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जाॅनसन की चुनावी चुनौती

  • जीवन सिंह टनवाल
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जाॅनसन के लिए देश का आगामी आम चुनाव एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। उनके लिए परीक्षा की अहम घड़ी है कि ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग करने यानी ब्रेग्जिट के मसले पर वह जनता का समर्थन हासिल कर पाते हैं या नहीं। जाॅनसन ने जुलाई में अल्पमत सरकार का कामकाज संभाला था, लेकिन देश को यूरोपीय संघ से अलग करने में वे असमर्थ रहे थे। अब यही चुनौती उनके सामने है कि वे 12 दिसंबर को होने वाले आम चुनाव में कैसे जनता का विश्वास हासिल कर पाते हैं। आम चुनाव को लेकर ब्रिटेन में इन दिनों जबर्दस्त राजनीति घमासान चल रहा है। राजनीतिक पार्टियां अपने- अपने मुद्दे उछालकर जनता को लुभाने की कोशिशें कर रही हैं। इसी जोर आजमाइश के बीच प्रधानमंत्री बोरिस जाॅनसन ने कंजर्वेटिव पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया, जिसमें ब्रेग्जिट को प्रमुख स्थान दिया गया है। विपक्षी लेबर पार्टी ने अपने घोषणा पत्र मंे जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए भारत से माफी मांगने की बात कही है।
ब्रिटेन के वेस्ट मिडलैंड में एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री जाॅनसन ने वादा किया कि उनकी सरकार आने पर वैट, इनकम टैक्स और राष्ट्रीय बीमा की दरों में वृद्धि नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, दूसरी पार्टियों के विपरीत हम इस चुनाव में ब्रेग्जिट डील करने के लिए हैं। जाॅनसन ने 59 पेज का मेनिफेस्टो जारी करते हुए कहा कि पार्टी नए संसद में ब्रिटेन को रहने, सांस लेने, बच्चों को बड़ा करने और बिजनेस करने के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन स्थान बनाएगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वे विपक्षी दलों लेबर पार्टी के जेरेमी कार्बिन और स्काटलैंड फस्र्ट सेक्रटरी निकलो स्टुरजन के बीच गठबंधन सरकार न बनने दें। उन्होंने आम चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए ब्रेग्जिट और मितव्ययिता जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया है। जाॅनसन ने इससे पहले एक रैली के दौरान कहा कि मैं अपना घोषणा पत्र मतदाताओं के साथ साझा करने के लिए उत्सुक हूं। हमारे पास जनमत संग्रह का सम्मान करने वाली स्पष्ट योजना है। हम इस पर आगे बढ़ेंगे और प्रत्येक व्यक्ति और उसके परिवार को लाभ पहुंचाने में अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।
 ब्रिटेन के विपक्षी दल लेबर पार्टी ने आम चुनाव के लिए जारी अपना घोषणा पत्र में देश के औपनिवेशिक अतीत का लेखा- जोखा प्रस्तुत करने की शपथ लेने के साथ 100 साल पहले अमृतसर में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए भारत से माफी मांगने की बात कही है।  लेबर पार्टी के नेता जेरमी कोर्बिन ने इट्स टाइम फाॅर रियल चेंज नाम से ही 107 पन्नों का घोषणा पत्र जारी किया है। जिसमें जलियांवाला बाग हत्याकांड पर माफी मांगने का वादा किया है। घोषणा पत्र में यह भी कहा गया है कि लेबर पार्टी ब्रिटेन के अतीत में हुए अन्याय की जांच के लिए एक जज के नेतृत्व वाली समिति बनाएगी, इसके अलावा आपरेशन ब्लूस्टार में देश की भूमिका की समीक्षा भी की जाएगी।  वर्ष 2014 में ब्रिटेन के सरकारी दस्तावेजों में यह दावा किया गया था कि स्वर्ण मंदिर में हस्तक्षेप से पहले सेना को ब्रिटिश सैन्य सलाह दी गई थी। कई सालों से कुछ ब्रिटिश संगठन इस सैन्य सलाह की जांच कराने की मांग कर रहे हैं। लेबर पार्टी के घोषणा पत्र में लिखा है, कंजर्वेटिव कश्मीर, यमन और म्यांमार सहित दुनिया के सबसे अधिक दबाव वाले मानवीय संकटों को हल करने में रचनात्मक भूमिका निभाने में विफल रहे हैं और ईरान के साथ तनाव बढ़ गया है।
इससे पहले भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त डोमिनिक एस्क्विथ ने जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी पर कहा कि 100 साल पहले हुई घटना ब्रिटिश- भारतीय इतिहास में एक शर्मनाक  कृत्य है। तब उन्होंने  अमृतसर के जलियांवाला बाग पहुंचकर डोमिनिक ने ब्रिटिश काल में हुए इस नरसंहार में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। डोमिनिक ने कहा कि ब्रिटेन एक शताब्दी पूर्व हुई इस घटना पर गहरा खेद व्यक्त करता है। यह एक शर्मनाक कृत्य है। जो भी हुआ और उसकी वजह से जो पीड़ा पहुंची, उसके लिए हम दुख व्यक्त करते हैं। मैं आज खुश हूं कि ब्रिटेन और भारत 21वीं सदी की भागीदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने भी जलियांवाला बाग कांड को ब्रिटिश- भारतीय इतिहास पर एक शर्मनाक धब्बा करार दिया था। हालांकि, टेरीजा ने औपचारिक माफी नहीं मांगी थी। ब्रिटिश सरकार ने माफी क्यों नहीं मांगी? इस सवाल के जवाब में डोमिनिक ने कहा, ‘मैं जानता हूं कि यह वास्तव में एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। मैं आपसे केवल यह कहूंगा कि मैं यहां जो करने आया, उसका सम्मान करें।

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