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इजरायल ने अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट की वैधता को नकारा, युद्ध अपराधों के आरोपों को पूरी तरह किया खारिज

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इजरायल सरकार ने कहा कि वह फिलिस्तीनी क्षेत्रों में संभावित युद्ध अपराधों की अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) की जांच को औपचारिक रूप से खारिज कर देगा। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा गुरुवार को जारी एक बयान के हवाले से कहा कि इजरायल औपचारिक रूप से आईसीसी की एक अधिसूचना का जवाब देगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि वह जांच में सहयोग नहीं करेगा। बयान के अनुसार, “यह पत्र स्पष्ट कर देगा कि आईसीसी के पास जांच करने के लिए अधिकार क्षेत्र की कमी है और इजराइल खुद जांच करने में सक्षम है।” इजराइल ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ यहूदी राज्य द्वारा किए गए संभावित युद्ध अपराधों के आरोपों को ‘पूरी तरह से खारिज’ कर दिया।

फरवरी में, आईसीसी में न्यायाधीशों के एक पैनल ने फैसला किया कि ट्रिब्यूनल के पास पश्चिमी बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी येरूसेलम में इजरायल द्वारा संभावित युद्ध अपराधों की जांच करने का अधिकार क्षेत्र है। हमास और इस्लामिक जिहाद जैसे फिलिस्तीनी प्रतिरोध समूह भी जांच के दायरे में होंगे और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और युद्ध अपराधों के संबंध में इनका इजरायली सेना के साथ साथ आईसीसी ने नाम लिया था।

बस्ती निर्माण और फिलिस्तीनी जमीनों को जब्त करना, विस्तार करना, फिलिस्तीनियों के घरों और अन्य संपत्तियों को नष्ट करना, साथ ही 2008-09, 2012 और 2014 में गाजा में किए गए हिंसक सैन्य हमलों के साथ साथ इजरायल द्वारा गाजा की वायु, भूमि और समुद्री नाकेबंदी, गाजा-इज़रायल की सीमा पर ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न को लेकर विरोध प्रदर्शन का दमन, वेस्ट बैंक में नियमित सैन्य कार्रवाई और छापे के चलते हजारों फिलिस्तीनी लोगों की हत्याएं हुई हैं और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। इज़रायल द्वारा आईसीसी जांच में सहयोग न करने का निर्णय उस सहयोग और समन्वय के पूरी तरह उलट है जिसे फिलिस्तीनी सरकार के अधिकारियों ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में जांच करने का आईसीसी से वादा किया था। इजरायल के साथ साथ फिलिस्तीन की भी इस मामले में जांच की जानी है।

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