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जिस अहम पल का पूरी दुनिया को इंतजार था, वह गुजर गया। अब उसके कदमों के निशान रह गए हैं जिसकी अपने-अपने ढंग से व्याख्या हो रही है। वह खास पल था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग की मुलाकात। अगर आप पिछले सात साल की राजनीतिक खबरों पर नजर डालें तो अंदाजा हो जाएगा कि कैसे ये दोनों राष्ट्राध्यक्ष एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलते रहे हैं। लगता रहा कि दोनों स्कड मिसाइल छोड़ रहे हैं।

कई बार ऐसा लगा मानो तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर हम पहुंच गए हैं। दुनिया का तबाह होना तय है। दोनों ही जरा भी झुकने को तैयार नहीं। लेकिन जब वे मिले तो नजारा दूसरा था। सत्तर मिनट की मुलाकात में दोनों ने परस्पर सदाशयता दिखाई। एक बार तो यह वहम हुआ कि ये दोनों कहीं भेष और मन बदलकर तो नहीं मिल रहे हैं। ये वही हैं या कोई और। किम ने कहा- ‘हमने बीती बातों को पीछे छोड़ने का फैसला किया है। दुनिया अब एक बड़ा बदलाव देखेगी।’ ट्रंप ने इसमें सुर मिलाया, बातचीत उम्मीद से कहीं बेहतर रही है, चेयरमैन किम के साथ अनोखा रिश्ता बन गया है।

सिंगापुर के सेटोसा आइलैंड पर मीटिंग के लिए किम 7 मिनट पहले ही पहुंच गए थे। 71 साल में ट्रंप और 34 वर्षीय किम लगभग बारह सेकेंड तक हाथ में हाथ लिए रहे। दोनों ने जमकर एक-दूसरे की तारीफें की। ट्रंप ने किम के कंधे पर हाथ रखकर अपनापन दिखाया। परमाणु बम परखने की बार-बार धमकी देने वाले किम ने अपने परमाणु हथियार खत्म करने की ओर कदम बढ़ाने का ऐलान किया। इसके जवाब में ट्रंप ने उत्तरी कोरिया की सुरक्षा का वादा किया।

इस बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन के बाद एक संयुक्त करार पर दस्तख्त भी किए गए। यह मसौदा परमाणु हथियारों को पूरी तरह खत्म करने के मुतल्लिक था। इस मुलाकात और संवाद के जरिए अमेरिका-उत्तरी कोरिया के दरम्यान पिछले 65 सालों से बंद बातचीत फिर से शुरू हो गई है। वर्ष 1953 में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर से लेकर बराक ओबामा तक ने उत्तर कोरिया को मनाने की कोशिश की, मगर वे नाकाम रहे। उत्तर कोरिया पिछले 33 सालों में 150 मिसाइल और 6 परमाणु परीक्षण कर चुका है। 89 मिसाइल और 6 परमाणु टेस्ट किम ने अपने सात साल के शासन के दौरान किए हैं। ऐसे में किसी शांति वार्ता के लिए मेज पर उनको बुलाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह प्रयास अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। निश्चित तौर पर यह उनका कूटनीतिक कौशल है।

सवाल है कि जो सिंगापुर में दिखा वह सुखद था। लेकिन जो दिखाई दे रहा होता है वही नहीं रहा होता। कई बार दिखाई देने वाला दृश्य सच से जुदा होता है। पूरी दुनिया में दो दिग्गजों की मुलाकात के बाद इसके निष्कर्ष की चर्चा है। मुलाकात से आखिर निकलता क्या? इस मुलाकात की सबसे बड़ी उपलब्धि तो यही है कि दोनों देशों के बीच एक सेवा का पुल बना। भविष्य में बातचीत के दरवाजे खुले। इससे इनके बीच राजनीतिक संबंध बेहतर होंगे। बेशक जो अभी फौरी तौर पर साझा समझौता हुआ है वह बहुत साफ नहीं है, लेकिन उम्मीद की जाती है कि वे आने वाले समय में बेहतर होंगे। हालांकि कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि ट्रंप के बयानों और किम की नीयत पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता। जो दिख रहा है वह सतह पर है। भीतर क्या है, वह सामने आएगा।

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