डाल दिया गया। क्योंकि अब्दुल्ला को शक था कि ये सलाहकार हमजा को सत्ता में लाने का प्रयास कर रहें हैं। जॉर्डन के प्रधानमंत्री उमर रज्जाज़ ने भी कहा था कि ‘प्रिंस हमजा जॉर्डन की सुरक्षा और स्थिरता के खिलाफ काम कर रहे थे। इसलिए उन्हें अरेस्ट किया गया है।’ अब हमजा ने कुछ दिन पहले ही अपने राजशाही पद को त्याग दिया। उन्होंने अपने निजी ट्विट हैंडल से एक ट्विट कर कहा है कि ‘मैंने अपना खिताब इसलिए छोड़ दिया क्योंकि मेरे मूल्य, हमारे संस्थानों के दृष्टिकोण, प्रवृत्तियों और आधुनिक तरीकों के अनुरूप नहीं हैं।’ माना जा रहा है की यह राजपरिवार के आपसी तनाव का नतीजा है जो तमाम प्रयासों के बाद भी कम नहीं हो रहा है।

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