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जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्सीन पर होगा वार्निंग लेबल !  

जॉनसन एंड जॉनसन

अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अमेरिका में जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन को लेकर एक चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि वैक्सीन ने गुइलेन-बैरे सिंड्रोम, एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार के जोखिम को काफी बढ़ा सकती है। एफडीए की चेतावनी के बाद वैक्सीन को बड़ा झटका लगा है। यह पहली बार नहीं है जब जॉनसन के टीके पर सवाल उठाया गया है। पहले भी खून के थक्के जमने की शिकायत हो चुकी है। इसलिए अब FDA द्वारा वैक्सीन पर वार्निंग लेबल जोड़ा जा रहा है।

अब तक इस बीमारी के 100 संदिग्ध मामले

विशेषज्ञ एक रिपोर्ट में कहते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका में सामान्य आबादी की तुलना में जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन प्राप्तकर्ताओं में इस प्रकार की स्थिति विकसित होने की संभावना कम है। अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने टीका लगाने वालों में गुइलेन-बार सिंड्रोम के 100 मामले पाए हैं।

FDA ने प्रदान की विशेष जानकारी

उनका कहना है कि इनमें से 95 फीसदी मामलों को गंभीर माना जाता है। उन्हें भर्ती करने की जरूरत है। संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 1.28 मिलियन लोगों, या आबादी के 8 प्रतिशत लोगों को जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन का टीका लगाया गया है। इसके अलावा 146 मिलियन लोगों को फाइजर और मोर्दाना के टीके लगाए जा चुके हैं।

जानें कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम क्या है?

एफडीए के अनुसार, गुइलेन-बैरे सिंड्रोम तब होता है जब प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इससे मांसपेशियों में कमजोरी आती है और कभी-कभी लकवा भी हो जाता है। यह समस्या अमेरिका में 10 लाख लोगों में से 10 में देखी जाती है। ये लोग गंभीर लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं और एक साथ इस स्थिति से बाहर आ रहे हैं। इससे पहले अप्रैल में प्लेटलेट्स के साथ खून के थक्के जमने की समस्या हुई थी और उन्हें इसके बारे में चेतावनी दी गई थी।

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