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इस्त्राइल में दो साल के भीतर ही चौथी बार आम चुनाव की संभावनाएं

इस्त्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। नेतन्याहू पर बजट में धोखाधड़ी समेत कई मामलों को लेकर भ्रष्टचार के आरोप लगे हुए हैं। 2 दिसंबर को इस्त्राइली सासंदो ने संसद भंग करने के प्राथमिक वोट के प्रस्ताव को पारित कर दिया। संसद भंग होने के बाद देश दो साल में चौथी बार आम चुनाव को देखेगा। नेतन्याहू की सत्ताधारी पार्टी लिकुड पार्टी बेनी गेंतज की ब्लू एंड व्हाइट के बीच गठबंधन भी लगभग खत्म हो गया है।  इस्त्राइल की संसद को नैसेट कहा जाता है। प्रस्ताव को विपक्ष की तरफ से पेश किया गया था। 120 सदस्यों वाले सदन में 61 वोट पक्ष में और 54 वोट विपक्ष में पड़े थे। संसद भंग के प्रस्ताव को विधान समिति के समक्ष रखा जाएगा।  जहां एक सप्ताह तक फैसला होने की संभावना है।  माना जा रहा है कि बेनी गेंतज और नेतन्याहू के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखने की संभावना है।

दरअसल कोरोना काल में जनता को एकता दिखाने के लिए दोनों पार्टियों ने आपसी गठबंधन कर सरकार बनाई थी। 36 मंत्रियों और 16 उप-मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी के साथ यह इस्त्राइल के इतिहास की सबसे बड़ी सरकार थी। इससे पहले दोनों प्रधानमंत्री पद के लिए लड़ रहे थे। लेकिन बेनी गेंतज ने नवंबर 2021 में नेतन्याहू को पद छोड़ने की शर्त पर दोनों पार्टियों के बीच समझौता हुआ था। इस प्रस्ताव पर वोटिंग रक्षा मंत्री का पद संभाल रहे बेनी गेंतज के बयान के एक दिन बाद कराई गई है, जिसमें गेंतज ने कहा था कि उनकी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट देगी। इस प्रस्ताव पर वोटिंग रक्षा मंत्री का पद संभाल रहे बेनी गेंतज के बयान के एक दिन बाद कराई गई है, जिसमें गेंतज ने कहा था कि उनकी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट देगी।

समझौते के तहत जल्द प्रधानमंत्री पद संभालने के दावेदार गेंतज ने नेतन्याहू पर अपना राजनीतिक हित साधने के लिए लगातार बजट के मुद्दे पर जनता को मूर्ख बनाने का आरोप भी लगाया था।

गेंतज ने आखिरी समय पर चुनाव से बचने का मौका भी नेतन्याहू को दिया है। उन्होंने दोनों पार्टियों के बीच हुए समझौते की शर्तों के मुताबिक दो वर्षीय बजट मंजूर करने की अपील नेतन्याहू से की है। उन्होंने कहा, यदि नेतन्याहू 23 दिसंबर तक बजट को मंजूरी दे देते हैं तो सबकुछ ठीक हो जाएगा।

बता दें कि इस्राइल को कोरोना वायरस महामारी रोकने के लिए मार्च से अब तक दो बार नेशनल लॉकडाउन घोषित करना पड़ा है, जिसके चलते देश में बेरोजगारों की संख्या 20 फीसदी हो गई है। हालांकि नेतन्याहू को अब भी देश में लोकप्रिय माना जा रहा है।

एक चुनावी पोल में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के अगले चुनाव में भी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनने की संभावना जताई गई थी, लेकिन उसकी सीटों की संख्या मौजूदा से घटने का इशारा भी किया था।

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